बुरहानपुर। वर्ष 2003 में बुरहानपुर को अलग जिले का दर्जा तो मिल गया, लेकिन अपनी जिला जेल के लिए शहर को दो दशक से ज्यादा इंतजार करना पड़ा। करीब 19 वर्षों से प्रस्ताव, जमीन, स्वीकृति और स्थल परिवर्तन के बीच घूम रही जिला जेल परियोजना अब निर्माण की दहलीज पर पहुंची है। ग्राम पंचायत पातोंडा के ग्राम भोलाना के समीप 15 एकड़ जमीन पर 73 करोड़ 44 लाख रुपए की लागत से जिला जेल और कर्मचारियों के आवास बनाए जाएंगे।
विधायक एवं पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस ने निर्माण स्थल का निरीक्षण कर दावा किया कि परियोजना की मंत्रि-परिषद से मंजूरी, प्रशासकीय स्वीकृति और टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तथा निर्माण कार्य जल्द शुरू होगा। लेकिन इस परियोजना का राजनीतिक महत्व केवल 73.44 करोड़ रुपए की मंजूरी तक सीमित नहीं है। इसके पीछे करीब दो दशक की लंबी कहानी है। कभी शहर के बीच जेल बनाने का प्रस्ताव आया, फिर बहादरपुर में जमीन तय हुई और आखिरकार जेल भोलाना पहुंची। अब जबकि तमाम सरकारी औपचारिकताएं पूरी होने का दावा है, असली परीक्षा इस बात की होगी कि निर्माण कितनी जल्दी जमीन पर दिखाई देता है।
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जिला 2003 में बना, जेल आज तक खंडवा के भरोसे
बुरहानपुर के प्रशासनिक इतिहास की यह बड़ी विडंबना रही कि जिला अलग हो गया, न्यायालय अलग हो गए, पुलिस और प्रशासनिक ढांचा खड़ा हो गया, लेकिन स्वतंत्र जिला जेल नहीं बन सकी। इसका सीधा असर पुलिस व्यवस्था पर पड़ा। बुरहानपुर की अदालतों में पेशी के लिए बंदियों को खंडवा से लाना और वापस ले जाना पड़ता है। इसमें पुलिस बल के साथ वाहन और समय लगता है। गंभीर मामलों के आरोपियों को सड़क मार्ग से लाने-ले जाने में सुरक्षा का अलग दबाव रहता है। यानी एक बुनियादी जिला स्तरीय सुविधा के अभाव का बोझ वर्षों से पुलिस और प्रशासन ढोता रहा है। नई जेल बनने पर यह निर्भरता काफी हद तक खत्म होगी। बंदियों की पेशी आसान होगी और पुलिस बल तथा वाहनों का अतिरिक्त उपयोग भी घटेगा।
19 साल की राजनीति: अर्चना ने निरीक्षण के साथ सामने रखी अपनी कोशिशों की टाइमलाइन
जेल परियोजना ऐसे समय फिर चर्चा में आई है जब विधायक अर्चना चिटनिस ने निर्माण स्थल का निरीक्षण कर इसके पीछे अपने 19 वर्षों के प्रयासों को प्रमुखता से सामने रखा है। चिटनिस का कहना है कि बुरहानपुर को स्वतंत्र जिला जेल दिलाने के लिए वह लगातार प्रयास करती रही हैं। अब 73.44 करोड़ रुपए की परियोजना को कैबिनेट की मंजूरी, प्रशासकीय स्वीकृति और टेंडर पूरा होने के बाद उन प्रयासों को निर्णायक परिणाम मिलने की स्थिति बनी है। राजनीतिक तौर पर भी यह परियोजना महत्वपूर्ण है। यदि निर्माण तेजी से शुरू होकर तय समय में पूरा होता है तो भाजपा और स्थानीय विधायक इसे बुरहानपुर की वर्षों पुरानी मांग पूरी करने वाली बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर सकेंगे। लेकिन परियोजना का इतिहास लंबा होने के कारण सिर्फ स्वीकृति और टेंडर राजनीतिक उपलब्धि की अंतिम कसौटी नहीं होंगे। अब सवाल निर्माण की शुरुआत, उसकी गति और समय पर पूर्णता का है।
पहले शहर के बीच बननी थी जेल, अस्पताल को 7 किमी दूर ले जाने की थी तैयारी
इस परियोजना का सबसे दिलचस्प पहलू इसके बदलते ठिकाने हैं। पूर्व में शहर के मध्य स्थित जिला चिकित्सालय की जगह जिला जेल निर्माण का प्रस्ताव था, जबकि जिला चिकित्सालय को शहर से करीब 7 किलोमीटर दूर स्थानांतरित करने की योजना थी। चिटनिस के अनुसार उनके प्रयासों और पहल के बाद यह तस्वीर बदली। शहर के मध्य जेल के बजाय जिला चिकित्सालय के निर्माण का रास्ता साफ हुआ और जिला जेल के लिए दूसरी जगह तलाश की गई। यानी जिला जेल की मौजूदा परियोजना केवल नई जेल बनाने की कहानी नहीं है, बल्कि शहर के भीतर दो महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों की जगह और उपयोग तय करने से जुड़ा लंबा प्रशासनिक फैसला भी रही है।
बहादरपुर पहुंची जेल तो सामने आया ‘एजुकेशन हब’
इसके बाद ग्राम बहादरपुर के समीप करीब 12 एकड़ जमीन जिला जेल के लिए प्रस्तावित हुई। यहां जेल निर्माण की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ी, लेकिन इसी बीच क्षेत्र की परिस्थितियां बदल गईं। नवोदय विद्यालय सहित अन्य शैक्षणिक संस्थानों के विस्तार के कारण बहादरपुर क्षेत्र तेजी से शैक्षणिक हब के रूप में विकसित होने लगा। यहीं से जेल के स्थान को लेकर नया सवाल खड़ा हुआ—क्या विद्यार्थियों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच जिला जेल बनाना उचित होगा? चिटनिस का कहना है कि विद्यार्थियों के हित और क्षेत्र के भविष्य को देखते हुए उन्होंने यहां जेल निर्माण को उचित नहीं माना। इसके बाद फिर वैकल्पिक स्थल तलाशने की प्रक्रिया शुरू हुई।
तीसरी जगह पर लगी मुहर: भोलाना में 12 नहीं, अब 15 एकड़ जमीन
अंततः ग्राम पंचायत पातोंडा के ग्राम भोलाना के समीप 15 एकड़ भूमि का चयन किया गया। जमीन जेल विभाग को आवंटित की जा चुकी है। इस तरह जिला जेल की कहानी में शहर से बहादरपुर और बहादरपुर से भोलाना तक स्थान बदलता रहा। अब भोलाना को अंतिम ठिकाना मानकर परियोजना आगे बढ़ाई जा रही है। नई जगह पर जेल के साथ कर्मचारियों के आवास भी बनाए जाएंगे। वहीं जिला जेल के समीप गौशाला निर्माण भी प्रस्तावित है।
7 अगस्त 2024 को कैबिनेट की हरी झंडी, 73.44 करोड़ की प्रशासकीय मंजूरी
परियोजना को निर्णायक सरकारी मंजूरी 7 अगस्त 2024 को मिली थी। जिला जेल निर्माण के लिए मुख्य अभियंता भवन, लोक निर्माण विभाग इंदौर/भोपाल को 73 करोड़ 44 लाख रुपए का प्राक्कलन तैयार कर भेजा गया था।इसके बाद मध्यप्रदेश मंत्रि-परिषद ने परियोजना को मंजूरी दी। जेल विभाग की ओर से 73.44 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति जारी हुई और अब टेंडर प्रक्रिया भी पूरी होने की बात कही गई है। यानी कागजों पर परियोजना के लगभग सभी बड़े पड़ाव पूरे हो चुके हैं—जमीन तय, आवंटन पूरा, कैबिनेट की मंजूरी, बजट की प्रशासकीय स्वीकृति और टेंडर भी पूरा। अब बचा है वह चरण जिसका बुरहानपुर वर्षों से इंतजार कर रहा है—जमीन पर वास्तविक निर्माण।
सियासी संदेश साफ: 19 साल के संघर्ष को उपलब्धि में बदलने की तैयारी
निर्माण स्थल पर चिटनिस के साथ भाजपा जिलाध्यक्ष और पार्टी से जुड़े कई पदाधिकारियों की मौजूदगी ने निरीक्षण को प्रशासनिक के साथ राजनीतिक रूप भी दिया। चिटनिस ने परियोजना के पीछे अपने 19 वर्षों के प्रयासों को सामने रखा है। ऐसे में आने वाले समय में जिला जेल भाजपा की स्थानीय विकास राजनीति में एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश होना तय माना जा सकता है। हालांकि राजनीतिक श्रेय का असली आधार तभी मजबूत होगा जब निर्माण निर्धारित समय में पूरा हो और बुरहानपुर की खंडवा जेल पर निर्भरता वास्तव में खत्म हो। 19 साल का इंतजार मंजूरी मिलने से खत्म नहीं होगा; वह उस दिन खत्म माना जाएगा जब बुरहानपुर की अपनी जिला जेल शुरू होगी।
बड़ा सवाल—टेंडर पूरा तो निर्माण की तारीख क्या?
परियोजना की फाइल अब उस मुकाम पर है जहां नई स्वीकृतियों से ज्यादा जरूरत मैदानी काम की है। जब जमीन आवंटित है, 73.44 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति है और टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है, तब स्वाभाविक सवाल है—निर्माण एजेंसी कब साइट पर उतरेगी, काम पूरा करने की समय-सीमा क्या है और जेल कब तक शुरू होगी? क्योंकि बुरहानपुर इस परियोजना के प्रस्तावों और स्थान बदलने का दौर काफी देख चुका है। अब शहर को घोषणा नहीं, 73.44 करोड़ की परियोजना को जमीन पर आकार लेते देखने का इंतजार है।
निरीक्षण के दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. मनोज माने, जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि प्रदीप पाटिल, आशीष शुक्ला, संभाजीराव सगरे, धनराज महाजन, गौरव शिवहरे, ईश्वर चौहान, दुर्गेश शर्मा, जिला मीडिया प्रभारी मुकेश पूर्वे, सुनील वाघे, नितिन महाजन, रवि काकड़े, चिंटू राठौड़, दीपक महाजन, भरत रावल और उमेश देवस्कर सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।



