बुरहानपुर। बुरहानपुर नगर निगम में आठ एल्डरमैनों की नियुक्ति ने भाजपा की अंदरूनी राजनीति का नया पावर चार्ट सामने ला दिया है। प्रदेश सरकार ने सोमवार को आठ मनोनीत पार्षदों के नामों पर मुहर लगाई, लेकिन सूची जारी होते ही सबसे ज्यादा चर्चा नामों से अधिक उनके राजनीतिक खेमों की शुरू हो गई। नियुक्तियों में बुरहानपुर विधायक एवं पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस का प्रभाव साफ दिखाई दिया। सूची में शामिल अधिकांश चेहरे उनके समर्थक माने जा रहे हैं।
नगर निगम में पहले से विधायक समर्थक निर्वाचित पार्षदों की मजबूत मौजूदगी है। अब आठ एल्डरमैनों की नियुक्ति के बाद निगम की राजनीति में विधायक खेमे की ताकत और बढ़ गई है। राजनीतिक गलियारों में इसे सिर्फ कार्यकर्ताओं का मनोनयन नहीं, बल्कि नगर निगम के भीतर शक्ति संतुलन को पूरी तरह विधायक के पक्ष में करने वाली राजनीतिक चाल के रूप में देखा जा रहा है।
इन आठ चेहरों को मिला नगर निगम में प्रवेश
प्रदेश सरकार ने हीरालाल बड़गुजर, बलराज नावानी, उमा कपूर, शिवकुमार पासी, रूद्रेश्वर एंडोले, चिंतामन महाजन, विपुल कानगो और विजय शेवाड़े को एल्डरमैन नियुक्त किया है। आदेश जारी होने के बाद नवनियुक्त एल्डरमैनों के समर्थकों में उत्साह नजर आया। सोमवार को दिनभर भाजपा नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच बधाइयों का दौर चलता रहा। सोशल मीडिया पर भी समर्थकों ने नियुक्तियों को संगठन के प्रति समर्पण और सक्रियता का पुरस्कार बताया।
संगठन में पद भी, निगम में कुर्सी भी
इस बार की सूची में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला पहलू भाजपा संगठन में पहले से महत्वपूर्ण पद संभाल रहे दो नेताओं का मनोनयन है। भाजपा जिला महामंत्री चिंतामन महाजन और जिला उपाध्यक्ष विपुल कानगो को भी एल्डरमैन बनाया गया है। आमतौर पर एल्डरमैन के पद पर ऐसे पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं को मौका दिया जाता है, जो वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे हों, लेकिन संगठन या सत्ता में उन्हें कोई बड़ा दायित्व न मिला हो। बुरहानपुर में इस बार यह परंपरा बदलती दिखाई दी। संगठन में जिम्मेदारी संभाल रहे नेताओं को ही नगर निगम में भी राजनीतिक भागीदारी दे दी गई। इसके बाद भाजपा के भीतर यह चर्चा भी तेज हो गई है कि जब संगठन के पदाधिकारियों को ही निगम में अवसर दिया गया, तो वर्षों से बिना पद के काम कर रहे वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की दावेदारी पर विचार क्यों नहीं हुआ।
सूची में दिखी विधायक की मजबूत पकड़
आठ एल्डरमैनों की सूची को विधायक अर्चना चिटनिस की सरकार और संगठन में मजबूत पकड़ का सीधा प्रमाण माना जा रहा है। स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार, सूची के अधिकांश नाम विधायक खेमे से जुड़े हैं। यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब नगर निगम की राजनीति में विकास कार्यों, बजट, जलापूर्ति, सड़क, सफाई और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर लगातार खींचतान चल रही है। अब मनोनीत पार्षदों के रूप में विधायक समर्थक चेहरों की संख्या बढ़ने से निगम की बैठकों और राजनीतिक बहसों में विधायक खेमे का प्रभाव और अधिक दिखाई दे सकता है। नगर निगम में पहले से कई निर्वाचित पार्षद विधायक समर्थक माने जाते हैं। आठ नए मनोनीत पार्षद जुड़ने के बाद निगम के भीतर विधायक की राजनीतिक पकड़ और मजबूत हो गई है।
सांसद खेमे को सिर्फ एक नाम से संतोष
एल्डरमैन नियुक्ति में सांसद ज्ञानेश्वर पाटील के समर्थक माने जाने वाले एक चेहरे को जगह मिलने की चर्चा है। बाकी सूची में विधायक समर्थकों का ही वर्चस्व बताया जा रहा है। इससे यह संकेत भी निकाला जा रहा है कि नगर निगम से जुड़े राजनीतिक निर्णयों में विधायक अर्चना चिटनिस की सिफारिश और सहमति सबसे ज्यादा प्रभावी रही। सांसद खेमे को सीमित प्रतिनिधित्व मिलने से भाजपा के स्थानीय सत्ता समीकरणों में विधायक का पलड़ा भारी नजर आ रहा है।
अन्य दिग्गजों के समर्थक सूची से बाहर
भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और उनके समर्थक लंबे समय से एल्डरमैन बनने की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन अंतिम सूची में उन्हें जगह नहीं मिली। इससे पार्टी के भीतर असंतोष भले ही खुलकर सामने नहीं आया हो, लेकिन अंदरखाने चर्चाएं जरूर तेज हो गई हैं।राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहा है कि क्या नियुक्तियों में कार्यकर्ताओं की वरिष्ठता और सक्रियता से ज्यादा खेमे और राजनीतिक निष्ठा को प्राथमिकता दी गई। सूची में किसी दूसरे प्रभावशाली स्थानीय नेता के समर्थकों को पर्याप्त स्थान नहीं मिलने से विधायक खेमे के एकाधिकार की चर्चा और मजबूत हुई है।
नगर निगम में बदलेगा सत्ता का गणित
एल्डरमैन मनोनीत पार्षद के रूप में नगर निगम की बैठकों में शामिल होते हैं। वे शहर के विकास, नागरिक सुविधाओं और निगम की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रख सकते हैं। मतदान सहित उनके अधिकार संबंधित अधिनियम और नियमों के अनुसार तय होते हैं, लेकिन राजनीतिक रूप से उनकी उपस्थिति महत्वपूर्ण मानी जाती है। आठ मनोनीत पार्षदों के आने से नगर निगम में सत्ता पक्ष की आवाज और मजबूत होगी। खासकर ऐसे मुद्दों पर, जहां विपक्षी पार्षद निगम प्रशासन, महापौर या विधायक प्रतिनिधियों को घेरते रहे हैं, वहां अब विधायक समर्थक एल्डरमैन सत्ता पक्ष के लिए राजनीतिक ढाल की भूमिका निभा सकते हैं।
कार्यकर्ताओं का सम्मान या खेमेबंदी का विस्तार?
भाजपा नियुक्तियों को समर्पित कार्यकर्ताओं का सम्मान बता सकती है, लेकिन सूची ने पार्टी के भीतर खेमेबंदी की बहस को फिर हवा दे दी है। संगठन के पदाधिकारियों को ही एल्डरमैन बनाए जाने और एक ही खेमे के अधिकतर नामों को अवसर मिलने से यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या नियुक्तियों में व्यापक संगठनात्मक संतुलन साधा गया या फिर राजनीतिक प्रभाव ही निर्णायक रहा।
फिलहाल नियुक्तियों से इतना जरूर साफ है कि बुरहानपुर की भाजपा राजनीति में विधायक अर्चना चिटनिस का प्रभाव केवल विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। नगर निगम के सत्ता समीकरणों में भी उनकी पकड़ मजबूत हुई है। आठ एल्डरमैनों की नियुक्ति के बाद शहर की राजनीति में एक बार फिर संदेश गया है—निगम में चेहरों का मनोनयन सरकार ने किया, लेकिन सूची पर छाप विधायक खेमे की दिखाई दी।