नेपानगर। नगर पालिका नेपानगर में प्रभारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) विजय सिंह कुशवाहा की कार्यप्रणाली को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि वर्षों से लंबित अपनी ही वेतन विसंगति की करीब 1 लाख 90 हजार रुपए की राशि उन्होंने प्रभारी सीएमओ की कुर्सी संभालने के बाद खुद के हस्ताक्षर से स्वीकृत करवा ली। जिस फाइल पर पूर्व में कई सीएमओ के कार्यकाल में भुगतान नहीं हो सका, उसका प्रभारी अधिकारी बनते ही निपटारा होने से नगर पालिका की वित्तीय व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। नगर पालिका उपाध्यक्ष सरला प्रवीण काटकर ने कलेक्टर को लिखित शिकायत कर मामले की जांच और प्रभारी सीएमओ के वित्तीय अधिकार वापस लेने की मांग की है। हालांकि, कुशवाहा ने आरोपों को खारिज करते हुए भुगतान न्यायालय के आदेश और नियमानुसार होने का दावा किया है।
Table of Contents
14 सितंबर से नियमित सीएमओ अवकाश पर, उपयंत्री को मिला प्रभार
नगर पालिका के नियमित सीएमओ संतराम चौहान 14 सितंबर से अवकाश पर हैं। उनकी अनुपस्थिति में उपयंत्री विजय सिंह कुशवाहा को प्रभारी सीएमओ का दायित्व सौंपा गया। उपाध्यक्ष का आरोप है कि कुशवाहा ने प्रभार संभालने के बाद अपनी वर्षों पुरानी वेतन विसंगति की फाइल आगे बढ़वाई और करीब 1.90 लाख रुपए का भुगतान स्वीकृत कर दिया।शिकायत में सवाल उठाया गया है कि जब यह प्रकरण लंबे समय से लंबित था और पूर्व के अधिकारियों के कार्यकाल में इसका भुगतान नहीं हुआ, तो प्रभारी सीएमओ बनते ही इसे किस आधार पर स्वीकृति दी गई? क्या स्वयं से संबंधित वित्तीय प्रकरण में भुगतान स्वीकृत करना नियमानुसार था? यही सवाल अब पूरे विवाद के केंद्र में है।
90 दिन के वित्तीय अधिकारों पर विवाद, ठेकेदारों को भुगतान भी जांच के घेरे में
नगर पालिका उपाध्यक्ष सरला प्रवीण काटकर ने शिकायत में प्रभारी सीएमओ के वित्तीय अधिकारों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि प्रभारी सीएमओ को 90 दिन तक केवल नियमित भुगतान करने का अधिकार होता है, जबकि अन्य बड़े भुगतानों के लिए परिषद की स्वीकृति आवश्यक है। उपाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि कुशवाहा ने अपनी वेतन विसंगति की राशि स्वीकृत करने के साथ ही परिषद की मंजूरी के बिना ठेकेदारों को भी भुगतान किया। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह वित्तीय अधिकारों के इस्तेमाल और भुगतान स्वीकृति की प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर मामला हो सकता है। हालांकि, संबंधित नियमों, भुगतान अभिलेखों और परिषद के प्रस्तावों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
पहले से विभागीय आरोप पत्र, अब अपने ही भुगतान पर उठे सवाल
प्रभारी सीएमओ विजय सिंह कुशवाहा की मुश्किलें इसलिए भी बढ़ सकती हैं क्योंकि नगरीय प्रशासन विभाग ने हाल ही में खरीदी और निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर उन्हें आरोप पत्र जारी कर जवाब मांगा है। इन मामलों में विभागीय प्रक्रिया के बीच अब वेतन विसंगति भुगतान का नया विवाद सामने आया है। वहीं, उपयंत्री से प्रभारी सीएमओ बने कुशवाहा का नियमितीकरण भी पूर्व में विवादों में रहा है। उनके एक साथी उपयंत्री ने नियमितीकरण को लेकर न्यायालय में प्रकरण दायर किया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह मामला अभी विचाराधीन है। ऐसे में एक ओर पूर्व के मामलों में विभागीय जवाब मांगा गया है, तो दूसरी ओर स्वयं से संबंधित भुगतान की स्वीकृति को लेकर नगर पालिका उपाध्यक्ष ने जांच की मांग उठाई है।
स्थापना प्रभारी के बयान से नया सवाल—सीएमओ ने खुद फाइल चलाने को कहा
इस पूरे मामले में नगर पालिका की स्थापना शाखा की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। जून माह में स्थापना शाखा का प्रभार संभालने वाले पांडुरंग पाटील के अनुसार, प्रभारी सीएमओ विजय सिंह कुशवाहा ने स्वयं उन्हें अपनी वेतन विसंगति की फाइल आगे बढ़ाने के लिए कहा था। इसके बाद भुगतान किया गया। स्थापना प्रभारी के इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि फाइल आगे बढ़ाने की प्रक्रिया प्रभारी सीएमओ के निर्देश पर शुरू हुई थी। हालांकि, इससे भुगतान की वैधानिकता या अनियमितता अपने आप सिद्ध नहीं होती। इसके लिए संबंधित न्यायालयीन आदेश, फाइल पर दर्ज टिप्पणियों, वित्तीय स्वीकृति और भुगतान संबंधी दस्तावेजों की जांच जरूरी होगी।
उपाध्यक्ष ने कलेक्टर को लिखा पत्र, वित्तीय अधिकार वापस लेने की मांग
नगर पालिका उपाध्यक्ष सरला प्रवीण काटकर ने मामले को गंभीर बताते हुए कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने प्रभारी सीएमओ द्वारा स्वयं से संबंधित भुगतान स्वीकृत किए जाने और ठेकेदारों को कथित तौर पर बिना परिषद की मंजूरी भुगतान करने के मामलों की जांच कराने को कहा है। साथ ही उन्होंने प्रभारी सीएमओ के वित्तीय अधिकार वापस लेने की मांग भी की है, ताकि शिकायत में उठाए गए वित्तीय मामलों की निष्पक्ष जांच हो सके।
बड़ा सवाल—न्यायालय के आदेश पर भुगतान था तो स्वीकृति की प्रक्रिया क्या थी?
पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण पहलू न्यायालय के आदेश और भुगतान स्वीकृति की प्रक्रिया का है। प्रभारी सीएमओ का दावा है कि राशि न्यायालय के आदेश पर जारी हुई है। दूसरी ओर नगर पालिका उपाध्यक्ष ने स्वयं के हस्ताक्षर से भुगतान स्वीकृत करने पर आपत्ति जताई है। ऐसे में जांच का विषय यह होगा कि न्यायालय ने भुगतान के संबंध में क्या निर्देश दिए थे, राशि की गणना और स्वीकृति किस स्तर पर हुई तथा प्रभारी सीएमओ को स्वयं से संबंधित प्रकरण में वित्तीय स्वीकृति देने का अधिकार था या नहीं। इन सवालों का जवाब सामने आने के बाद ही तय हो सकेगा कि भुगतान पूरी तरह नियमसम्मत था या प्रक्रिया में कोई अनियमितता हुई।
प्रभारी सीएमओ बोले—न्यायालय के आदेश पर हुआ भुगतान, कुछ भी गलत नहीं
विजय सिंह कुशवाहा, प्रभारी सीएमओ, नगर पालिका नेपानगर ने अपना पक्ष रखते हुए कहा— वेतन का भुगतान नियमानुसार माननीय न्यायालय के आदेश पर हुआ है। इसमें गलत कुछ भी नहीं है। इससे पहले भी जिन अफसरों ने इस मामले में कार्रवाई की है, वह भी नियमानुसार सही थी।
फिलहाल प्रभारी सीएमओ ने भुगतान को नियमसम्मत बताया है, जबकि नगर पालिका उपाध्यक्ष ने पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिकायत पर प्रशासन क्या कार्रवाई करता है और वित्तीय स्वीकृति से जुड़े अभिलेखों की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।

