Homeबुरहानपुरचोंडी डैम से बह रहा सिंचाई का...

चोंडी डैम से बह रहा सिंचाई का पानी, किसानों का फूटा गुस्सा; बोले—अभी नहीं रोका रिसाव तो जलसंकट से जूझेंगे दर्जनों गांव

भावसा मध्यम सिंचाई परियोजना के डैम की गेट संरचना से जल रिसाव का आरोप; कम बारिश के बीच पानी की बर्बादी से किसान चिंतित, कलेक्ट्रेट में नारेबाजी कर कलेक्टर से मांगा जवाब

बुरहानपुर। जिस चोंडी डैम में संग्रहित पानी से किसानों को अपनी फसलों की सिंचाई करनी है, उसी डैम की गेट संरचना से पानी रिसने की शिकायत ने शाहपुर क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। इस वर्ष अपेक्षाकृत कम बारिश के बीच उपलब्ध पानी को बचाने की चुनौती है, लेकिन किसानों का आरोप है कि भावसा मध्यम सिंचाई परियोजना के डैम से लगातार जल रिसाव हो रहा है। मंगलवार को आक्रोशित किसान कलेक्ट्रेट पहुंच गए। नारेबाजी करते हुए प्रशासन से तत्काल रिसाव रोकने की मांग की। किसानों ने चेताया कि समय रहते पानी का अपव्यय नहीं रोका गया तो आगामी दिनों में सिंचाई के साथ पेयजल का भी गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।

Sadaiv News
भावसा मध्यम सिंचाई परियोजना के चोंडी डैम से जल रिसाव की शिकायत को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे किसान। प्रशासन ने जांच के लिए तकनीकी टीम भेजी।

दरअसल फोपनार, बड़सिंगी, दहीहांडी, रायगांव, नीमगांव, तुरकगोराड़ा, पिपरी, खामनी, भावसा, खारी, मालवीर, बक्खारी और मोहद सहित आसपास के गांवों के किसान विभिन्न राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां डिप्टी कलेक्टर तपीश पांडे ज्ञापन लेने आए, लेकिन किसानों ने सीधे कलेक्टर हर्ष सिंह को समस्या बताने की मांग की। इसके बाद कलेक्टर ने पहुंचकर किसानों की शिकायत सुनी और तकनीकी टीम से जांच कराने की जानकारी दी।

डैम में पानी ही नहीं बचेगा तो खेतों तक क्या पहुंचेगा?

किसानों का कहना है कि चोंडी डैम की गेट संरचना से हो रहे रिसाव के कारण संग्रहित पानी का अपव्यय हो रहा है। इस वर्ष कम बारिश होने से जल संरक्षण और भी महत्वपूर्ण हो गया है। यदि रिसाव जारी रहा तो आगामी सिंचाई सीजन में पानी की कमी का सीधा असर फसलों और किसानों की आजीविका पर पड़ सकता है। किसानों ने सवाल उठाया कि जब डैम का उद्देश्य ही सिंचाई के लिए पानी संग्रहित करना है तो उसके रिसाव को रोकने के लिए तत्काल सुधार कार्य क्यों नहीं कराया जा रहा? उनका कहना है कि पानी बह जाने के बाद कार्रवाई करने से किसानों को राहत नहीं मिलेगी। इसलिए प्रशासन को तकनीकी जांच के साथ समयबद्ध मरम्मत सुनिश्चित करनी चाहिए।

13 गांवों के किसानों की चिंता, पेयजल संकट की भी आशंका

चोंडी डैम के जल रिसाव को लेकर फोपनार से लेकर मोहद तक के किसानों में चिंता है। किसानों का कहना है कि पानी की उपलब्धता घटने पर केवल कृषि उत्पादन ही प्रभावित नहीं होगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की समस्या भी बढ़ सकती है। इंद्रसेन देशमुख ने कहा कि शाहपुर क्षेत्र के किसान और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि एक ही मांग लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे हैं कि डैम से हो रहा जल रिसाव तत्काल बंद किया जाए। उन्होंने कहा कि जिले में पहले से जलसंकट की स्थिति है। यदि समय रहते पानी नहीं बचाया गया तो आने वाले दिनों में हालात भयावह हो सकते हैं।

कलेक्टर से मिलने पर अड़े किसान, जांच के लिए भेजी टीम

कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन के दौरान किसानों ने अपनी समस्या सीधे कलेक्टर के सामने रखने की मांग की। डिप्टी कलेक्टर तपीश पांडे के ज्ञापन लेने पहुंचने के बावजूद किसान कलेक्टर से मिलने पर अड़े रहे। कलेक्टर हर्ष सिंह ने किसानों को बताया कि चोंडी डैम की स्थिति का आकलन करने के लिए टीम मौके पर भेजी गई है। टीम जांच कर आवश्यक सुझाव देगी। उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, डैम से प्रतिदिन कितना पानी रिस रहा है, रिसाव का वास्तविक कारण क्या है और उसे रोकने में कितना समय लगेगा, इसकी स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

इधर, बिजली कटौती और भारी-भरकम बिलों ने बढ़ाई किसानों की परेशानी

जल रिसाव के साथ किसानों ने बिजली व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जताई। जिला किसान कांग्रेस की ओर से अधिकारियों को अलग ज्ञापन सौंपा गया। कांग्रेस नेता अजय सिंह रघुवंशी ने आरोप लगाया कि जिले में असमय बिजली कटौती की जा रही है। इससे सिंचाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि पांच हॉर्स पावर की सिंचाई मोटर होने के बावजूद किसानों को दस हॉर्स पावर के हिसाब से बिल दिए जा रहे हैं। मोटर पंपों की जांच के नाम पर भी भारी-भरकम बिल थमाने की शिकायतें हैं। उन्होंने बिजली कंपनी से मनमानी बिलिंग बंद करने, शिकायतों की जांच कराने और सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने की मांग की।

जांच के भरोसे कब तक? किसानों को चाहिए रिसाव रोकने की समयसीमा

चोंडी डैम से जल रिसाव की शिकायत ने सिंचाई परियोजना के रखरखाव और जल संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कम बारिश के बीच संग्रहित पानी की एक-एक बूंद महत्वपूर्ण है। ऐसे में केवल जांच कराना पर्याप्त नहीं होगा। रिसाव की वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर आवश्यक सुधार कार्य की समयसीमा तय करना भी जरूरी है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब किसान पानी बचाने के लिए कलेक्ट्रेट तक पहुंच रहे हैं, तब डैम के रिसाव को रोकने की ठोस कार्रवाई कब शुरू होगी? प्रशासन ने जांच का भरोसा दिया है, लेकिन किसानों को अब आश्वासन नहीं, पानी बचाने के लिए प्रभावी और समयबद्ध कदमों का इंतजार है।

spot_img
spot_img
spot_img

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img

Latest Articles