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जिले में अवैध शराब का काला कारोबार! पुलिस पकड़ रही खेप, आबकारी विभाग की निगरानी पर सवाल; आखिर कौन कर रहा शराब की सप्लाई?

महिलाएं पहले भी खोल चुकी हैं मोर्चा, फिर भी नहीं थम रहा अवैध कारोबार; खकनार पुलिस ने 32,500 रुपए की शराब के साथ आरोपी को दबोचा, शराब ठेकेदारों की निगरानी और आपूर्ति व्यवस्था की जांच पर उठे सवाल

बुरहानपुर। जिले के आदिवासी अंचलों में अवैध शराब का कारोबार पुलिस और आबकारी विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। गांवों तक अवैध शराब पहुंचने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। एक तरफ पुलिस अवैध शराब की खेप पकड़कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, तो दूसरी तरफ आबकारी विभाग की निगरानी और कार्रवाई की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर आदिवासी क्षेत्रों तक शराब की खेप पहुंच कैसे रही है? इसकी सप्लाई कौन कर रहा है और शराब के अवैध कारोबार की जड़ तक कार्रवाई क्यों नहीं पहुंच पा रही?

Sadaiv News
खकनार पुलिस की कार्रवाई में अवैध शराब जब्त, आरोपी गिरफ्तार; आपूर्ति के स्रोत की जांच पर उठे सवाल

हैरानी की बात यह है कि आदिवासी अंचलों में अवैध शराब की बिक्री के विरोध में महिलाएं पहले भी मोर्चा खोल चुकी हैं। आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कार्रवाई की मांग भी कर चुकी हैं। इसके बावजूद अवैध शराब की बरामदगी के नए मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर विभाग की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है? ताजा मामला खकनार थाना क्षेत्र का है। यहां पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर घेराबंदी कर आमगांव निवासी एक युवक को शराब की पांच पेटियों के साथ गिरफ्तार किया है। पुलिस ने जब्त शराब की मात्रा 63 लीटर और कीमत 32 हजार 500 रुपए बताई है।

महिलाओं की आवाज के बाद भी नहीं थमा कारोबार, आखिर कब होगी निर्णायक कार्रवाई?

जिले में अवैध शराब की बिक्री को लेकर महिलाओं का विरोध पहले भी सामने आ चुका है। महिलाओं ने आबकारी विभाग द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए मोर्चा खोला था। इसके बावजूद शराब की अवैध आपूर्ति से जुड़े नए मामले सामने आना विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। सवाल यह है कि जिन क्षेत्रों में अवैध शराब की बिक्री को लेकर शिकायतें उठ चुकी हैं, वहां आबकारी विभाग ने कितनी बार दबिश दी? कितने अवैध ठिकानों पर कार्रवाई हुई? शराब की आपूर्ति करने वालों की पहचान के लिए क्या कदम उठाए गए? और सबसे महत्वपूर्ण, शिकायतों के बाद अवैध बिक्री रोकने के लिए क्या स्थायी व्यवस्था बनाई गई? इन सवालों के जवाब विभागीय कार्रवाई के आंकड़ों और जांच के निष्कर्षों से ही मिल सकेंगे।

पुलिस के हाथ लग रही शराब की खेप, आबकारी विभाग की कार्रवाई कहां?

जिले में अवैध शराब के खिलाफ पुलिस लगातार अभियान चला रही है। पुलिस अधीक्षक आशुतोष बागरी के निर्देशन में विभिन्न थाना क्षेत्रों में कार्रवाई की जा रही है। खकनार पुलिस की ताजा कार्रवाई भी इसी अभियान का हिस्सा है।लेकिन सवाल केवल पुलिस की कार्रवाई का नहीं, बल्कि आबकारी विभाग की जिम्मेदारी का भी है। शराब के वैध कारोबार की निगरानी, अवैध बिक्री पर नियंत्रण और आबकारी कानूनों का पालन सुनिश्चित कराने में विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है।जब पुलिस को मुखबिर से अवैध शराब की जानकारी मिल सकती है, तो आबकारी विभाग की निगरानी में ऐसे मामले कितनी बार सामने आ रहे हैं? क्या शराब दुकानों के स्टॉक और बिक्री की नियमित जांच हो रही है? क्या ग्रामीण क्षेत्रों में शराब की अवैध आपूर्ति रोकने के लिए विशेष निगरानी की जा रही है? क्या विभाग ने शराब ठेकेदारों की आपूर्ति व्यवस्था की जांच की है? इन सवालों का जवाब सामने आना जरूरी है। हालांकि, खकनार में जब्त शराब का संबंध किसी अधिकृत ठेकेदार से होने की पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

आमगांव रोड पर बिछाया जाल, पांच पेटी शराब के साथ युवक दबोचा

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, 12 अक्टूबर को खकनार थाना प्रभारी निरीक्षक अभिषेक जाधव को मुखबिर से सूचना मिली कि उसारनी-आमगांव रोड पर ग्राम आमगांव में एक व्यक्ति भारी मात्रा में अवैध शराब लेकर परिवहन करने की फिराक में है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम सक्रिय हुई। मौके पर घेराबंदी कर दबिश दी गई। पुलिस ने आमगांव निवासी हीरालाल पिता छोटेलाल मोरे, उम्र 28 वर्ष, को पकड़ लिया। आरोपी के कब्जे से पांच पेटी शराब जब्त की गई। इनमें तीन पेटी देसी प्लेन शराब और दो पेटी बॉम्बे स्पेशल व्हिस्की शामिल थीं। पुलिस के अनुसार, जब्त शराब की कुल कीमत 32 हजार 500 रुपए है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ थाना खकनार में अपराध क्रमांक 469/2026, आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।

शराब पकड़ी गई, लेकिन असली सप्लायर कौन? जांच में खुलना बाकी

खकनार पुलिस की कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल शराब की आपूर्ति करने वालों की पहचान का है। आखिर पांच पेटी शराब आरोपी तक कहां से पहुंची? किसने उपलब्ध कराई? शराब किस स्थान पर पहुंचाई जानी थी? क्या आरोपी अकेले काम कर रहा था या उसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क है? ये सवाल इसलिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए केवल शराब ले जाने वाले व्यक्ति को पकड़ना पर्याप्त नहीं है। शराब की आपूर्ति करने वालों और अवैध बिक्री की पूरी व्यवस्था का पता लगाना भी जरूरी है। यदि जांच में किसी अधिकृत शराब दुकान, ठेकेदार अथवा अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो उसके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। फिलहाल किसी शराब ठेकेदार की संलिप्तता का प्रमाण पुलिस की उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आया है।

शराब ठेकेदारों पर निगरानी कितनी सख्त? आबकारी विभाग को देना होगा जवाब

आदिवासी क्षेत्रों में अवैध शराब की बरामदगी ने एक बार फिर शराब दुकानों की निगरानी और आपूर्ति व्यवस्था की जांच का मुद्दा सामने ला दिया है। आबकारी विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जिले में संचालित अधिकृत शराब दुकानों के स्टॉक, बिक्री और परिवहन संबंधी रिकॉर्ड की जांच कितनी नियमितता से की जाती है। साथ ही यह भी बताना चाहिए कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में अवैध शराब की बिक्री रोकने के लिए कितनी कार्रवाई की गई। सवाल यह भी है कि यदि किसी क्षेत्र में बार-बार अवैध शराब मिलने की शिकायतें आती हैं, तो वहां विशेष अभियान चलाकर आपूर्ति के स्रोत तक पहुंचने की व्यवस्था क्यों नहीं की जाती? अवैध शराब की खेप पकड़ना कार्रवाई का एक हिस्सा है, लेकिन उसके स्रोत तक पहुंचना और दोबारा आपूर्ति रोकना कहीं बड़ी चुनौती है।

आबकारी विभाग की जवाबदेही तय हो, केवल छोटे आरोपियों पर कार्रवाई से नहीं टूटेगा नेटवर्क

अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए पुलिस और आबकारी विभाग के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। जिन क्षेत्रों में महिलाओं ने अवैध शराब की बिक्री को लेकर विरोध जताया है, वहां शिकायतों की समीक्षा और कार्रवाई के परिणाम सार्वजनिक किए जाने चाहिए। यह भी आवश्यक है कि अवैध शराब के मामलों में जब्त सामग्री के स्रोत, परिवहन के माध्यम और संभावित बिक्री केंद्रों की जांच की जाए। यदि जांच में किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका सामने आती है, तो केवल छोटे स्तर पर शराब ले जाने या बेचने वालों के बजाय आपूर्ति करने वालों तक भी कार्रवाई पहुंचे। आदिवासी अंचलों में अवैध शराब की बिक्री पर रोक लगाने के लिए नियमित दबिश के साथ प्रभावी निगरानी और शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई जरूरी है।

एसपी के निर्देशन में कार्रवाई, पुलिस टीम की सराहनीय भूमिका

पुलिस अधीक्षक आशुतोष बागरी के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रदीप शेंडे एवं एसडीओपी नेपानगर वैभव प्रिय के मार्गदर्शन में खकनार पुलिस ने कार्रवाई को अंजाम दिया। कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक अभिषेक जाधव, उपनिरीक्षक सुरेन्द्र सिंह राजपूत, प्रधान आरक्षक रेवाराम पवार, आरक्षक विजेन्द्र देवल्ये, शैलेन्द्र गोलकर और अजय अहिरवार की सराहनीय भूमिका रही।

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