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रायशुमारी से पहले ही कांग्रेस में ‘रार’ : शहर जिला अध्यक्ष को रखा दरकिनार, रिंकू टाक बोले—मनमर्जी से हुआ कार्यक्रम, वरिष्ठ नेतृत्व से करेंगे शिकायत

ग्रामीण अल्पसंख्यक अध्यक्ष की बैठक में पहुंचे चंद कार्यकर्ता, कांग्रेस का संगठन सृजन सवालों में

बुरहानपुर। संगठन को मजबूत करने निकली कांग्रेस बुरहानपुर में एक बार फिर अपनी ही गुटबाजी में उलझती नजर आई। कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के ग्रामीण जिला अध्यक्ष पद के लिए आयोजित रायशुमारी में न केवल गिनती के कार्यकर्ता पहुंचे, बल्कि शहर कांग्रेस जिला अध्यक्ष रिंकू टाक को कार्यक्रम की सूचना तक नहीं दिए जाने से पार्टी के भीतर की खींचतान खुलकर सामने आ गई। जिस बैठक से संगठन को नई दिशा देने का दावा किया जा रहा था, वही बैठक कांग्रेस की अंदरूनी कमजोरी और संवादहीनता की तस्वीर बन गई।

Sadaiv News
कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के ग्रामीण जिला अध्यक्ष पद की रायशुमारी में चंद कार्यकर्ता पहुंचे।

रविवार को कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के ग्रामीण जिला प्रभारी शाहिद मोदी एक दिवसीय दौरे पर बुरहानपुर पहुंचे। वे अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी के निर्देश पर ग्रामीण जिला अध्यक्ष पद के लिए कार्यकर्ताओं की राय जानने आए थे। हुसैनी मैरिज हॉल में दोपहर 2 बजे रायशुमारी रखी गई, लेकिन कार्यक्रम में अपेक्षित भीड़ नहीं जुट सकी। बैठक में ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष, पूर्व प्रदेश महासचिव और कुछ चुनिंदा पदाधिकारी ही नजर आए।

संगठन सृजन के बीच विघटन की तस्वीर
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बुरहानपुर में कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग की ग्रामीण जिला अध्यक्ष रायशुमारी बैठक

कांग्रेस की ओर से देशभर में संगठन सृजन अभियान चलाया जा रहा है। बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने, कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने और गुटबाजी खत्म करने के दावे किए जा रहे हैं। प्रशिक्षण शिविरों से लेकर वरिष्ठ नेताओं के दौरों तक पार्टी लगातार सक्रियता दिखाने की कोशिश कर रही है, लेकिन बुरहानपुर में तस्वीर इसके ठीक उलट दिखाई दे रही है। यहां संगठन सृजन से ज्यादा संगठन के भीतर खेमेबाजी और पदाधिकारियों के बीच दूरी चर्चा का विषय बनी हुई है। शहर अध्यक्ष को ही कार्यक्रम से दूर रखे जाने ने पार्टी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पहले भी कई मौकों पर कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी वरिष्ठ नेताओं के सामने उजागर हो चुकी है, लेकिन संगठनात्मक अनुशासन अब तक जमीन पर उतरता दिखाई नहीं दे रहा।

खाली कुर्सियों पर ‘शादी और खेती’ की सफाई

रायशुमारी में कम कार्यकर्ताओं की मौजूदगी पर ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष रविंद्र महाजन ने कहा कि इन दिनों शादियों का दौर चल रहा है और किसान खेतों के काम में व्यस्त हैं। इसी कारण कार्यकर्ताओं की संख्या कम रही। उन्होंने दावा किया कि संबंधित लोगों को कार्यक्रम की सूचना दी गई थी। हालांकि यह सफाई कांग्रेस के भीतर उठ रहे सवालों को शांत नहीं कर पाई। पार्टी के ही जिम्मेदार पदाधिकारी कार्यक्रम से अनजान रहे, तो सूचना आखिर किन लोगों तक पहुंचाई गई—यह सवाल अब संगठन के भीतर चर्चा का विषय बन गया है।

प्रभारी ने माना—अल्पसंख्यक संगठन कमजोर

देवास से आए ग्रामीण जिला प्रभारी शाहिद मोदी ने भी माना कि बुरहानपुर में कांग्रेस का अल्पसंख्यक संगठन कमजोर है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से रायशुमारी के बाद ग्रामीण जिला अध्यक्ष की नियुक्ति की जाएगी, ताकि संगठन को सक्रिय और मजबूत बनाया जा सके। लेकिन जिस बैठक में कार्यकर्ताओं की संख्या ही सीमित रही और शहर अध्यक्ष तक को विश्वास में नहीं लिया गया, उस रायशुमारी की व्यापकता और प्रभावशीलता पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।

रिंकू टाक का सीधा हमला—मुझे जानकारी तक नहीं दी

शहर कांग्रेस जिला अध्यक्ष रिंकू टाक ने पूरे आयोजन को लेकर खुलकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि उन्हें मीडिया के माध्यम से कार्यक्रम की जानकारी मिली। संगठन का कार्यक्रम होने के बावजूद शहर अध्यक्ष को सूचना नहीं देना गलत है। टाक ने कहा कि कार्यक्रम सभी जिम्मेदार पदाधिकारियों को विश्वास में लेकर व्यवस्थित तरीके से आयोजित होना चाहिए था, लेकिन यहां कुछ लोगों ने मनमर्जी से आयोजन कर लिया। कार्यकर्ताओं को क्यों नहीं बुलाया गया और कार्यक्रम को सीमित क्यों रखा गया, इसका जवाब संगठन को देना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्यप्रणाली से कांग्रेस की छवि प्रभावित होती है और कार्यकर्ताओं के बीच गलत संदेश जाता है। पूरे मामले की शिकायत पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व से की जाएगी।

रायशुमारी से ज्यादा गुटबाजी की चर्चा

अल्पसंख्यक विभाग के ग्रामीण अध्यक्ष पद की रायशुमारी का उद्देश्य संगठन को मजबूत करना था, लेकिन कार्यक्रम के बाद अध्यक्ष चयन से अधिक चर्चा कांग्रेस की गुटबाजी की हो रही है। शहर अध्यक्ष की अनुपस्थिति, चंद कार्यकर्ताओं की मौजूदगी और अलग-अलग नेताओं के विरोधाभासी दावों ने संगठन की एकजुटता पर सवालिया निशान लगा दिया है। अब कांग्रेस नेतृत्व के सामने चुनौती केवल नया ग्रामीण अल्पसंख्यक अध्यक्ष चुनने की नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर भरोसा और समन्वय कायम करने की भी है। जब जिम्मेदार पदाधिकारी ही एक-दूसरे को कार्यक्रमों की सूचना न दें, तो गांव और बूथ स्तर पर संगठन को एकजुट करने का दावा कितना प्रभावी होगा—यह बड़ा राजनीतिक सवाल बन गया है।

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