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स्वास्थ्य विभाग की जांच में खुलीं खामियां: लाइसेंस निरस्त, इलाज पर रोक… फिर कैसे चल रहा ग्लोबल हॉस्पिटल?

- निरीक्षण में 24 घंटे विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं मिले, बिना पैथोलॉजिस्ट पैथोलॉजी संचालन का उल्लेख; ओटी-आईसीयू, बायो मेडिकल वेस्ट और मानव संसाधन में भी मिली कमियां

बुरहानपुर। जिले में निजी अस्पतालों की जांच में लगातार खामियां सामने आ रही हैं। अब स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई अंडा बाजार क्षेत्र स्थित ग्लोबल हॉस्पिटल तक पहुंची है। विभागीय निरीक्षण में मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल के लिए जरूरी विशेषज्ञ चिकित्सकों से लेकर पैथोलॉजी, ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू, बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण और मानव संसाधन तक की व्यवस्थाएं निर्धारित मापदंडों के अनुरूप नहीं मिलने का उल्लेख किया गया है। इसके बाद अस्पताल का पंजीयन और लाइसेंस एक माह के लिए अस्थायी रूप से निरस्त कर इस अवधि में मरीजों के उपचार और भर्ती पर रोक लगा दी गई।

Sadaiv News
स्वास्थ्य विभाग के निरीक्षण में कमियां मिलने के बाद ग्लोबल हॉस्पिटल का लाइसेंस एक माह के लिए निरस्त।

इसके बावजूद अस्पताल का संचालन होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में सवाल यह है कि जब विभाग ने एक माह के लिए उपचार और भर्ती पर स्पष्ट रोक लगाई है तो वर्तमान में अस्पताल किस स्थिति में संचालित हो रहा है? क्या कमियां दूर होने के बाद विभाग ने संचालन की अनुमति दे दी है या आदेश अब भी प्रभावी है? इस संबंध में अस्पताल संचालक का कहना है कि नोटिस मिलने के बाद सभी दस्तावेज दुरुस्त कर स्वास्थ्य विभाग को सौंप दिए गए हैं।

18 अगस्त को जारी हुआ नोटिस, निरीक्षण में सामने आईं कई कमियां

सीएमएचओ डॉ. आर.के. वर्मा की ओर से 18 अगस्त को ग्लोबल हॉस्पिटल को नोटिस जारी किया गया था। विभागीय नोटिस के अनुसार हॉस्पिटल ने मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल संचालन के लिए ग्लोबल हॉस्पिटल बुरहानपुर के नाम से पंजीयन और लाइसेंस प्राप्त किया था। पंजीयन के बाद किए गए निरीक्षण में अस्पताल की व्यवस्थाओं में कई कमियां पाई गईं। विभाग के अनुसार मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल संचालन के लिए आवश्यक ऐसे विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं पाए गए, जो अस्पताल में 24 घंटे सेवाएं उपलब्ध करा सकें। यह कमी इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल के रूप में संचालन के लिए आवश्यक विशेषज्ञ सेवाएं और निर्धारित मानव संसाधन बुनियादी शर्तों में शामिल हैं।

पैथोलॉजिस्ट नहीं, फिर भी संचालित मिली पैथोलॉजी

निरीक्षण में एक और गंभीर कमी पैथोलॉजी को लेकर दर्ज की गई। विभागीय नोटिस में कहा गया है कि हॉस्पिटल की पैथोलॉजी बिना पैथोलॉजिस्ट के संचालित पाई गई। यही नहीं, हॉस्पिटल का ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू वार्ड भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। स्वास्थ्य विभाग ने मानव संसाधन की उपलब्धता को भी नियमों के अनुरूप नहीं माना।

नगर निगम की अनुमति से लेकर बायो मेडिकल वेस्ट तक सवाल

विभागीय निरीक्षण में हॉस्पिटल की व्यवस्थाओं से जुड़े अन्य बिंदुओं पर भी आपत्ति दर्ज की गई। नोटिस के मुताबिक नियमानुसार आवश्यक नगर निगम संबंधी अनुमतियां नहीं पाई गईं। अस्पताल से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की व्यवस्था भी नियमानुसार नहीं मिलने का उल्लेख किया गया है। इस तरह विभाग की जांच में मामला केवल एक-दो दस्तावेज या सुविधाओं की कमी तक सीमित नहीं रहा। विशेषज्ञ चिकित्सक, पैथोलॉजी, आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर, मानव संसाधन, अनुमति और बायो मेडिकल वेस्ट जैसे कई स्तरों पर कमियां दर्ज की गईं।

साफ आदेश- एक माह तक न इलाज करेंगे, न मरीज भर्ती करेंगे

इन कमियों के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने हॉस्पिटल का पंजीयन और लाइसेंस अस्थायी रूप से एक माह के लिए निरस्त करने का आदेश जारी किया। अस्पताल प्रबंधन को इस अवधि में सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त कर विभाग को जानकारी देने को कहा गया है। आदेश में यह भी चेतावनी दी गई है कि एक माह में व्यवस्थाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं की गईं तो हॉस्पिटल का पंजीयन और लाइसेंस स्थायी रूप से निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विभागीय आदेश में एक माह की अवधि के दौरान हॉस्पिटल में किसी मरीज का उपचार नहीं करने और किसी मरीज को भर्ती नहीं करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।

आदेश के बाद भी संचालन की बात, अब विभाग की निगरानी पर सवाल

स्वास्थ्य विभाग के आदेश के बावजूद हॉस्पिटल का संचालन होने की बात सामने आने से विभागीय आदेश के पालन और निगरानी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि अस्पताल ने कमियां दूर कर दी हैं तो यह स्पष्ट होना जरूरी है कि विभाग ने उनका दोबारा सत्यापन किया या नहीं और संचालन के लिए अनुमति दी गई है या नहीं। वहीं यदि लाइसेंस निरस्तीकरण का आदेश अब भी प्रभावी है तो उपचार या मरीज भर्ती किए जाने की स्थिति में विभाग क्या कार्रवाई करेगा, यह भी महत्वपूर्ण है।

जिले में लगातार निजी अस्पतालों पर कार्रवाई

स्वास्थ्य विभाग पिछले कुछ समय से जिले के निजी अस्पतालों की व्यवस्थाओं की जांच कर रहा है। इससे पहले भी बुरहानपुर में दो और नेपानगर में एक निजी हॉस्पिटल पर कार्रवाई की जा चुकी है। अब ग्लोबल अस्पताल पर कार्रवाई के बाद निजी अस्पतालों में लाइसेंस की शर्तों, उपलब्ध चिकित्सकीय सुविधाओं और निर्धारित मानकों के पालन का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि निजी अस्पतालों को निर्धारित मापदंड और आवश्यक अनुमतियां पूरी करने के बाद ही संचालन करना चाहिए।

सारे दस्तावेज ओके कर विभाग को सौंपे

स्वास्थ्य विभाग की ओर से नोटिस मिला था। सारे दस्तावेज ओके कर स्वास्थ्य विभाग को सौंप दिए गए हैं। – डॉ. आफाक उद्दीन, संचालक ग्लोबल हॉस्पिटल बुरहानपुर

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