बुरहानपुर। त्योहारों के बीच आमजन की सेहत से जुड़े खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचने निकले खाद्य सुरक्षा प्रशासन की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। विभाग लगातार प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर नमूने भोपाल भेज रहा है, लेकिन जहां एक्सपायरी और खराब सामग्री मिल रही है, वहां उसे मौके पर नष्ट कराया जा रहा है। सवाल यह है कि खराब सामग्री मिलने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई? नष्ट किए गए सामान का रिकॉर्ड क्या है और पिछले महीनों में जांच के लिए भेजे गए नमूनों की रिपोर्ट कहां है? विभाग की कार्रवाई में पारदर्शिता का अभाव अब सवाल खड़े कर रहा है।
गौरतलब है कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी कमलेश डावर ने इकबाल चौक स्थित मोहम्मद इकबाल एंड ब्रदर्स का निरीक्षण किया। यहां जीरा, धनिया पाउडर और काली मिर्च के नमूने लिए गए। निरीक्षण के दौरान करीब 5 हजार रुपए कीमत की एक्सपायरी और खराब खाद्य सामग्री भी मिली, जिसे मौके पर नष्ट कराया गया। प्रतिष्ठान को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 32 के तहत सुधार नोटिस जारी किया गया। इसी तरह ग्राम इच्छापुर के योगेश किराना से भगर और मां इच्छादेवी स्वीट्स से कड़ी पेड़ा का नमूना जांच के लिए भोपाल भेजा गया। विभाग के अनुसार जांच रिपोर्ट में नमूने अमानक पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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खराब सामग्री नष्ट हुई, लेकिन जिम्मेदारी कैसे तय होगी?
विभाग की कार्रवाई में सबसे बड़ा सवाल खराब और एक्सपायरी सामग्री के निस्तारण के साथ जवाबदेही तय करने का है। सामग्री नष्ट कराना खाद्य सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक कदम हो सकता है, लेकिन इससे यह सवाल समाप्त नहीं होता कि संबंधित प्रतिष्ठान में ऐसी सामग्री क्यों रखी थी और उसके संबंध में कौन-सी वैधानिक कार्रवाई की गई। विभाग को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि नष्ट की गई सामग्री का विधिवत रिकॉर्ड तैयार किया गया या नहीं और संबंधित प्रतिष्ठानों के विरुद्ध आगे क्या कार्रवाई प्रस्तावित है।
सैंपलिंग लगातार, लेकिन पुरानी जांच रिपोर्ट कहां?
पिछले दो महीनों में खाद्य सुरक्षा प्रशासन जिले के विभिन्न प्रतिष्ठानों से कई बार खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर जांच के लिए भोपाल भेज चुका है। इसके बावजूद सभी नमूनों की जांच रिपोर्ट, अमानक पाए गए उत्पादों और संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ की गई कार्रवाई का समेकित विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि कितने नमूने मानक पाए गए, कितने अमानक निकले और कितने मामलों में नोटिस से आगे कार्रवाई हुई? इन आंकड़ों के बिना विभागीय अभियान की वास्तविक प्रभावशीलता का आकलन करना मुश्किल है।
अच्छी सामग्री के नमूने भेजने के आरोप, निष्पक्ष जांच जरूरी
खराब सामग्री मौके पर नष्ट करने और अन्य उत्पादों के नमूने भोपाल भेजने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, इससे यह साबित नहीं होता कि विभाग जानबूझकर अच्छी सामग्री के नमूने भेज रहा है। इस आशंका को दूर करने के लिए नमूना चयन, नष्ट की गई सामग्री और प्रयोगशाला जांच की प्रक्रिया का स्पष्ट रिकॉर्ड सामने आना जरूरी है।

