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85 लाख का गबन! बिरोदा सहकारी समिति में किसानों की जमा राशि पर हाथ

तीन-चार साल तक ‘धीरे-धीरे’ निकली रकम, ऑडिट में खुली परतें; जांच दल बैठा, एफआईआर पर अब भी सस्पेंस

On: February 27, 2026 7:35 PM
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बुरहानपुर। जिले के ग्राम बिरोदा स्थित प्राथमिक सेवा सहकारी समिति बिरोदा में करीब 85 लाख रुपए की कथित गड़बड़ी सामने आने से हड़कंप मच गया है। आरोप है कि 2022-23 से 2024-25 के बीच किसानों की जमा राशि में से रकम “थोड़ा-थोड़ा” कर निकाली जाती रही और किसी को भनक तक नहीं लगी। मामला तब खुला जब नवंबर 2025 में नए प्रबंधक ने चार्ज लेकर ऑडिट कराया।

Sadaiv News
बिरोदा समिति में कार्यरत कर्मचारी
लिपिक के पास प्रबंधक का प्रभार, यहीं से शुरू हुआ खेल?

सूत्रों के मुताबिक तत्कालीन प्रभारी प्रबंधक संतोष महाजन मूल रूप से लिपिक थे, लेकिन कई वर्षों से प्रबंधक का प्रभार देख रहे थे। इसी दौरान कथित अनियमितताएं हुईं। बताया जा रहा है कि सरकार के निर्देश पर जब खातों का डेटा ऑनलाइन अपडेट किया गया, तो साल-दर-साल बैलेंस में कमी नजर आई। यहीं से शक गहराया और ऑडिट में गड़बड़ी की पुष्टि हुई। नवंबर 2025 में प्रभार लेने वाले वर्तमान प्रबंधक कनिष्क भालसे ने बताया कि चार्ज संभालते ही रिकॉर्ड का ऑडिट कराया गया, जिसमें अनियमितता सामने आई। उनके अनुसार मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में है और जांच दल गठित कर दिया गया है।

85 लाख या 40-50 लाख? आंकड़ों पर भी सवाल

एक ओर संस्था स्तर पर 85 लाख रुपए तक की गड़बड़ी की बात कही जा रही है, वहीं कृषि शाखा के वरिष्ठ शाखा प्रबंधक अशोक चौधरी का कहना है कि प्रारंभिक जांच में 40 से 50 लाख रुपए की अनियमितता सामने आई है। जांच पूरी होने के बाद वास्तविक राशि स्पष्ट होगी।

नवंबर में खुलासा, एफआईआर अब तक नहीं

सबसे बड़ा सवाल—जब नवंबर 2025 में ऑडिट में गड़बड़ी उजागर हो गई, तो एफआईआर अब तक क्यों नहीं? सूत्रों का दावा है कि मामला दबाने की कोशिश भी हुई। फिलहाल विभाग जांच की बात कह रहा है और वसूली नहीं होने पर एफआईआर दर्ज कराने की बात कही जा रही है। उधर, आरोपित संतोष महाजन के समिति में न आने और अधिकारियों के फोन नहीं उठाने की चर्चा भी तेज है।

किसानों की मेहनत की कमाई दांव पर

सहकारी समितियों में किसान अपनी उपज का भुगतान और बचत की रकम जमा करते हैं। ऐसे में यदि कई साल तक राशि में कटौती होती रही और निगरानी तंत्र सोता रहा, तो यह सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, व्यवस्था की भी विफलता मानी जाएगी। ग्रामीणों में आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि समय-समय पर पारदर्शी ऑडिट होता, तो नुकसान इतना बड़ा नहीं होता।

आगे क्या?
  • जांच दल की विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार
  • वास्तविक गड़बड़ी की राशि तय होगी
  • वसूली की कार्रवाई या सीधे एफआईआर?
  • निगरानी तंत्र की जवाबदेही तय होगी या नहीं?

फिलहाल बिरोदा की इस गूंज ने पूरे जिले की सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब नजर इस पर है कि कार्रवाई कितनी तेज और कितनी निष्पक्ष होती है।

किसानों का सीधा सवाल—“हमारी मेहनत की कमाई सुरक्षित है या नहीं?

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