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दिल्ली में अवॉर्ड का जश्न, बुरहानपुर में पानी का संकट! 150 करोड़ की योजना पर बड़ा खेल?

- कम प्रेशर, मटमैला पानी और अधूरे कनेक्शन—जमीनी हकीकत पर उठे तीखे सवाल

On: February 27, 2026 10:38 AM
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बुरहानपुर जल योजना को दिल्ली में अवॉर्ड, जमीनी हकीकत पर सवाल

बुरहानपुर। राजधानी दिल्ली के भव्य मंच पर तालियों की गूंज के बीच बुरहानपुर की ताप्ती जलावर्धन योजना को “सोशल इंपैक्ट एक्सीलेंस ऑफ द ईयर” का राष्ट्रीय सम्मान मिला। नई दिल्ली में आयोजित बिल्ड इंडिया इंफ्रा अवॉर्ड्स 2026 में यह पुरस्कार मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्पनी (एमपी यूडीसी) की बुरहानपुर जल प्रदाय परियोजना को प्रदान किया गया। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने यह सम्मान सौंपा, जबकि समारोह में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी सहित कई दिग्गज मौजूद रहे। लेकिन सवाल यह है कि क्या दिल्ली का यह सम्मान बुरहानपुर की जमीनी सच्चाई से मेल खाता है?

Sadaiv News
आज भी कई वार्डो में खुदाई का काम चल रहा है
दावा—41 हजार घरों तक रोज 135 लीटर पानी, हकीकत—कई वार्ड अब भी इंतजार में

एमपी यूडीसी का दावा है कि शहर के करीब 41 हजार परिवारों को मीटरयुक्त कनेक्शन के जरिए प्रतिदिन 135 लीटर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। जमीनी पड़ताल में सामने आया कि शहर के कई वार्डों में पाइपलाइन बिछने के बावजूद कनेक्शन नहीं जुड़े हैं। सिंधी बस्ती, बाहरी कॉलोनियों और पुराने शहर के हिस्सों में या तो टेस्टिंग अधूरी है या फिर पानी का प्रेशर इतना कम है कि नल से पतली धार निकलती है। स्थानीय लोगों का कहना है—“लाइन डाल दी, फोटो खिंचवा ली, लेकिन पानी आज तक नहीं आया।”

तीसरी मंजिल का वादा, पहली मंजिल पर भी मोटर मजबूरी

निर्माण एजेंसी JMC Projects (जेएमसी) ने दावा किया था कि बिना मोटर के तीसरी मंजिल तक पानी पहुंचेगा। लेकिन जमीनी स्थिति यह है कि कई घरों में पहली मंजिल तक पानी चढ़ाने के लिए मोटर लगानी पड़ रही है। कम प्रेशर और अनियमित सप्लाई के कारण लोगों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है।

मटमैले पानी पर पहले भी भड़का था आक्रोश

योजना पहले भी विवादों में रह चुकी है। पाइपलाइन से मटमैला और बदबूदार पानी सप्लाई होने के आरोप लगे थे। भाजपा और कांग्रेस के पार्षदों ने इस मुद्दे पर आंदोलन किया था। कुछ इलाकों में अब भी पानी की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं। सवाल उठता है—अगर 50 एमएलडी क्षमता का अत्याधुनिक जलशोधन संयंत्र काम कर रहा है, तो फिर गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न क्यों?

150 करोड़ की परियोजना, 2 साल की समयसीमा… 8 साल बाद भी अधूरी

करीब 150 करोड़ की लागत से वर्ष 2017 में शुरू हुई योजना को दो साल में पूरा होना था। लेकिन आठ साल बाद भी काम अधूरा है। महापौर माधुरी पटेल और विधायक अर्चना चिटनिस इस मामले को मुख्यमंत्री तक ले जा चुकी हैं और विधानसभा में भी सवाल उठा चुकी हैं। बावजूद इसके निर्माण एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने के बजाय लगातार एक्सटेंशन दिए जाने की चर्चा है।

तकनीकी दावों की लंबी सूची, जमीनी स्तर पर अधूरी तस्वीर

परियोजना में 50 एमएलडी जलशोधन संयंत्र, स्काडा मॉनिटरिंग सिस्टम, वॉटर टेस्टिंग लैब और 8 नए ओवरहेड टैंकों का निर्माण शामिल है। दावा है कि पुराने जर्जर नेटवर्क को बदलकर आधुनिक पाइपलाइन बिछाई गई है और जल अपव्यय रोका गया है। लेकिन जब कई वार्डों में नियमित सप्लाई ही नहीं है, तो “समान और न्यायपूर्ण वितरण” का दावा सवालों के घेरे में आ गया है।

अवॉर्ड पर शहर में चर्चा—क्या बढ़ा-चढ़ाकर पेश हुए आंकड़े?

अवॉर्ड मिलने के बाद शहर में बहस तेज हो गई है। आमजन पूछ रहे हैं—

  • अगर हर घर तक 135 लीटर पानी पहुंच रहा है, तो शिकायतें क्यों?
  • अगर प्रेशर पर्याप्त है, तो मोटर क्यों?
  • अगर परियोजना पूरी है, तो टेस्टिंग और कनेक्शन अधूरे क्यों?

दिल्ली में मिला सम्मान प्रदेश के लिए गर्व की बात है। लेकिन बुरहानपुर की जनता के लिए असली सम्मान तब होगा, जब हर घर में नियमित, स्वच्छ और पर्याप्त पानी पहुंचेगा।

अवॉर्ड की चमक और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर अब शहर की सबसे बड़ी चर्चा बन चुका है।

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