बुरहानपुर। वरिष्ठ नागरिकों को न्याय दिलाने के लिए बनाई गई व्यवस्था में एक मामला ऐसा सामने आया है, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वरिष्ठ नागरिक अपीलीय अधिकरण/कलेक्टर बुरहानपुर (पीठासीन अधिकारी हर्ष सिंह) के समक्ष वरिष्ठ नागरिक अंसारी बहनों द्वारा दायर अपील में पारित आदेश दिनांक 28.01.2026 को अधिवक्ता मनोज कुमार अग्रवाल ने त्रुटिपूर्ण और गैरकानूनी बताया है।
अधिवक्ता मनोज अग्रवाल ने आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि उनकी क्लाइंट्स अंसारी बहनों ने उन्हें यह आदेश हाईकोर्ट में चुनौती देने के निर्देश दिए हैं। उनका दावा है कि अपील में राहत मिलने की बजाय पहले मिली सुरक्षा भी खत्म कर दी गई।
एडवोकेट मनोज अग्रवाल के अनुसार, इससे पहले वरिष्ठ नागरिक अधिकरण/एसडीओ ने 13.10.2025 को आदेश पारित करते हुए अंसारी बहनों से जुड़ी 39 लाख रुपए की राशि सुरक्षित रखने, और अब्दुल करीम व अशफाक बंधु की विवादित दुकान किसी अन्य को बिक्री न करने के निर्देश दिए थे। यह आदेश अंसारी बहनों के लिए एक तरह से अस्थायी राहत और सुरक्षा कवच माना जा रहा था।
अपील का उद्देश्य: सुरक्षित राशि का भुगतान कराया जाए
अंसारी बहनों की ओर से अपीलीय अधिकरण/कलेक्टर के समक्ष अपील इस मांग के साथ दायर की गई थी कि जो 39 लाख रुपए “सिर्फ सुरक्षित” रखे गए हैं, उन्हें संशोधित कर राशि का भुगतान अंसारी बहनों को कराया जाए। यानी अपील का उद्देश्य स्पष्ट था— राशि वापस मिल सके और न्याय की प्रक्रिया आगे बढ़े।
कलेक्टर का आदेश: अपील खारिज… और पुराना संरक्षण आदेश भी निरस्त!
एडवोकेट अग्रवाल का आरोप है कि अपीलीय अधिकरण/कलेक्टर ने अंसारी बहनों की अपील निरस्त कर दी और साथ ही एसडीओ द्वारा पारित 39 लाख सुरक्षित रखने और दुकान सुरक्षित रखने वाला आदेश भी निरस्त कर दिया। अधिवक्ता का कहना है कि यह फैसला अंसारी बहनों के हितों के खिलाफ है और कलेक्टर/अपीलीय अधिकरण को ऐसा करने का अधिकार नहीं था।
आधी रोटी लेने गए… पूरी रोटी ही छिन गई!
एडवोकेट मनोज अग्रवाल ने इस पूरे मामले को बेहद तीखे अंदाज में समझाते हुए कहा यह वैसा ही है जैसे किसी को आधी रोटी मिली हो… और वह बाकी आधी रोटी मांगने जाए, तो न सिर्फ बाकी नहीं मिले बल्कि जो आधी मिली थी, वो भी वापस ले ली जाए। अधिवक्ता ने कहा कि 28 जनवरी 2026 का आदेश उनकी नजर में पूरी तरह गैरकानूनी और त्रुटिपूर्ण है, इसलिए इसे माननीय उच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी।