बुरहानपुर। सरकारी स्कूलों में बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुविधाएं देने के दावों के बीच जैनाबाद के शासकीय हिंदी माध्यमिक स्कूल की पूर्व प्राथमिक कक्षाएं शिक्षक-सहायक की राह देख रही हैं। नर्सरी, केजी-1 और केजी-2 में वर्तमान सत्र में 35 बच्चे नामांकित हैं, लेकिन इनके लिए अलग शिक्षक या सहायक की व्यवस्था नहीं है। स्कूल प्रबंधन का दावा है कि 13 अप्रैल को जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र देने के बाद भी व्यवस्था नहीं हुई। अब प्रभारी प्रधान पाठक ने कलेक्टर से शिकायत कर तत्काल शिक्षक-सहायक उपलब्ध कराने की मांग की है।
मामला महज शिक्षक की कमी तक सीमित नहीं है। इन कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों की उम्र महज 3 से 5 वर्ष है। ऐसे में पढ़ाई के साथ उनकी देखरेख और सुरक्षा भी जरूरी है। प्रभारी प्रधान पाठक ने कलेक्टर को दिए पत्र में इसी मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है।
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पिछले साल 38 बच्चे थे, इस बार 35; फिर भी नहीं मिला अलग शिक्षक
शिकायत के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2025-26 में स्कूल की नर्सरी, केजी-1 और केजी-2 में कुल 38 बच्चे नामांकित थे। नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 में भी 35 विद्यार्थी इन कक्षाओं में दर्ज हैं। यानी लगातार दूसरे सत्र में पूर्व प्राथमिक कक्षाएं संचालित हो रही हैं, लेकिन इनके लिए अब तक पृथक शिक्षक और सहायक की व्यवस्था नहीं की गई। स्कूल की ओर से 13 अप्रैल 2026 को जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया गया था। इसमें पूर्व प्राथमिक कक्षाओं के लिए आवश्यक शिक्षक और सहायक उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। प्रभारी प्रधान पाठक का कहना है कि इसके बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। आखिरकार मामला अब कलेक्टर तक पहुंचाया गया है।
3 से 5 साल के बच्चों की कक्षा, बिना निर्धारित शिक्षक कैसे हो संचालन?
शिकायत में स्पष्ट किया गया है कि नर्सरी और केजी कक्षाओं में 3 से 5 वर्ष आयु वर्ग के बच्चे अध्ययनरत हैं। इतने छोटे बच्चों के लिए केवल पाठ्य गतिविधियां ही नहीं, लगातार निगरानी और देखरेख भी आवश्यक होती है। निर्धारित शिक्षक नहीं होने से नियमित कक्षा संचालन में कठिनाई होने की बात स्कूल प्रबंधन ने कही है। प्रभारी प्रधान पाठक ने आशंका जताई है कि मौजूदा व्यवस्था बच्चों के शैक्षणिक और सर्वांगीण विकास को प्रभावित कर सकती है। इसके साथ ही उनकी देखरेख और सुरक्षा को लेकर भी व्यावहारिक परेशानी बनी हुई है। स्कूल ने किसी संभावित अप्रिय स्थिति से बचने के लिए भी शिक्षक-सहायक की शीघ्र व्यवस्था को जरूरी बताया है।
सवाल- अप्रैल में पत्र दिया तो पांच महीने में व्यवस्था क्यों नहीं हुई?
स्कूल के पत्र में दर्ज तारीख और वर्तमान स्थिति को देखें तो सवाल शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर भी है। 13 अप्रैल को शिक्षक-सहायक की मांग विभाग के सामने रखी गई थी। सितंबर तक व्यवस्था नहीं होने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में सवाल है कि स्कूल की मांग पर इन महीनों में क्या कार्रवाई हुई? शिक्षक-सहायक की व्यवस्था क्यों नहीं हो सकी? इन सवालों पर विभागीय पक्ष सामने आना बाकी है।
इधर जनजातीय स्कूलों में भी शिक्षक कमी की शिकायतें
जिले में जनजातीय कार्य विभाग के अधीन संचालित स्कूलों में भी शिक्षकों की कमी और अतिथि शिक्षक व्यवस्था को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। आरोप लगाए जाते हैं कि कई स्थानों पर जरूरत के मुताबिक शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं और अतिथि शिक्षक रखने की प्रक्रिया को लेकर भी असंतोष है।
अब कलेक्टर से उम्मीद
प्रभारी प्रधान पाठक ने कलेक्टर से प्रकरण की गंभीरता और बच्चों के हित को देखते हुए शासकीय हिंदी माध्यमिक शाला जैनाबाद की पूर्व प्राथमिक कक्षाओं के लिए शिक्षक और सहायक की शीघ्र व्यवस्था कराने की मांग की है। अब सीधा सवाल यही है— जब स्कूल में 3 से 5 साल के 35 बच्चे बाकायदा नामांकित हैं और अप्रैल से शिक्षक की मांग दर्ज है, तो उनकी कक्षा के लिए जिम्मेदार शिक्षक-सहायक की व्यवस्था कब होगी?



