बुरहानपुर। राहुल गांधी अभी इंदौर पहुंचे भी नहीं हैं, लेकिन उनके 19 सितंबर के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम की राजनीतिक गूंज निमाड़ में पहले ही सुनाई देने लगी है। खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल के बाद बुरहानपुर विधायक और भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अर्चना चिटनिस ने राहुल गांधी पर सीधा हमला बोला है। भाजपा ने जहां राहुल की राजनीति, युवाओं को लेकर उनकी भूमिका और सोच पर सवाल उठाए, वहीं कांग्रेस ने जवाब में भाजपा को बुरहानपुर के गड्ढों, गंदगी, बेरोजगारी और उच्च शिक्षा के मुद्दे पर घेर दिया।
यानी इंदौर में होने वाले छात्रों के कार्यक्रम से पहले लड़ाई अब केवल राहुल गांधी के बयान या व्यक्तित्व तक सीमित नहीं रही। कांग्रेस इसे युवाओं के समर्थन से जोड़ रही है तो भाजपा राहुल की राजनीति को ही कठघरे में खड़ा कर रही है।
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सांसद का वार—राहुल जितना प्रचार करेंगे, हमें उतनी ताकत मिलेगी
करीब तीन दिन पहले खंडवा में मीडिया के सवाल पर सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने राहुल गांधी को लेकर तीखी टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि राहुल गांधी अपनी पार्टी का काम करें, भाजपा सेवा का काम कर रही है। सांसद ने कहा, “राहुल गांधी को लोग बहुत ज्यादा सीरियस लेते हैं, ऐसा मैं नहीं समझता। वे जितना अच्छा प्रचार-प्रसार करेंगे, हमें उतनी ताकत मिलेगी और हमारे कार्यकर्ता और अच्छे से काम करेंगे।” इसके बाद पाटिल ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का लक्ष्य देश के युवाओं को “भड़काना और भटकाना” है। उन्होंने उन पर देश विरोधी ताकतों के साथ खड़े होने का भी आरोप लगाया। इसके मुकाबले भाजपा का लक्ष्य युवाओं की चिंता, रोजगार और देश का सम्मान व स्वाभिमान बढ़ाना बताया। सांसद के इस बयान ने राहुल गांधी के प्रस्तावित दौरे से पहले ही राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया।
अर्चना ने और बढ़ाया हमला—राहुल को बताया ‘नकारात्मक व्यक्ति’
इसके बाद सोमवार को बुरहानपुर में सेवा संकल्प अभियान को लेकर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में विधायक एवं भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अर्चना चिटनिस का बयान सामने आया। चिटनिस ने राहुल गांधी को “नकारात्मक व्यक्ति” बताते हुए कहा कि वे देश की प्रगति से दुखी होने वाले व्यक्ति हैं। उन्होंने कहा, “सेवा के संकल्प के समय मैं परम पिता परमेश्वर से यही प्रार्थना करूंगी कि राहुल गांधी जी का मानसिक स्वास्थ्य बेहतर कर दें।” एक तरफ सांसद ने राहुल की युवा राजनीति पर सवाल उठाया तो दूसरी तरफ चिटनिस ने उनकी सोच और राजनीतिक दृष्टिकोण को निशाने पर लिया। भाजपा के दो प्रमुख नेताओं के लगातार बयानों के बाद कांग्रेस भी सीधे मैदान में उतर आई।
कांग्रेस का जवाब—इतनी बयानबाजी ही भाजपा की बेचैनी बता रही
शहर कांग्रेस अध्यक्ष रिंकू टाक ने सांसद और विधायक दोनों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि भाजपा नेता जिस तरह लगातार राहुल गांधी को निशाना बना रहे हैं, वह उनकी राजनीतिक बेचैनी को दिखाता है। टाक ने दावा किया कि राहुल गांधी की लोकप्रियता और ‘छात्रों की गूंज’ के माध्यम से युवाओं का मिल रहा समर्थन भाजपा नेताओं को परेशान कर रहा है। इसी कारण राहुल गांधी को लेकर लगातार बयान दिए जा रहे हैं। कांग्रेस की रणनीति साफ दिखाई दे रही है। वह भाजपा के राहुल-केंद्रित हमले का जवाब केवल राहुल के बचाव में नहीं, बल्कि इसे युवा समर्थन बनाम भाजपा की बेचैनी के नैरेटिव में बदलने की कोशिश कर रही है।
रघुवंशी ने पलटा सवाल—राहुल छोड़िए, बुरहानपुर के गड्ढों पर जवाब दीजिए
पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष अजय सिंह रघुवंशी ने हमले को सीधे स्थानीय राजनीति की तरफ मोड़ दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नेता छात्रों के कार्यक्रम को ‘सर्कस’ और ‘झूठ की गूंज’ बता रहे हैं और ऐसी बयानबाजी राजनीतिक नंबर बढ़ाने के लिए की जा रही है। रघुवंशी ने विधायक को बुरहानपुर के मुद्दों पर घेरते हुए सवाल उठाया—शहर के गड्ढे क्यों नहीं दिखते? गंदगी क्यों नहीं दिखाई देती? बेरोजगारी पर बात क्यों नहीं होती? उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि लंबे समय तक भाजपा की सरकार रहने के बावजूद बुरहानपुर में उच्च शिक्षा के लिए पर्याप्त फैकल्टी उपलब्ध नहीं कराई जा सकी। यहीं से राजनीतिक बहस का मुद्दा भी बदल गया। भाजपा जहां राहुल गांधी की राजनीति और युवाओं को लेकर उनकी भूमिका पर सवाल उठा रही है, वहीं कांग्रेस भाजपा नेताओं से स्थानीय विकास और युवाओं से जुड़े मुद्दों का हिसाब मांग रही है।
‘छात्रों की गूंज’ से पहले बयानबाजी की गूंज
19 सितंबर का कार्यक्रम छात्रों और युवाओं से जुड़ा है, इसलिए दोनों दलों की राजनीति का केंद्र भी फिलहाल युवा ही हैं। सांसद का आरोप है कि राहुल युवाओं को भटकाते हैं। भाजपा अपनी राजनीति को रोजगार और राष्ट्रहित से जोड़ रही है। दूसरी ओर कांग्रेस का दावा है कि राहुल को युवाओं से मिल रहा समर्थन ही भाजपा की बेचैनी का कारण है। अब दिलचस्प यह है कि राहुल गांधी के इंदौर पहुंचने से पहले ही खंडवा-बुरहानपुर की राजनीति में ‘छात्रों की गूंज’ सत्ता और विपक्ष की जुबानी जंग में बदल चुकी है। भाजपा राहुल गांधी को राष्ट्रीय राजनीति के मुद्दों पर घेर रही है, जबकि कांग्रेस उसी हमले को पलटकर बुरहानपुर के विकास, शिक्षा और बेरोजगारी के सवालों तक ले आई है। ऐसे में 19 सितंबर के कार्यक्रम से पहले सियासी सवाल भी साफ है—बहस राहुल गांधी के व्यक्तित्व और बयानों पर टिकेगी या फिर छात्रों, रोजगार और स्थानीय विकास के मुद्दों तक पहुंचेगी?



