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शाहपुर में दर्दनाक हादसा: हाईवे प्लांट की डस्ट के ढेर में खेलते वक्त दबे दो मासूम, दम घुटने से मौत!

खिलौनों से हुआ खुलासा, जेसीबी से निकाले गए शव

On: August 4, 2025 9:53 AM
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शाहपुर (बुरहानपुर)। सोमवार दोपहर शाहपुर थाना क्षेत्र के ग्राम मोरदड़ में दिल दहला देने वाली घटना हुई। निर्माणाधीन नेशनल हाईवे पर बने प्लांट में गिट्टी-डस्ट का ढेर डालते वक्त दो मासूम बच्चे उसमें दब गए। दोनों बच्चे वहीं खेल रहे थे, तभी अचानक डंपर से डस्ट गिरा और वे नीचे दब गए। पूरा परिवार बच्चों को दिनभर ढूंढता रहा, लेकिन कोई खबर नहीं मिली। शाम होते-होते जब डस्ट के पास बच्चों के खिलौने नजर आए, तो शक हुआ… और जेसीबी से खुदाई करवाई गई। जब डस्ट के नीचे से दोनों बच्चों के शव निकले, तो परिवार की चीखें गूंज उठीं।
झाबुआ से मजदूरी करने आए थे माता-पिता, वहीं खेल रहे थे मासूम
टीआई अखिलेश मिश्रा ने बताया कि झाबुआ जिले के थांदला थाना क्षेत्र के हात्या डेली जोशली फाल्या गांव से मजदूरी करने कई परिवार ग्राम मोरदड़ के कल्याण टोल्स प्लांट पर आए हैं। सोमवार दोपहर करीब 1 बजे प्लांट में डस्ट गिराने का काम चल रहा था। मजदूर अपने काम में जुटे थे और उनके बच्चे वहीं आसपास खेल रहे थे। दो बच्चे – कार्तिक पिता रीतेश गरवाल और मयंक पिता पीटर गरवाल (दोनों उम्र करीब 5 साल) खेलते-खेलते डस्ट के पास चले गए और डंपर से गिरती भारी मात्रा में डस्ट के नीचे दब गए।
शाम तक गुमशुदगी बनी रही पहेली, फिर एक खिलौने ने खोला राज
बच्चों के न मिलने पर परिजन पूरे गांव में ढूंढते रहे। उन्हें लगा कि बच्चे किसी के साथ चले गए होंगे। लेकिन शाम करीब 6 बजे एक मजदूर की नजर डस्ट के ढेर के पास पड़े बच्चों के खिलौनों पर गई। दिल को चीर देने वाला शक हुआ – कहीं बच्चे इसी ढेर में तो नहीं दब गए? तुरंत जेसीबी मंगवाई गई और डस्ट हटाया गया। कुछ ही देर में बच्चों के शव नजर आए। मां-बाप बिलख उठे… माहौल शोक में डूब गया।
घटना के बाद प्लांट में पसरा सन्नाटा, पुलिस ने की जांच
सूचना मिलने पर शाहपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। घटनास्थल का निरीक्षण कर पंचनामा बनाया गया और दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया। शुरुआत में परिजनों ने पीएम से इनकार किया, लेकिन तहसीलदार और पुलिस की समझाइश के बाद वे मान गए।
बड़ा सवाल: आखिर प्लांट में बच्चों की सुरक्षा के क्या इंतजाम थे?
यह हादसा न सिर्फ दो मासूमों की जान ले गया, बल्कि कई सवाल भी खड़े कर गया। क्या प्लांट परिसर में बच्चों का आना-जाना रोकने के कोई इंतजाम थे? क्या डस्ट डालने से पहले किसी ने इलाके की जांच की? हादसा एक बार फिर यह साबित करता है कि निर्माण स्थलों पर सुरक्षा को लेकर भारी लापरवाही बरती जा रही है। अब देखना ये होगा कि प्रशासन दोषियों पर क्या कार्रवाई करता है।

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