बुरहानपुर। लालबाग रोड स्थित हकीमी अस्पताल एक बार फिर सुर्खियों में है। जैनाबाद निवासी वैष्णवी नागेश चौहान की बच्चादानी के ऑपरेशन के दौरान हुई मौत और कुछ ही दिनों बाद उनके पति नागेश चौहान की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद दर्ज एफआईआर ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस ने अस्पताल संचालक डॉ. मुफज्जल बोहरा और डॉ. रेहाना बोहरा पर लापरवाही का मामला दर्ज किया है, लेकिन मृतकों के परिजन इस कार्रवाई से नाराज हैं। उनका आरोप है कि इतनी गंभीर घटना के बाद भी केवल गैर इरादतन हत्या की धाराओं में केस दर्ज कर पुलिस ने खानापूर्ति की है।
छह-सात लोग थे शामिल, सिर्फ दो पर केस क्यों?
पत्रकार वार्ता में महेश सिंह चौहान ने कहा कि वैष्णवी की मौत के दौरान ऑपरेशन थिएटर में छह से सात लोग मौजूद थे। आरोप है कि इनमें कुछ ऐसे लोग भी थे जिनकी डिग्री और योग्यता संदिग्ध है। परिजनों का सवाल है—जब पूरी टीम ऑपरेशन में शामिल थी तो सिर्फ बोहरा दंपत्ति पर केस क्यों? पूरे अस्पताल प्रबंधन पर हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए।
थाने से ही मिल जाएगी जमानत
महेश सिंह चौहान का कहना है कि गैर इरादतन हत्या की धारा में थाने से ही जमानत संभव है। ऐसे में आरोपियों को कड़ी सजा मिलना मुश्किल है। परिजन इसे न्याय के साथ खिलवाड़ बता रहे हैं।
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
परिजनों ने दावा किया कि हकीमी अस्पताल में यह पहला मामला नहीं है। पूर्व में भी मौत और गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही के आरोप लगे हैं। कुछ मामलों में मरीजों के अंग कटने तक की घटनाएं सामने आईं। इन आरोपों के चलते शहर में पहले भी आक्रोश पनप चुका है।
स्टे मिला है, लेकिन हमें सूचना नहीं
महेश सिंह चौहान ने आरोप लगाया कि अस्पताल को स्वास्थ्य विभाग से स्टे मिल गया है, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक पत्र परिजनों को नहीं मिला। उन्होंने साफ कहा यदि अस्पताल दोबारा खोला गया तो वे मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय जाएंगे।
दबाव की भी शिकायत
श्री चौहान ने आरोप लगाया कि उनसे जुड़े कुछ राजनीतिक लोगों और रिश्तेदारों ने फोन और घर पहुंचकर समझौते का दबाव बनाया। पुलिस पर भी अप्रत्यक्ष दबाव बनाने का आरोप लगाया गया। परिजनों का कहना है कि उन्हें चेतावनी दी गई कि अगर धरना-प्रदर्शन या हड़ताल की गई तो शासकीय कार्य में बाधा और तोड़फोड़ के मामले दर्ज किए जाएंगे।
शहर में उबाल
दो मौतों के बाद दर्ज हुई एफआईआर ने शहर में बहस छेड़ दी है—क्या यह केवल चिकित्सकीय लापरवाही है या उससे बड़ा अपराध? परिजन हत्या की धाराओं में केस दर्ज करने की मांग पर अड़े हैं। उधर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की अगली कार्रवाई पर सबकी नजर टिकी है। अब सवाल यह है कि न्याय की इस जंग में सच्चाई किसके पक्ष में खड़ी होगी?