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32,002 बच्चों ने एक साथ ऐसा क्या लिखा कि विश्व रिकॉर्ड की ओर बढ़ गया बुरहानपुर?

113 विद्यालयों के विद्यार्थियों ने अपने हाथों से लिखे नशामुक्ति संदेश, हर हस्ताक्षर बना एक संकल्प; वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन को भेजे गए प्रमाण

बुरहानपुर। किसी ने लिखा—“नशे से दूरी है जरूरी”, किसी ने परिवार बचाने का संदेश दिया तो किसी ने स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य का संकल्प। मंगलवार को बुरहानपुर में जब 113 विद्यालयों के 32,002 विद्यार्थी एक ही समय पर कागज और कलम लेकर बैठे तो यह केवल जागरूकता कार्यक्रम नहीं रहा। बच्चों के हाथों से लिखे हजारों संदेश नशे के खिलाफ जिले की सामूहिक आवाज बन गए।

Sadaiv News
बुरहानपुर के विद्यार्थियों का नशामुक्ति विश्व रिकॉर्ड प्रयास

मध्यप्रदेश शासन और पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर चलाए जा रहे ‘नशे से दूरी है जरूरी’ अभियान के तहत बुरहानपुर पुलिस ने जिलेभर में यह वृहद आयोजन किया। दावा विश्व रिकॉर्ड का नहीं, बल्कि प्रयास को विश्व रिकॉर्ड के रूप में मान्यता दिलाने का है। विद्यार्थियों की भागीदारी से जुड़े दस्तावेज, फोटो, वीडियो, मीडिया कवरेज और अन्य प्रमाण World Book of Records, London को भेजे गए हैं। सत्यापन के बाद संस्था मान्यता पर निर्णय करेगी।

मुख्य आयोजन में एक साथ उठी 32 हजार आवाजें

मुख्य कार्यक्रम नवोदय विद्यालय, बुरहानपुर में आयोजित हुआ। यहां विद्यार्थियों ने अपने हाथों से नशामुक्ति संदेश लिखे, उन पर हस्ताक्षर किए और नशीले पदार्थों से दूर रहने की शपथ ली। बच्चों ने यह संकल्प भी दोहराया कि वे अपने मित्रों, परिवार और आसपास के लोगों को नशे के नुकसान के प्रति जागरूक करेंगे। कार्यक्रम में कलेक्टर हर्ष सिंह, पुलिस अधीक्षक आशुतोष बागरी और विधायक अर्चना चिटनिस मौजूद रहीं। अतिथियों ने विद्यार्थियों के अनुशासन, उत्साह और सामाजिक जिम्मेदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि बच्चों की यह भागीदारी आने वाले समय में नशामुक्त और सुरक्षित समाज की मजबूत नींव बन सकती है।

रिकॉर्ड से ज्यादा अहम था बच्चों का संकल्प

इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी संख्या नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे की व्यक्तिगत भागीदारी रही। जब विद्यार्थी स्वयं अपने हाथों से नशे के विरुद्ध संदेश लिखता है, तो वह केवल एक पंक्ति नहीं लिखता, बल्कि अपने जीवन से जुड़ा निर्णय दर्ज करता है। पुलिस प्रशासन का मानना है कि हस्तलिखित संदेश बच्चों के मन पर अधिक गहरा प्रभाव छोड़ते हैं। अपने हाथों से लिखा गया हर शब्द उन्हें आत्मनियंत्रण, सही संगति और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ता है। यही कारण है कि अभियान को भाषण या पोस्टर तक सीमित रखने के बजाय बच्चों को स्वयं संदेश लिखने के लिए प्रेरित किया गया।

एक बच्चा, एक संदेश और कई परिवारों तक असर

विद्यार्थियों को अभियान का केंद्र बनाने के पीछे बड़ी सोच है। एक बच्चा विद्यालय में सीखी बात को अपने घर तक ले जाता है। वह माता-पिता, भाई-बहन और मित्रों से संवाद करता है। ऐसे में 32,002 विद्यार्थियों द्वारा लिखा गया संदेश हजारों परिवारों तक पहुंचने की क्षमता रखता है। नशामुक्ति की लड़ाई केवल पुलिस कार्रवाई से नहीं जीती जा सकती। इसके लिए परिवार, विद्यालय, समाज और प्रशासन की संयुक्त भागीदारी जरूरी है। बुरहानपुर में हुआ यह आयोजन इसी साझी जिम्मेदारी का उदाहरण बनकर सामने आया।

क्या मिलेगा विश्व रिकॉर्ड का दर्जा?

अब सभी की नजर World Book of Records, London की सत्यापन प्रक्रिया पर है। संस्था को विद्यार्थियों की संख्या, आयोजन के समय, हस्तलिखित संदेशों, फोटो-वीडियो और अन्य प्रमाणों से जुड़ी जानकारी भेजी गई है। जांच और सत्यापन पूरा होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बुरहानपुर के इस प्रयास को विश्व रिकॉर्ड के रूप में मान्यता मिलती है या नहीं। हालांकि, औपचारिक मान्यता से पहले ही इस अभियान ने जिले में व्यापक जनचर्चा पैदा कर दी है। 113 विद्यालयों की एक साथ भागीदारी ने यह साबित किया कि किसी सामाजिक उद्देश्य के लिए बच्चों को जोड़ा जाए तो उसका संदेश दूर तक पहुंच सकता है।

नशे से बिखरते परिवारों के बीच उम्मीद का संदेश

नशीले पदार्थ केवल शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाते, बल्कि पूरे परिवार की आर्थिक और मानसिक स्थिति को प्रभावित करते हैं। नशे के कारण घरेलू विवाद, अपराध, सड़क हादसे, पढ़ाई से दूरी और युवाओं का भविष्य प्रभावित होने जैसी समस्याएं सामने आती हैं। ऐसे दौर में 32,002 विद्यार्थियों का नशे के खिलाफ संकल्प भावनात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण है। बच्चों ने अपने संदेशों के माध्यम से यह बताया कि वे ऐसा भविष्य चाहते हैं, जहां युवा नशे में नहीं, शिक्षा, खेल, रोजगार और समाज निर्माण में अपनी ऊर्जा लगाएं।

पुलिस ने कहा—सूचना दें, चुप न रहें

बुरहानपुर पुलिस ने जिलेवासियों से अपील की कि वे नशे के विरुद्ध इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं। बच्चों और युवाओं के व्यवहार में बदलाव दिखाई देने पर उनसे खुलकर संवाद करें। अवैध मादक पदार्थों की बिक्री या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचित करें। पुलिस का कहना है कि अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है। मंगलवार का आयोजन इसी सोच का परिणाम है, जिसमें डर या दंड के बजाय बच्चों को सकारात्मक संदेश और जिम्मेदारी से जोड़ा गया।

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