बुरहानपुर। आलमगंज मालीवाड़ा की तंग गलियों में मंगलवार को हुआ निकिता सुरागे हत्याकांड अब सिर्फ एक हत्या नहीं, शहर का सबसे बड़ा आक्रोश बन गया है। 23 वर्षीय फर्नीचर डिजाइनर निकिता की बेरहमी से चाकू मारकर हत्या के बाद बुधवार को उसके परिजन, रिश्तेदार और समाज के लोग सीधे कलेक्ट्रेट पहुंच गए। परिसर में नारे गूंजते रहे “हत्यारे को फांसी दो”, “आरोपी का मकान-दुकान तोड़ो”। गुस्से से भरे लोगों ने डिप्टी कलेक्टर राजेश पाटीदार को ज्ञापन सौंपकर आरोपी अर्जुन सुगंधी पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
परिवार का आरोप है कि निकिता की हत्या कोई अचानक हुई वारदात नहीं, बल्कि लगातार दबाव, पीछा करने और मानसिक प्रताड़ना का नतीजा है। जिस लड़की की 19 दिन बाद सगाई होने वाली थी, उसे उसी शहर में मौत के घाट उतार दिया गया, जहां वह अपने परिवार का सहारा बनकर जी रही थी।
बार-बार फोन… फिर दुकान बुलाकर विवाद
मृतका के परिजनों के मुताबिक निकिता पहले आरोपी अर्जुन सुगंधी की फर्नीचर दुकान पर काम करती थी। पिछले कुछ समय से उसने वहां जाना बंद कर दिया था। इसके बावजूद आरोपी लगातार फोन कर उसे बुला रहा था। घटना वाले दिन निकिता विवाह की तैयारियों के सिलसिले में पंडित से मिलने गई थी। उसी दौरान आरोपी पक्ष की तरफ से लगातार कॉल आने लगे। परिवार का कहना है कि उसे दुकान बुलाया गया। जब वह वहां पहुंची तो पहले कहासुनी हुई, फिर विवाद बढ़ा।
स्कूटी की चाबी लेने लौटी और हमला हो गया
परिजनों के अनुसार विवाद के बाद निकिता वहां से निकलने लगी। तभी साथ गई छोटी बहन स्नेहा स्कूटी की चाबी लेने गई है। आरोपी अर्जुन सुगंधी ने अचानक चाकू निकाल लिया। कहा जा रहा है कि उसने निकिता पर ताबड़तोड़ हमला किया। एक-दो नहीं, बल्कि पांच वार किए गए। सीने और शरीर के ऊपरी हिस्से पर गहरे घाव लगे। आसपास मौजूद लोग जब तक कुछ समझते, निकिता लहूलुहान होकर गिर चुकी थी। घायल हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
घर में शादी की तैयारी थी, अब मातम पसरा है
निकिता की शादी पुणे में तय हुई थी। परिवार में खुशी का माहौल था। 19 दिन बाद सगाई की तारीख तय थी। घर में कपड़ों, कार्ड और तैयारियों की बातें चल रही थीं। लेकिन एक झटके में सब खत्म हो गया। मां और बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों ने बताया कि निकिता ही घर का सबसे बड़ा सहारा थी। पिता पहले ही नहीं रहे। मां लोगों के घरों में बर्तन मांजती है और निकिता नौकरी कर परिवार चला रही थी।
काम छोड़ दिया था, फिर भी पीछा नहीं छोड़ा
परिवार ने आरोप लगाया कि निकिता ने आरोपी की दुकान पर काम करना बंद कर दिया था क्योंकि वह वहां के माहौल से परेशान थी। इसके बावजूद आरोपी लगातार संपर्क करने की कोशिश करता रहा। कई बार फोन, कई बार दबाव… और आखिरकार यह जुनून हत्या में बदल गया। परिवार का कहना है कि यदि पहले शिकायतों को गंभीरता से लिया जाता तो आज निकिता जिंदा होती।
कलेक्ट्रेट में नारेबाजी, बुलडोजर की मांग
बुधवार दोपहर बड़ी संख्या में लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे। महिलाओं ने रोते हुए कहा कि आरोपी को सिर्फ जेल भेजना काफी नहीं। उसकी संपत्ति भी तोड़ी जाए। ज्ञापन में मांग की गई कि आरोपी का मकान और दुकान यदि अतिक्रमण में हैं तो तत्काल कार्रवाई हो। समाजजनों ने कहा कि ऐसे अपराधियों के खिलाफ सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, सार्वजनिक सख्ती जरूरी है ताकि दूसरों को भी संदेश मिले।
परिजन बोले—अब सिर्फ फांसी चाहिए
निकिता की बहन और रिश्तेदारों ने साफ कहा कि परिवार अब किसी समझौते के मूड में नहीं है। उनकी एक ही मांग है—हत्या के आरोपी को फांसी मिले। परिवार का कहना है कि जिसने एक लड़की के सपनों, उसके परिवार और उसकी जिंदगी को खत्म कर दिया, उसे कानून की सबसे कठोर सजा मिलनी चाहिए।
शहर में चर्चा—क्या होगी बुलडोजर कार्रवाई?
हत्याकांड के बाद शहर में यह भी चर्चा तेज है कि क्या प्रशासन आरोपी की संपत्ति पर भी कार्रवाई करेगा। लोगों की नजर अब पुलिस जांच के साथ प्रशासनिक फैसले पर भी टिकी है। निकिता की मौत ने बुरहानपुर को झकझोर दिया है। सवाल सिर्फ एक लड़की की हत्या का नहीं, बल्कि उस डर का है जो अब हर कामकाजी लड़की के परिवार के भीतर बैठ गया है।
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