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50 बोतल कोल्ड ड्रिंक, 10 किलो मोमोज, 10 किलो प्याज और 10 किलो तैयार सब्जी कराई नष्ट; अब नोटिस देकर जवाब मांगेगा खाद्य सुरक्षा विभाग
बुरहानपुर। खाने-पीने का सामान बेचने वाले कारोबारियों की लापरवाही अब जेब पर भारी पड़ रही है। जिले में खाद्य सुरक्षा मानकों को लेकर की गई जांच के बाद 7 प्रकरण एडीएम कोर्ट तक पहुंचे और इनमें कुल ₹2 लाख 20 हजार का अर्थदंड लगाया गया। इनमें अमानक-मिथ्याछाप खाद्य सामग्री और बिना लाइसेंस से जुड़े प्रकरण शामिल हैं।
इधर गुरुवार को खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम फिर मैदान में उतरी। कलेक्टर कार्यालय से सिंधी बस्ती तिराहे के बीच तीन प्रतिष्ठानों की जांच की गई। यहां 50 बोतल एक्सपायरी कोल्ड ड्रिंक, 10 किलो मोमोज, 10 किलो प्याज और 10 किलो तैयार सब्जी को मौके पर नष्ट कराया गया। विभाग अब तीनों प्रतिष्ठान संचालकों को नोटिस जारी करेगा। जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पहले नमूने लिए, जांच भोपाल भेजी; रिपोर्ट आई तो कोर्ट पहुंचा मामला
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से जिले में खाद्य प्रतिष्ठानों की लगातार जांच की जा रही है। निरीक्षण के दौरान अनियमितता मिलने पर खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर खाद्य विश्लेषक भोपाल को जांच के लिए भेजे गए थे। विभाग के अनुसार जांच रिपोर्ट मिलने पर अलग-अलग मामलों में खाद्य पदार्थों के नमूने अमानक अथवा मिथ्याछाप पाए गए, जबकि बिना लाइसेंस से जुड़े मामले भी सामने आए। इसके बाद संबंधित सात प्रकरण नियमानुसार एडीएम न्यायालय में प्रस्तुत किए गए। कोर्ट ने सुनवाई के बाद इन मामलों में कुल ₹2.20 लाख का अर्थदंड लगाया।
देड़तलाई के किराना प्रतिष्ठान पर सबसे ज्यादा ₹50 हजार जुर्माना
सात मामलों में सबसे अधिक ₹50 हजार का अर्थदंड जयसवाल किराना, देड़तलाई पर लगाया गया है। ए-वन जलेबी, सिंधीपुरा गेट पर ₹30 हजार, हरिओम कन्फेक्शनरी, बस स्टैंड पर ₹20 हजार, नदीम ट्रेडर्स, पाल बाजार पर ₹20 हजार, ख्वाजा चिश्ती मटन होटल, पाल बाजार पर ₹40 हजार, एस.के. मेडिकोज पर ₹20 हजार और न्यू अयाज अशरफी होटल, पाल बाजार पर ₹40 हजार का अर्थदंड लगाया गया। सातों मामलों को जोड़कर अर्थदंड की कुल राशि ₹2 लाख 20 हजार होती है।
पुराने मामलों में जुर्माना, उसी दिन शहर में फिर निकली जांच टीम
एक तरफ खाद्य सुरक्षा से जुड़े सात मामलों में कोर्ट ने अर्थदंड लगाया तो दूसरी तरफ विभाग ने गुरुवार को शहर में खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच का अभियान चलाया। खाद्य सुरक्षा अधिकारी कमलेश डावर के अनुसार टीम ने कलेक्टर कार्यालय के पास से सिंधी बस्ती तक तीन प्रतिष्ठानों की जांच की। जांच में मिली एक्सपायरी और अनुपयोगी सामग्री को मौके पर ही नष्ट कराया गया। कार्रवाई में सबसे अधिक मात्रा में एक्सपायरी कोल्ड ड्रिंक मिली।
टॉप एन टाउन में मिलीं 50 एक्सपायरी कोल्ड ड्रिंक, मौके पर नष्ट
विभाग के अनुसार टॉप एन टाउन की जांच में 50 बोतल कोल्ड ड्रिंक एक्सपायरी मिलीं। इन्हें ग्राहकों तक पहुंचने से पहले टीम ने मौके पर नष्ट कराया। इसके बाद फन एंड फूड की जांच की गई। यहां से 10 किलो मोमोज नष्ट कराए गए। आनंद ग्रीन होटल की जांच में 10 किलो प्याज और 10 किलो तैयार सब्जी अनुपयोगी पाए जाने पर नष्ट कराई गई। इस तरह एक ही अभियान में तीन प्रतिष्ठानों से खाने-पीने की अलग-अलग सामग्री हटवाई गई।
सवाल सिर्फ सफाई का नहीं, ग्राहक की सेहत से जुड़ा मामला
खाद्य प्रतिष्ठानों में एक्सपायरी अथवा अनुपयोगी सामग्री मिलने का मामला सीधे उपभोक्ता की खाद्य सुरक्षा से जुड़ा है। खासकर तैयार खाद्य सामग्री और पेय पदार्थों में गुणवत्ता संबंधी लापरवाही होने पर इसका असर सीधे ग्राहक पर पड़ सकता है। इसी कारण खाद्य सुरक्षा विभाग ने सामग्री नष्ट कराने के साथ प्रकरण को यहीं समाप्त नहीं किया है। संबंधित तीनों प्रतिष्ठानों को नोटिस देकर जवाब मांगा जाएगा।
नोटिस के बाद जवाब की जांच, संतोषजनक नहीं मिला तो आगे कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा अधिकारी कमलेश डावर के अनुसार तीनों प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए जाएंगे। संचालकों से जवाब मिलने के बाद विभाग उसकी जांच करेगा। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर नियमानुसार आगे कार्रवाई की जाएगी। यानी जिन प्रतिष्ठानों से सामग्री नष्ट कराई गई है, उनके मामले में अंतिम कार्रवाई अभी बाकी है।
7 मामलों में किस पर कितना जुर्माना
| प्रतिष्ठान | अर्थदंड |
| ए-वन जलेबी, सिंधीपुरा गेट | ₹30,000 |
| जयसवाल किराना, देड़तलाई | ₹50,000 |
| हरिओम कन्फेक्शनरी, बस स्टैंड | ₹20,000 |
| नदीम ट्रेडर्स, पाल बाजार | ₹20,000 |
| ख्वाजा चिश्ती मटन होटल, पाल बाजार | ₹40,000 |
| एस.के. मेडिकोज | ₹20,000 |
| न्यू अयाज अशरफी होटल, पाल बाजार | ₹40,000 |
| कुल | ₹2,20,000 |
एक तरफ कोर्ट का ₹2.20 लाख का झटका, दूसरी तरफ बाजार में जांच
गुरुवार की कार्रवाई और सात पुराने प्रकरणों में आए फैसले को साथ देखें तो खाद्य कारोबारियों पर निगरानी बढ़ती दिखाई दे रही है। एक ओर नमूनों की लैब रिपोर्ट के आधार पर मामले कोर्ट तक पहुंच रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विभाग बाजार में पहुंचकर एक्सपायरी और अनुपयोगी सामग्री नष्ट करा रहा है। अब असली कसौटी यह होगी कि जांच अभियान कितनी नियमितता से चलता है और नोटिस के बाद नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई किस स्तर तक पहुंचती है। फिलहाल सात प्रकरणों में ₹2.20 लाख का अर्थदंड और तीन प्रतिष्ठानों में मिली सामग्री नष्ट कराने की कार्रवाई ने खाद्य कारोबारियों को स्पष्ट संदेश दिया है—खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी मिली तो मामला जांच से कोर्ट तक पहुंच सकता है।

