बुरहानपुर। गांव का ही रहने वाला था। करीब 11 साल से बैंक में काम कर रहा था। ग्रामीण भरोसा करते थे और इसी भरोसे में किसी ने खाते में जमा करने के लिए नकदी थमाई तो किसी ने लोन की किस्त भरने के लिए रुपए दिए। अब आरोप है कि रकम बैंक तक पहुंची ही नहीं। फोफनार स्थित मध्यप्रदेश ग्रामीण बैंक के दैनिक वेतनभोगी पियून स्वप्निल चौधरी पर 25 से ज्यादा ग्रामीणों ने करीब 50 लाख रुपए से अधिक की कथित हेराफेरी के आरोप लगाए हैं।
मामला तब खुला, जब ग्रामीण अपने खातों की जानकारी लेने बैंक पहुंचे। खाते खंगाले तो पता चला कि जिस रकम को जमा मानकर वे निश्चिंत बैठे थे, उसकी एंट्री ही नहीं थी। इसके बाद एक के बाद एक खाताधारक सामने आने लगे। गुरुवार को भी ग्रामीण शिकायत लेकर बैंक पहुंचे। अब तक करीब 25 से 26 लोगों की शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक प्रबंधन ने जांच शुरू कर दी है। रीजनल ऑफिस से भी टीम गुरुवार को फोफनार पहुंची और शिकायतों की जानकारी ली। फिलहाल बैंक प्रबंधन ने रकम के किसी अंतिम आंकड़े की पुष्टि नहीं की है। शाखा प्रबंधक का कहना है कि जांच के बाद ही वास्तविक राशि सामने आएगी।
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गांव का था, बैंक में काम करता था…इसलिए नहीं हुआ शक
ग्रामीणों के मुताबिक स्वप्निल फोफनार का ही निवासी है और लंबे समय से बैंक में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी के रूप में कार्यरत है। गांव का परिचित चेहरा और बैंक से जुड़ा होने के कारण लोगों को उस पर भरोसा था। इसी भरोसे में कई ग्रामीण बैंक जाने के बजाय उसे ही रुपए दे देते थे। आरोप है कि किसी ने खाते में जमा करने के लिए रकम दी, किसी ने ऋण की किस्त जमा कराने को पैसे सौंपे। कुछ ग्रामीणों ने खाते से रकम निकालकर लाकर देने के लिए भी उससे कहा था। अब आरोप है कि इनमें से कई लोगों की रकम उन्हें नहीं मिली या उनके खातों में जमा नहीं हुई।
खातों की जांच की तो उड़े होश, जमा समझी जा रही रकम मिली ही नहीं
मामले की परत तब खुलनी शुरू हुई जब कुछ ग्रामीण बैंक पहुंचे और अपने खातों का हिसाब देखा। जिस रकम को वे पहले ही जमा मान चुके थे, उसके खाते में नहीं पहुंचने की जानकारी सामने आई। इसके बाद दूसरे खाताधारकों ने भी अपने लेनदेन की पड़ताल शुरू की। धीरे-धीरे शिकायतकर्ताओं की संख्या बढ़ती गई। गुरुवार तक 25 से अधिक ग्रामीणों द्वारा शिकायत किए जाने की बात सामने आई। प्रारंभिक तौर पर ग्रामीणों की शिकायतों में करीब 50 लाख रुपए से अधिक की रकम का दावा किया जा रहा है। हालांकि यह आंकड़ा अभी जांच में प्रमाणित नहीं हुआ है। वास्तविक राशि शिकायतकर्ताओं के दावों और बैंक रिकॉर्ड के मिलान के बाद ही स्पष्ट होगी।
शिकायतें पहले क्यों नहीं आईं? भरोसा बना कथित हेराफेरी की ढाल
इस मामले का सबसे अहम पहलू ग्रामीणों और कर्मचारी के बीच बना व्यक्तिगत भरोसा है। ग्रामीणों के अनुसार स्वप्निल गांव का ही होने और बैंक में वर्षों से काम करने के कारण किसी ने तत्काल संदेह नहीं किया। इसी वजह से कथित गड़बड़ी लंबे समय तक सामने नहीं आई। जब खातों की वास्तविक स्थिति जांची गई, तब शिकायतों का सिलसिला शुरू हुआ। बैंक प्रबंधन का प्रारंभिक पक्ष भी यही है कि शिकायतें कर्मचारी के बाहरी लेनदेन को लेकर हैं। यानी ग्रामीणों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों के मुताबिक रकम सीधे संबंधित कर्मचारी को व्यक्तिगत भरोसे पर दी गई थी। बैंक रिकॉर्ड और शिकायतों की जांच से अब यह साफ होगा कि प्रत्येक मामले में वास्तव में लेनदेन किस तरह हुआ।
11 साल से बैंक में कार्यरत, अब बैंक नहीं आ रहा कर्मचारी
बताया जा रहा है कि स्वप्निल करीब 11 साल से फोफनार शाखा में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी के तौर पर काम कर रहा है। मामला सामने आने के बाद फिलहाल वह बैंक नहीं आ रहा है। यह भी सामने आया है कि बैंक प्रबंधन की उससे चर्चा हुई है और कथित तौर पर उसने ग्रामीणों की रकम लौटाने के लिए सात दिन का समय मांगा है। हालांकि कितनी रकम लौटाने की बात हुई और कितने शिकायतकर्ताओं का पैसा इससे जुड़ा है, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
रीजनल ऑफिस तक पहुंचा मामला, शिकायतों और खातों की पड़ताल
एक साथ इतनी शिकायतें सामने आने के बाद मामला शाखा स्तर तक सीमित नहीं रहा। बैंक के रीजनल ऑफिस तक इसकी सूचना पहुंची और गुरुवार को वहां से टीम भी जांच के लिए फोफनार पहुंची। अब जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा शिकायतकर्ताओं द्वारा बताई गई रकम और बैंक खातों के वास्तविक रिकॉर्ड का मिलान होगा। इससे पता चलेगा कि कितने ग्रामीणों ने कर्मचारी को रकम देने की शिकायत की है, कितनी राशि खातों में जमा नहीं हुई और कुल कथित लेनदेन कितना है। बैंक स्तर पर मामले की जांच के लिए समिति गठित किए जाने की बात भी सामने आई है।
50 लाख या इससे ज्यादा? जांच के बाद ही खुलेगा पूरा हिसाब
ग्रामीणों की शिकायतों के आधार पर फिलहाल कथित हेराफेरी का आंकड़ा करीब 50 लाख रुपए से अधिक बताया जा रहा है। कुछ स्तर पर रकम इससे काफी ज्यादा होने की चर्चा भी है, लेकिन इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है। इसलिए सबसे बड़ा सवाल रकम के वास्तविक आकार को लेकर है। शिकायतकर्ताओं की संख्या बढ़ती है तो आंकड़ा बदल भी सकता है। फिलहाल बैंक ने किसी निश्चित रकम की पुष्टि नहीं की है।
बैंक बोला- बाहरी लेनदेन की शिकायत, सही आंकड़ा अभी सामने नहीं आया
मध्यप्रदेश ग्रामीण बैंक फोफनार के शाखा प्रबंधक अमित कुमार भारतीय ने कहा कि दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी के बाहरी लेनदेन और उसकी रिकवरी को लेकर शिकायतें मिली हैं। मामले की जांच की जा रही है। अभी सही आंकड़ा सामने नहीं आया है। जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
अब जांच के घेरे में 5 अहम सवाल
पूरे मामले में जांच के बाद सबसे पहले यह साफ होना है कि स्वप्निल ने वास्तव में कितने लोगों से रकम ली? कुल राशि कितनी थी? रकम किस उद्देश्य से दी गई? क्या किसी लेनदेन से जुड़े दस्तावेज या अन्य प्रमाण शिकायतकर्ताओं के पास हैं? और कितनी रकम बैंक खातों में नहीं पहुंची? इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामला कितनी बड़ी कथित वित्तीय हेराफेरी का है। फिलहाल ग्रामीणों के आरोप गंभीर हैं, शिकायतें बैंक प्रबंधन तक पहुंच चुकी हैं और रीजनल स्तर पर जांच शुरू हो गई है। अब बैंक रिकॉर्ड और शिकायतकर्ताओं के दावों का मिलान इस पूरे मामले की असली तस्वीर सामने लाएगा।



