बुरहानपुर। परीक्षा अभी हुई नहीं, पढ़ाई पूरी नहीं हुई और इसी बीच छात्रावास खाली करने का फरमान आ गया। बुरहानपुर के शासकीय महाविद्यालय अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास में रहकर नर्सिंग की पढ़ाई कर रही छात्राओं के सामने अब पढ़ाई के साथ सिर छिपाने की चिंता खड़ी हो गई है। छात्राओं का आरोप है कि पांच साल की निर्धारित अवधि पूरी होने का हवाला देकर उन्हें महज तीन दिन में छात्रावास खाली करने के लिए कहा गया है। छात्राओं का सवाल है—जब परीक्षाएं ही बाकी हैं तो बीच शैक्षणिक सत्र में छात्रावास छोड़कर जाएं कहां?
इसी मुद्दे को लेकर सोमवार दोपहर बड़ी संख्या में छात्राएं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचीं। यहां उन्होंने कलेक्टर के नाम डिप्टी कलेक्टर भागीरथ वाखला को ज्ञापन सौंपा। छात्राओं ने मांग की कि कम से कम उनकी परीक्षाएं पूरी होने तक छात्रावास से नहीं निकाला जाए।
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पांच साल पूरे हुए तो मिला छात्रावास छोड़ने का नोटिस
छात्राओं के मुताबिक वे करीब पांच साल से अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास में रहकर पढ़ाई कर रही हैं। अब छात्रावास प्रशासन ने नियम का हवाला देते हुए उन्हें छात्रावास खाली करने के निर्देश दिए हैं। बताया गया कि नियम के अनुसार कोई छात्रा पांच साल से अधिक समय तक छात्रावास में नहीं रह सकती। लेकिन इसी नियम के अमल के समय को लेकर छात्राओं ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि नर्सिंग की परीक्षाएं अभी तक आयोजित नहीं हुई हैं। ऐसी स्थिति में पढ़ाई और परीक्षा पूरी होने से पहले उन्हें छात्रावास से बाहर करना उनके लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर देगा।
छात्राओं का सवाल—परीक्षा में देरी हमारी गलती नहीं, सजा हमें क्यों?
छात्राओं ने प्रशासन के सामने सबसे अहम मुद्दा परीक्षाओं में हुई देरी का उठाया। उनका कहना है कि नर्सिंग पाठ्यक्रम और परीक्षा में विलंब उनकी किसी व्यक्तिगत गलती के कारण नहीं हुआ। जब परीक्षा कार्यक्रम उनके नियंत्रण में ही नहीं है तो पांच साल की अवधि पूरी होने का आधार बनाकर परीक्षा से पहले छात्रावास से निकालना उचित नहीं है। छात्राओं का तर्क है कि यदि समय पर परीक्षाएं हो जातीं तो स्थिति अलग होती। अब जबकि परीक्षा बाकी है, अचानक छात्रावास छोड़ने को कहने से उनकी तैयारी प्रभावित होने के साथ पूरा शैक्षणिक भविष्य प्रभावित होने की आशंका है।
तीन दिन में नया ठिकाना तलाशना भी चुनौती
मामला केवल कमरा खाली करने का नहीं है। छात्राओं के मुताबिक छात्रावास में रहने वाली अधिकांश छात्राएं दूर-दराज और ग्रामीण क्षेत्रों से बुरहानपुर पढ़ने आई हैं। ऐसे में महज तीन दिन में शहर में सुरक्षित आवास या किराए का कमरा ढूंढना, उसका खर्च उठाना और साथ में परीक्षा की तैयारी करना आसान नहीं होगा। छात्राओं का कहना है कि परीक्षा से ठीक पहले आवास बदलने की चिंता उनके ऊपर अतिरिक्त मानसिक और आर्थिक दबाव डालेगी। इसलिए प्रशासन नियम लागू करने से पहले उनकी मौजूदा शैक्षणिक स्थिति पर भी विचार करे।
ज्ञापन में मांग—परीक्षा पूरी होने तक न निकालें
ABVP की ओर से दिए गए ज्ञापन में भी छात्राओं की इसी परेशानी को प्रमुखता से उठाया गया है। संगठन ने कहा कि छात्रावास में रह रही कुछ छात्राएं नर्सिंग की पढ़ाई कर रही हैं और उनकी परीक्षाएं अभी तक आयोजित नहीं हुई हैं। ऐसे में परीक्षा पूरी होने से पहले उन्हें बाहर करने पर रहने और पढ़ाई जारी रखने की गंभीर समस्या पैदा होगी। ABVP ने प्रशासन से मांग की है कि छात्राओं की परीक्षा आयोजित होकर पूरी होने तक उन्हें छात्रावास में रहने दिया जाए और उनके भविष्य को देखते हुए उचित एवं न्यायसंगत निर्णय लिया जाए।
भोजन पर भी सवाल, छात्राओं ने की शिकायत
कलेक्ट्रेट पहुंची छात्राओं ने छात्रावास की दूसरी व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायत की। ABVP के विभाग प्रमुख पृथ्वीराज महाजन ने बताया कि छात्राओं की समस्याओं को प्रशासन के सामने रखा गया है और मामले की जांच कराने की मांग की गई है। यानी छात्रावास खाली कराने के विवाद के साथ अब वहां की व्यवस्थाएं भी सवालों के घेरे में आ गई हैं। हालांकि भोजन की गुणवत्ता को लेकर छात्रावास प्रबंधन ने छात्राओं के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।
अधीक्षक बोलीं—मंत्री के निर्देश हैं, पांच साल ही रह सकती हैं छात्राएं
पूरे मामले में छात्रावास अधीक्षक सीमा राठौर ने कार्रवाई को नियमों के तहत बताया। उन्होंने कहा कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान मंत्री की ओर से निर्देश दिए गए थे कि जिन छात्राओं के छात्रावास में पांच साल पूरे हो चुके हैं, उन्हें हटाया जाए। अधीक्षक के मुताबिक छात्रावास का नियम भी यही है कि छात्राएं अधिकतम पांच साल तक यहां रह सकती हैं। इसलिए पांच साल पूरे कर चुकी छात्राओं को हटाने की कार्रवाई की जा रही है। भोजन की गुणवत्ता को लेकर छात्राओं की शिकायत पर अधीक्षक ने कहा कि छात्रावास में खाने की गुणवत्ता सही है।
नियम अपनी जगह, लेकिन परीक्षा से पहले कार्रवाई पर उठ रहा सवाल
इस पूरे विवाद में नियम को लेकर स्थिति स्पष्ट बताई जा रही है—छात्रावास में रहने की अधिकतम अवधि पांच साल है। लेकिन असली टकराव नियम से ज्यादा उसके अमल के समय को लेकर है। छात्राएं नियम खत्म करने की बजाय परीक्षा पूरी होने तक मोहलत मांग रही हैं। एक तरफ छात्रावास प्रशासन पांच साल की समयसीमा और मंत्री के निर्देश का हवाला दे रहा है, दूसरी तरफ छात्राओं का कहना है कि उनकी परीक्षा तक नहीं हुई। ऐसे में प्रशासन के सामने अब यह तय करने की चुनौती है कि नियम तत्काल लागू किया जाए या अधूरी परीक्षा को देखते हुए छात्राओं को सीमित अवधि की राहत दी जाए। फिलहाल छात्राओं ने अपनी बात कलेक्ट्रेट तक पहुंचा दी है। अब निगाह प्रशासन के निर्णय पर है कि तीन दिन में छात्रावास खाली कराने की कार्रवाई जारी रहती है या परीक्षा पूरी होने तक छात्राओं को छत की राहत मिलती है।



