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धृतराष्ट्र आंदोलन: आंखों पर पट्टी, सरकार को अल्टीमेटम… पांगरी बांध के किसान बोले— अब आर-पार

किसानों का आरोप- तीन साल से लंबित मुआवजा 

  • पांगरी, नागझिरी, बसाली के किसान हुए शामिल

  • बोले, आने वाले दिनों में और बड़ा आंदोलन करेंगे, दो गुना मुआवजे की कर रहे मांग

बुरहानपुर/खकनार। खकनार क्षेत्र के पांगरी बांध से प्रभावित पांगरी, नागझिरी, बसाली के किसानों, आदिवासियों ने अपने अधिकारों को लेकर एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है।
उन्होंने ने आंखों पर काली पट्टी बांध कर मुआवजा 2 गुना की मांग की है। आंदोलन की अगुवाई कर रहे डॉ रवि कुमार पटेल ने कहा पिछले 3 सालों से पांगरी बांध परियोजना से प्रभावित किसानों ने विभिन्न लोकतांत्रिक, संवैधानिक तरीकों से अपने अधिकारों के लिए सत्याग्रह किया गया, किंतु सरकारी महकमा नहीं पसीजा यह निश्चित ही दयनीय स्थिति है।
ग्रामीण आदिवासियों को भ्रमित कर बांध निर्माण कार्य शुरू किया गया। किसानों को कहा गया कि मुआवजा 2 गुना तथा सांत्वना राशि अलग से प्रदान कि जाएगी। परियोजना के शुरू होते ही यू टर्न लेते हुए सरकार ने एक गुणांक की बात कही जिसका कानून में कहीं भी उल्लेख नहीं है। भूमि अधिग्रहण कानून में ग्रामीण क्षेत्र में 2 से गुणित किया जाएगा ऐसा स्पष्ट दिया है बावजूद इसके भूमि अधिग्रहण कानून की समस्त धाराओं, उपधाराओं का उल्लघंन स्पष्ट दिखाई दे रहा है। मौलिक अधिकार, संविधान, आदिवासियों कि रक्षा के लिए विभिन्न कानूनों को धता बताकर मनमाने तरीके से कार्य किया जा रहा है। डॉ पटेल ने कहा अगर यही हाल रहा तो बड़े और गंभीर आंदोलन के लिए हम तैयार हैं। इस आंदोलन में तीनों ग्रामों के अनेकों किसानों ने लिया और न्याय के लिए प्रतिबद्धता दोहराई। मुख्य रूप से नंदू पटेल, राहुल राठौर, रामदास महाराज, माधो नाटो बद्री भाई, मामराज, मान्या, नितेश श्राफ, देवीदास, कालु, संजय चौकसे, देवा, विजय, ओमप्रकाश मंगल आदि अन्य किसान बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
क्या है पांगरी बांध परियोजना
खकनार क्षेत्र में पांगरी मध्यम सिंचाई परियोजना की 2022 में प्रशासकीय स्वीकृति हुई थी। परियोजना की लागत 145.10 करोड़ है। इससे 4400 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होगी। किसानों के अनुसार इसका काम अभी सरकारी जमीन पर चल रहा है। परियोजना में करीब 300 किसानों की 287 हेक्टेयर जमीन डूब में आई है। पंचायत ने 10 लाख प्रति हेक्टेयर मुआवजा तय किया था। किसानों ने इसके लिए लड़ाई लड़ी। एक बार नवंबर 2023 में राष्ट्रपति को पत्र लिखकर सामूहिक आत्मदाह की अनुमति मांगी थी। इसके बाद केले के खेत में शीर्षासन कर अनोखा प्रदर्शन किया गया था। किसानों की मांग है कि पेसा कानून में काम कराने के लिए ग्राम सभा की अनुमति जरूरी है। गाइड लाइन 7.50 लाख प्रति हेक्टेयर और इसका दो गुना है। साथ ही सांत्वना राशि अलग से देने का प्रावधान है जैसे भू-अधिग्रहण कानून में दिया गया है, लेकिन किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है। इसे लेकर कईं बार जिला प्रशासन, जल संसाधन विभाग के अफसरों, जल संसाधन व जिले के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट के साथ किसानों की बैठकें हो चुकी है। 4 महीने पहले 17 लाख रूपए प्रति हेक्टेयर मुआवजे पर सहमति बनी थी, लेकिन किसानों का कहना है अब तक यह मुआवजा नहीं मिला।

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