बुरहानपुर। शारदीय नवरात्रि में जहां दुर्गा पंडालों में माता की आराधना हो रही है, वहीं निंबोला सेक्टर के ग्रामीण क्षेत्रों में आरती के समय बिजली कटौती को लेकर आक्रोश बढ़ गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले दो-तीन दिनों से शाम को ठीक उसी समय बिजली बंद की जा रही है, जब दुर्गा पंडालों में आरती शुरू होती है। इससे धार्मिक आयोजनों में व्यवधान पैदा हो रहा है। मंगलवार दोपहर नाराज ग्रामीण युवाओं ने निंबोला विद्युत वितरण केंद्र पहुंचकर सहायक यंत्री विकास सिसोदिया के सामने विरोध दर्ज कराया। उनका सीधा सवाल था कि जब शहर में बिजली आपूर्ति जारी रह सकती है तो गांवों में आरती के समय ही अंधेरा क्यों किया जा रहा है?
ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचे संतोष भोजने, विकास कैथवास, दीपक पाटिल और नवल ससाने ने बिजली कटौती के समय पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि नवरात्रि के दौरान विभिन्न दुर्गा पंडालों में शाम 6 से 8 बजे के बीच आरती का समय निर्धारित है। इसी दौरान बिजली बंद होने से आयोजन समितियों और श्रद्धालुओं को परेशानी उठानी पड़ रही है।
Table of Contents
कुछ ग्रिड पर बिजली चालू, कुछ पर कटौती; ग्रामीणों ने पूछा—यह कैसी व्यवस्था?
ग्रामीण युवाओं ने आरोप लगाया कि बिजली कटौती की व्यवस्था में एकरूपता नहीं है। कुछ ग्रिड से जुड़े क्षेत्रों में आपूर्ति जारी रहती है, जबकि निंबोला ग्रिड से जुड़े गांवों में बिजली बंद कर दी जाती है। ग्रामीणों ने इसे भेदभाव जैसा रवैया बताते हुए सवाल उठाया कि आखिर ग्रामीण उपभोक्ताओं को ही बार-बार परेशानी क्यों झेलनी पड़ रही है? युवाओं ने कहा कि बिजली कंपनी को कम से कम धार्मिक आयोजनों के समय का ध्यान रखना चाहिए। नवरात्रि में आरती का समय पहले से निर्धारित है। इसके बावजूद लगातार उसी समय बिजली कटौती होना समझ से परे है। उन्होंने मांग की कि शाम 6 से 8 बजे के बीच बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और कटौती के समय में बदलाव किया जाए।
अफसर का जवाब—लोड शेडिंग ऊपर से होती है, स्थानीय स्तर पर निर्णय नहीं
विरोध दर्ज कराने पहुंचे ग्रामीणों को सहायक यंत्री विकास सिसोदिया ने बताया कि लोड शेडिंग का निर्णय उच्च स्तर से होता है। स्थानीय विद्युत वितरण केंद्र से बिजली कटौती निर्धारित नहीं की जाती। हालांकि, इस जवाब से ग्रामीण संतुष्ट नहीं हुए। उनका कहना था कि कटौती का निर्णय कहीं से भी होता हो, लेकिन परेशानी गांवों के लोगों को उठानी पड़ रही है। ऐसे में स्थानीय अधिकारियों को ग्रामीणों की समस्या उच्च स्तर तक पहुंचाकर समाधान कराना चाहिए। अब सवाल यह है कि यदि लोड शेडिंग का समय उच्च स्तर से तय होता है तो नवरात्रि में आरती के समय बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए संबंधित अधिकारियों से समन्वय क्यों नहीं किया जा सकता?
इधर, किसान कांग्रेस का आरोप—मोटर पंप जांच के नाम पर थमाए जा रहे भारी बिल
निंबोला में ग्रामीणों के विरोध के बीच मंगलवार को बुरहानपुर में किसान कांग्रेस ने भी बिजली कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। जिला किसान कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश बूनगाड़ और पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष अजय रघुवंशी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने विद्युत विभाग के मुख्य कार्यपालन यंत्री के समक्ष बिजली कटौती और किसानों की बिलिंग संबंधी समस्याएं रखीं। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बिजली कटौती की जा रही है। इससे किसानों को सिंचाई में परेशानी हो रही है। दूसरी ओर, मोटर पंपों की जांच के नाम पर किसानों को भारी-भरकम बिजली बिल दिए जा रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल ने ऐसे बिल तत्काल वापस लेने और मोटर पंपों की जांच संबंधी कार्रवाई बंद करने की मांग की। नेताओं ने कहा कि बिजली आपूर्ति की समस्या के साथ अतिरिक्त बिलों का बोझ किसानों की परेशानी बढ़ा रहा है।
इस दौरान पूर्व जिला ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष किशोर महाजन, दिनेश शर्मा, हेमंत पाटिल, राजू महाजन, भास्कर महाजन, गणेश पाटिल, विजय पाटिल, सुनील सोनवाने, राहुल चौधरी, मनोहर पाटिल, कृष्णा अखाड़े, अनिल हवेली वाले, किशोर दादा, मुन्ना महाजन, संजय पाटिल, देवीदास पाटिल और सचिन पाटिल सहित किसान कांग्रेस के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
दो मोर्चों पर घिरी बिजली व्यवस्था, अब समाधान का इंतजार
एक ओर निंबोला क्षेत्र के ग्रामीण नवरात्रि में आरती के समय बिजली कटौती का विरोध कर रहे हैं, तो दूसरी ओर किसान बिजली आपूर्ति और भारी बिलों को लेकर शिकायतें दर्ज करा रहे हैं। दोनों मामलों ने ग्रामीण विद्युत व्यवस्था और उपभोक्ताओं की समस्याओं के निराकरण पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों की मांग स्पष्ट है—आरती के समय बिजली कटौती बंद हो और किसानों की बिलिंग संबंधी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर राहत दी जाए। फिलहाल बिजली कंपनी की ओर से कटौती का समय बदलने या विवादित बिलों के निराकरण की कोई निश्चित समयसीमा सामने नहीं आई है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि ग्रामीणों और किसानों को राहत कब मिलेगी?

