बुरहानपुर/नेपानगर। सुबह से शाम तक खेतों में मजदूरी, परिवार के भरण-पोषण की चिंता और घर की जरूरतें पूरी करने की जद्दोजहद। इसके बावजूद जब मेहनत की कमाई शराब की भेंट चढ़ने लगे तो परिवार कैसे संभले? इसी पीड़ा और आक्रोश के साथ शनिवार को ग्राम मांडवा की आदिवासी महिलाएं अवैध शराब के खिलाफ नेपानगर थाने पहुंचीं। महिलाएं ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य वाहनों से बड़ी संख्या में थाने आईं और थाना प्रभारी शहाबुद्दीन कुरैशी को ज्ञापन सौंपकर गांव में अवैध देशी और कच्ची शराब की बिक्री बंद कराने की मांग की।
महिलाओं का आरोप है कि आदिवासी बहुल मांडवा के लगभग हर मोहल्ले में अवैध शराब के अड्डे संचालित हो रहे हैं। नशे के कारण परिवारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है और घरों में अशांति बढ़ रही है। महिलाओं ने चेतावनी दी कि जल्द प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण एकजुट होकर बड़ा आंदोलन करेंगे।
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महिलाओं का दर्द- दिनभर मजदूरी करते हैं, फिर भी घर की जरूरतें अधूरी रह जाती हैं
ज्ञापन में महिलाओं ने बताया कि गांव की अनेक महिलाएं खेतों में मजदूरी कर परिवार चलाती हैं। उनका आरोप है कि परिवार के कुछ पुरुष शराब पर पैसा और अनाज खर्च कर देते हैं। इससे घरेलू खर्च प्रभावित होता है और आर्थिक परेशानियां बढ़ती हैं। महिलाओं की चिंता सिर्फ शराब की बिक्री तक सीमित नहीं है। वे अपने परिवारों को नशे के दुष्प्रभाव से बचाना चाहती हैं। उनका कहना है कि गांव में अवैध शराब आसानी से उपलब्ध होने के कारण नशामुक्ति के प्रयासों को अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही है। सवाल यह है कि जब गांव की महिलाओं को शराब के खिलाफ सामूहिक रूप से थाने पहुंचना पड़ रहा है, तो अवैध बिक्री रोकने की जिम्मेदारी निभाने वाले विभागों की निगरानी कितनी प्रभावी है?
हर मोहल्ले में अवैध शराब बिकने का आरोप, पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
महिलाओं ने ज्ञापन में दावा किया कि मांडवा के विभिन्न मोहल्लों में अवैध देशी और कच्ची शराब बेची जा रही है। उनका आरोप है कि समस्या की जानकारी होने के बावजूद अब तक बिक्री पर प्रभावी रोक नहीं लग सकी है। ग्रामीणों की मांग है कि केवल एक-दो स्थानों पर कार्रवाई करने के बजाय अवैध शराब की बिक्री और आपूर्ति की पूरी व्यवस्था की जांच की जाए, ताकि कार्रवाई का स्थायी असर दिखाई दे। हालांकि गांव में कितने स्थानों पर अवैध शराब बिक रही है और किन लोगों की संलिप्तता है, इसकी पुष्टि पुलिस एवं आबकारी विभाग की जांच से ही हो सकेगी।
25 अक्टूबर को शिवपंथी सत्संग, उससे पहले गांव को नशामुक्त बनाने की मांग
मांडवा में 25 अक्टूबर को शरद कोजागिरी पूर्णिमा के अवसर पर शिवपंथी सत्संग एवं नशामुक्ति कार्यक्रम आयोजित किया जाना है। ग्रामीण चाहते हैं कि आयोजन से पहले गांव में अवैध शराब की बिक्री बंद कराई जाए। आदिवासी एकता परिषद के नाहर सिंह ने क्षेत्र में अवैध शराब पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की। वहीं कल्ली बाई ने कहा कि गांव में नशामुक्ति का कार्यक्रम होने जा रहा है, ऐसे में जगह-जगह शराब की बिक्री बंद होनी चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि नशामुक्ति का संदेश तभी प्रभावी होगा, जब अवैध शराब की उपलब्धता रोकने के लिए प्रशासन भी ठोस कदम उठाए।
हैदरपुर में 100 से अधिक महिलाओं ने खोला था मोर्चा, अब मांडवा में उठी आवाज
नेपानगर क्षेत्र में अवैध शराब के खिलाफ महिलाओं का यह पहला विरोध नहीं है। कुछ दिन पहले हैदरपुर की 100 से अधिक महिलाओं ने समिति बनाकर अवैध शराब बिक्री का विरोध किया था। महिलाओं की पहल पर एक स्थान से शराब पकड़े जाने के बाद नावरा चौकी पुलिस ने एक महिला के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था। इसके बाद क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री में कमी आने की बात सामने आई थी। अब मांडवा की महिलाओं ने भी संगठित होकर कार्रवाई की मांग उठाई है। लगातार अलग-अलग गांवों से उठ रही आवाजें बताती हैं कि अवैध शराब की समस्या को लेकर ग्रामीण महिलाओं में असंतोष बढ़ रहा है।
पुलिस कार्रवाई करती है, फिर आबकारी विभाग की निगरानी पर सवाल क्यों?
अवैध शराब की बिक्री रोकने की जिम्मेदारी पुलिस के साथ आबकारी विभाग की भी है। क्षेत्र में पुलिस द्वारा समय-समय पर आबकारी अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके बावजूद ग्रामीणों की शिकायतें जारी हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आबकारी विभाग ने प्रभावित गांवों में कितनी बार जांच की, कितने प्रकरण दर्ज किए और अवैध बिक्री रोकने के लिए क्या स्थायी कदम उठाए? इन सवालों का जवाब विभागीय कार्रवाई के रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकेगा।
सहायक जिला आबकारी अधिकारी मुकेश गौर ने कहा, “शिकायत अभी हमारे पास नहीं आई है। जैसे ही शिकायत मिलेगी, कार्रवाई करेंगे। वस्तुस्थिति का पता कर रहा हूं। पहले भी महिलाओं की शिकायत पर कार्रवाई की गई थी।”
शराब बंद नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन, महिलाओं की चेतावनी
मांडवा की महिलाओं ने स्पष्ट किया है कि यदि गांव में अवैध शराब की बिक्री जल्द बंद नहीं हुई तो ग्रामीण मिलकर बड़ा आंदोलन करेंगे। उन्होंने इसकी जिम्मेदारी प्रशासन पर होने की चेतावनी भी दी है। अब पुलिस और आबकारी विभाग के सामने चुनौती केवल शिकायत मिलने पर कार्रवाई करने की नहीं, बल्कि गांव में अवैध शराब की बिक्री के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर प्रभावी रोक लगाने की है।
मांडवा की महिलाओं की आवाज में सिर्फ विरोध नहीं, अपने परिवारों को नशे से बचाने की चिंता भी है। वे चाहती हैं कि खेतों में बहाया गया पसीना परिवार की जरूरतें पूरी करे, शराब पर खर्च न हो। अब देखना होगा कि उनकी इस मांग पर प्रशासन कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है।

