बुरहानपुर। एक तरफ ईच्छापुर-इंदौर फोरलेन आकार ले रहा है, दूसरी तरफ इसके किनारे बसे गांवों के किसानों के सामने अपनी रोजमर्रा की आवाजाही का सवाल है। हाईवे तो बन जाएगा, लेकिन किसान अपने खेत तक कैसे पहुंचेगा? गांव से खेत और पुराने संपर्क मार्गों का रास्ता कहीं फोरलेन की रफ्तार में मुश्किल न हो जाए? इन्हीं स्थानीय जरूरतों को लेकर विधायक एवं पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस ने ईच्छापुर, दापोरा और शाहपुर क्षेत्र में निर्माण कार्यों का मौके पर निरीक्षण किया।
गौरतलब है कि विधायक अर्चना चिटनिस ने ईच्छापुर में उन रास्तों को स्वयं जाकर देखा, जिनसे ग्रामीण वर्षों से गांव से खेत और आसपास के क्षेत्रों तक आते-जाते हैं। नान्या की सेरी रोड और महाराष्ट्र के अंतुर्ली की ओर जाने वाले खेत मार्ग पर हाईवे निर्माण के बाद स्थानीय आवाजाही कैसे बनी रहेगी, इसे लेकर अधिकारियों के साथ अंडरपास की आवश्यकता पर चर्चा की गई। चिटनिस ने कहा कि हाईवे क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन बड़ी सड़क के साथ गांव और खेतों का संपर्क भी सुगम रहना जरूरी है। विकास ऐसा होना चाहिए जिसमें स्थानीय जरूरतों को भी स्थान मिले।
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खेत रोज जाना है, इसलिए रास्ता भी रोज चाहिए
ग्रामीण क्षेत्र में खेत तक पहुंचने वाला रास्ता महज सड़क नहीं होता। किसान के लिए यही रास्ता उसकी खेती, फसल और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा होता है। हाईवे बनने से लंबी दूरी का सफर आसान होगा, लेकिन उसके दोनों ओर बसे गांवों के लिए स्थानीय संपर्क बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। ईच्छापुर में निरीक्षण के दौरान यही पहलू प्रमुखता से सामने आया। नान्या की सेरी रोड और ईच्छापुर से महाराष्ट्र के अंतुर्ली की ओर जाने वाले खेत मार्ग को देखा गया। हाईवे निर्माण के बाद इन मार्गों से ग्रामीणों और किसानों की आवाजाही को देखते हुए अंडरपास की जरूरत पर संबंधित अधिकारियों से चर्चा हुई। अंडरपास की व्यवस्था होने पर ग्रामीणों को हाईवे के दूसरी ओर स्थित खेतों और आसपास के क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए सुरक्षित स्थानीय संपर्क मिल सकेगा।
चमचमाता फोरलेन मिले, लेकिन गांव का पुराना संपर्क भी बना रहे
फोरलेन किसी क्षेत्र के लिए विकास की बड़ी तस्वीर है, लेकिन गांवों में इसकी उपयोगिता स्थानीय संपर्क व्यवस्था से भी तय होती है। सड़क के एक ओर गांव और दूसरी ओर खेत या पुराना संपर्क मार्ग होने की स्थिति में ग्रामीणों की जरूरत अलग होती है। इसी कारण चिटनिस ने अधिकारियों के साथ स्थानीय जरूरतों के अनुरूप अंडरपास और संपर्क व्यवस्था विकसित करने के विषय पर चर्चा की। संदेश साफ था—बड़ी सड़क बने, यातायात तेज हो, लेकिन उसकी कीमत गांव और खेत के बीच का संपर्क कमजोर होने के रूप में न चुकानी पड़े। हालांकि अंडरपास को लेकर अभी आवश्यकता और संभावनाओं पर चर्चा की गई है। उपलब्ध जानकारी में इसकी स्वीकृति का उल्लेख नहीं है।
ईच्छादेवी जाने वाले रास्ते पर भी नजर, चौराहे की जरूरत बताई
ईच्छापुर में शनि मंदिर के समीप तथा महाराष्ट्र मार्ग से मां ईच्छादेवी मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग का भी निरीक्षण किया गया। इस हिस्से में स्थानीय एवं मंदिर की ओर होने वाली आवाजाही को देखते हुए चौराहा निर्माण की आवश्यकता पर अधिकारियों के साथ चर्चा हुई। यह व्यवस्था स्थानीय लोगों के साथ महाराष्ट्र की ओर से ईच्छादेवी मंदिर आने-जाने वाले श्रद्धालुओं की आवाजाही से भी जुड़ी है।
दापोरा में दूसरी चिंता—बारिश आए तो गांव का पानी कहां जाएगा?
ईच्छापुर में खेतों तक पहुंचने के रास्ते की चिंता थी तो दापोरा में मामला बारिश के पानी और गांव की सड़क से जुड़ा मिला। चिटनिस ने यहां जल निकासी व्यवस्था का मौके पर निरीक्षण किया। वर्षा के दौरान जलभराव की समस्या से बचने के लिए गांव से निकलने वाले पानी को मुख्य नाले तक व्यवस्थित तरीके से पहुंचाने के लिए समुचित ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने की आवश्यकता पर अधिकारियों से चर्चा हुई। गांव के मुख्य प्रवेश मार्ग की स्थिति भी देखी गई। यहां पक्की सड़क के साथ किसानों के खेतों तक पहुंच आसान बनाने के लिए ग्रेवल सड़क की आवश्यकता का भी जायजा लिया गया। बारिश में घरों और रास्तों के आसपास पानी न ठहरे और किसान खेत तक आसानी से पहुंच सके—दापोरा में निरीक्षण का केंद्र इन्हीं बुनियादी जरूरतों पर रहा।
शाहपुर बायपास पर नाला और सड़क दोनों पर फोकस
इसके बाद चिटनिस शाहपुर क्षेत्र में आनंद सागर से पहले ग्राम धामनगांव बायपास पहुंचीं। यहां सड़क के साथ जल निकासी की स्थिति देखी गई। सीसी नाला और पक्की सड़क निर्माण से जुड़े कार्यों का निरीक्षण करते हुए अधिकारियों के साथ स्थिति पर चर्चा की गई। सीमेंटीकृत नाले से बारिश के पानी की व्यवस्थित निकासी और पक्की सड़क से बायपास क्षेत्र में आवागमन बेहतर करने की आवश्यकता बताई गई। चिटनिस ने अधिकारियों को कार्यों में गुणवत्ता बनाए रखने और उन्हें समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
कागज पर नहीं, मौके पर ग्रामीणों ने बताई जरूरत
इस दौरे में स्थानीय ग्रामीण और जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। उन्होंने क्षेत्र में आवागमन, खेत मार्ग, सड़क और जल निकासी से जुड़ी आवश्यकताओं की जानकारी चिटनिस को दी। इसके बाद मौके पर मौजूद अधिकारियों के साथ इन विषयों पर चर्चा की गई। चिटनिस ने कहा कि सड़क, अंडरपास, जल निकासी और संपर्क मार्ग जैसी सुविधाएं ग्रामीणों और किसानों के दैनिक जीवन से सीधे जुड़ी हैं। विकास कार्यों का उद्देश्य नागरिकों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप स्थायी और उपयोगी सुविधाएं उपलब्ध कराना होना चाहिए।
विकास की बड़ी लकीर के बीच छोटी जरूरतें न छूटें
ईच्छापुर से शाहपुर तक का यह निरीक्षण विकास परियोजनाओं से जुड़े उस पहलू को सामने लाता है जो बड़ी सड़क के नक्शे में छोटा दिखाई दे सकता है, लेकिन गांव के किसान के लिए महत्वपूर्ण है। किसी के खेत तक जाने का रास्ता, किसी गांव के बारिश के पानी की निकासी, कहीं मुख्य सड़क तक पहुंच और कहीं मंदिर की ओर जाने वाला मार्ग—ग्रामीण जीवन में यही छोटी दिखने वाली व्यवस्थाएं रोजमर्रा की बड़ी जरूरत बन जाती हैं। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि मौके पर सामने आई इन जरूरतों को विभागीय स्तर पर किस तरह आगे बढ़ाया जाता है। खासकर ईच्छापुर में अंडरपास और चौराहे की आवश्यकता को लेकर संबंधित विभाग आगे क्या निर्णय लेते हैं।
ये रहे मौजूद
निरीक्षण के दौरान जलगांव प्रोजेक्ट डायरेक्टर भाऊसाहेब सालुंके, नेशनल हाईवे अथॉरिटी के कंसल्टेंट किशोर व्यास, शाहपुर नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि वीरेंद्र तिवारी, जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि प्रदीप पाटिल, विनोद चौधरी, लक्ष्मण पवार, गणेश महाजन, वामन माली, संजय पवार, विजय पवार, दापोरा में राजेश पाटिल, अशोक पाटिल, स्वप्निल पाटिल, अमोल प्रकाश पाटिल, संदीप पाटिल, मयूर पाटिल, अमोल चौधरी, संजय चौधरी, आकाश राखोंडे, दिवाकर सपकाले एवं फिरोज तड़वी सहित जनप्रतिनिधि व ग्रामीणजन उपस्थित रहे।



