बुरहानपुर। जिले में अवैध हथियारों के खिलाफ पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है, लेकिन आंकड़े एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहे हैं। दो साल में 31 केस, 63 गिरफ्तारियां, 172 देसी पिस्टल और 45 जिंदा कारतूस की जब्ती के बावजूद खकनार क्षेत्र में अवैध हथियारों का सिलसिला पूरी तरह नहीं थमा है। ताजा मामला भी चौंकाने वाला है। इस बार अवैध हथियार रखने के आरोप में पकड़ा गया युवक स्थानीय नहीं, बल्कि करीब सैकड़ों किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के शामली जिले का रहने वाला है। पुलिस के मुताबिक वह अवैध हथियार खरीदने यहां आया था। खकनार पुलिस ने उसे ग्राम जामनिया से गिरफ्तार कर उसके पास से हाथ से बनी 3 देसी पिस्टल और 2 खाली मैग्जीन बरामद की हैं।
इस गिरफ्तारी ने पुलिस के सामने अब एक और अहम सवाल खड़ा कर दिया है—आरोपी को बुरहानपुर में हथियार किसने उपलब्ध कराए? वह किसके संपर्क में था और इन पिस्टलों को शामली ले जाकर किसे देने वाला था? पुलिस अब इसी कड़ी को तलाश रही है।
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जामनिया में काला बैग लेकर खड़ा था, मुखबिर की सूचना पर घेराबंदी
खकनार थाना प्रभारी अभिषेक जाधव के मुताबिक पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि ग्राम जामनिया में एक संदिग्ध व्यक्ति काला बैग लेकर खड़ा है। उसके पास अवैध हथियार होने की सूचना थी। पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और संदिग्ध को पकड़ लिया। पूछताछ में उसकी पहचान अंसार पिता अलमदीन चौधरी (22), निवासी 121 आलमखुर्द, थाना कैराना, जिला शामली, उत्तर प्रदेश के रूप में हुई। पुलिस ने उसके पास मौजूद बैग की तलाशी ली तो उसमें 3 हाथ से बनी अवैध देसी पिस्टल और 2 खाली मैग्जीन मिलीं। आरोपी से हथियार रखने का लाइसेंस या वैध दस्तावेज मांगे गए, लेकिन वह प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर हथियार जब्त कर लिए।
70 हजार की पिस्टल, 4300 की मैग्जीन; कुल 74,300 रुपए की जब्ती
पुलिस के अनुसार तीनों अवैध देसी पिस्टलों की अनुमानित कीमत 70 हजार रुपए है, जबकि दो खाली मैग्जीन की कीमत करीब 4,300 रुपए आंकी गई है। इस तरह कुल 74,300 रुपए की अवैध सामग्री जब्त की गई। अब पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। सबसे महत्वपूर्ण जांच इस बात को लेकर है कि आरोपी ने हथियार किससे खरीदे और उसका स्थानीय संपर्क कौन था? यह भी पता लगाया जा रहा है कि वह पहली बार यहां हथियार लेने आया था या इससे पहले भी इस क्षेत्र में आ चुका है। हथियारों को कहां ले जाना था और उनके संभावित इस्तेमाल या आगे की सप्लाई से जुड़े तथ्य भी जांच का विषय हैं।
सबसे बड़ा सवाल: इतनी कार्रवाई के बाद भी खरीदार यहां तक कैसे पहुंच रहे?
ताजा गिरफ्तारी को केवल तीन पिस्टल की बरामदगी तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। खकनार पुलिस के पिछले दो साल के आंकड़े अवैध हथियारों की समस्या का बड़ा दायरा बताते हैं। वर्ष 2024 से अब तक खकनार पुलिस ने 31 केस दर्ज किए, 63 आरोपियों को गिरफ्तार किया, 172 देसी पिस्टल जब्त कीं, 45 जिंदा कारतूस बरामद किए और अवैध हथियार निर्माण से जुड़े ठिकानों पर भी कार्रवाई की। इसके बावजूद यदि उत्तर प्रदेश जैसे दूसरे राज्य से कोई व्यक्ति कथित तौर पर हथियार खरीदने बुरहानपुर तक पहुंच रहा है तो यह सवाल स्वाभाविक है कि सप्लाई चेन की जड़ आखिर कहां है और बार-बार कार्रवाई के बावजूद वह पूरी तरह क्यों नहीं टूट रही?
पिस्टल पकड़ना एक सिरा, सप्लायर तक पहुंचना असली चुनौती
पुलिस के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण कड़ी गिरफ्तार युवक से मिलने वाली जानकारी हो सकती है। तीन पिस्टल के साथ आरोपी की गिरफ्तारी एक सिरा है, लेकिन हथियार उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति तक पहुंचना जांच की बड़ी चुनौती होगी। यदि आरोपी उत्तर प्रदेश से हथियार लेने आया था तो स्थानीय स्तर पर किसी संपर्क के बिना खरीद की प्रक्रिया कैसे हुई? संपर्क किस माध्यम से हुआ? हथियार कहां और कब सौंपे गए? क्या इनके पीछे कोई संगठित सप्लाई चैन है या अलग-अलग स्तर पर काम करने वाले लोग हैं? इन सवालों के जवाब पुलिस जांच से सामने आने बाकी हैं।
पाचौरी में कार्रवाई होती रही, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ अवैध कारोबार
खकनार क्षेत्र का पाचौरी अवैध हथियार निर्माण के मामलों को लेकर लंबे समय से पुलिस की निगरानी में रहा है। यहां समय-समय पर पुलिस ने दबिश देकर अवैध हथियार और उनके निर्माण से जुड़ी सामग्री जब्त की है। बाहरी खरीदारों और स्थानीय स्तर पर अवैध निर्माण के मामलों में भी कार्रवाई होती रही है। लेकिन दो साल में 172 पिस्टल की जब्ती अपने आप में बताती है कि चुनौती कितनी बड़ी है। पुलिस एक खेप पकड़ती है, आरोपी गिरफ्तार होते हैं, हथियार जब्त होते हैं, लेकिन कुछ समय बाद फिर नया मामला सामने आ जाता है। ताजा मामले में शामली के युवक की गिरफ्तारी ने एक बार फिर स्थानीय निर्माण से लेकर अंतरराज्यीय खरीदार तक पहुंचने वाली संभावित कड़ी को जांच के केंद्र में ला दिया है।
सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, नेटवर्क की जड़ तक पहुंचना जरूरी
अवैध हथियारों के मामलों में हर गिरफ्तारी के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही होता है कि हथियार कहां बना, किसने बेचा, किसने खरीददार से संपर्क कराया और आखिर उसे कहां पहुंचाया जाना था। अगर इन कड़ियों को जोड़कर पूरे नेटवर्क तक नहीं पहुंचा गया तो एक आरोपी की गिरफ्तारी और कुछ हथियारों की जब्ती के बाद भी नई खेप सामने आने की आशंका बनी रहती है। खकनार पुलिस की लगातार कार्रवाई और बड़ी संख्या में हथियारों की बरामदगी यह जरूर बताती है कि पुलिस का दबाव बना हुआ है, लेकिन लगातार सामने आते मामले यह भी दिखाते हैं कि अवैध हथियारों की सप्लाई चेन को पूरी तरह तोड़ना अभी बाकी है।
रोजगार शिविर से जनसंवाद तक, फिर भी चुनौती कायम
इधर, दूसरा पहलू पुनर्वास का है। सिकलीगर समाज के लोगों को अवैध हथियार निर्माण से दूर कर समाज की मुख्यधारा और वैकल्पिक रोजगार से जोड़ने के लिए पुलिस-प्रशासन की ओर से लंबे समय से प्रयास किए जाते रहे हैं। पाचौरी में समय-समय पर जनसंवाद और रोजगार शिविर आयोजित किए गए। कई लोगों ने अवैध गतिविधियों से दूरी बनाकर वैकल्पिक रोजगार भी अपनाया है। इसके बावजूद हथियार निर्माण और तस्करी के नए मामले सामने आना बताता है कि यह प्रयास अभी अपेक्षित स्तर तक समस्या समाप्त नहीं कर पाए हैं। ऐसे में केवल पुलिस कार्रवाई ही नहीं, बल्कि अवैध कारोबार से जुड़े लोगों की पहचान, प्रभावी पुनर्वास, स्थायी रोजगार और हथियार खरीदने आने वाले बाहरी नेटवर्क की कड़ियों पर एक साथ काम करना बड़ी चुनौती है।
अब पुलिस के सामने ये सवाल
- पहला: शामली का आरोपी बुरहानपुर में किसके संपर्क में था?
- दूसरा: तीनों पिस्टल किसने बनाईं और किसने बेचीं?
- तीसरा: आरोपी इन्हें शामली में खुद रखने वाला था या आगे सप्लाई करने वाला था?
- चौथा: क्या इससे पहले भी उसके या उसके संपर्कों के जरिए यहां से हथियार खरीदे गए?
- पांचवां: 31 केस और 63 गिरफ्तारियों के बाद भी बाहरी खरीदारों तक स्थानीय सप्लायरों की पहुंच कैसे बनी हुई है?
- इन सवालों के जवाब आरोपी से पूछताछ और आगे की पुलिस जांच में सामने आ सकते हैं।
इस टीम ने पकड़ा आरोपी
कार्रवाई में सहायक उपनिरीक्षक तारक अली, प्रधान आरक्षक सतीश सूर्यवंशी, संदीप सोलंकी, आरक्षक राकेश डावर, खुमसिंग नार्वे, रूपेश कास्डे, प्रदीप गवाले, जितेंद्र चौहान, विजय देवल्ये और गोविंदा मुजाल्दे सहित पुलिस टीम शामिल रही।



