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पांगरी बांध प्रभावितों का गुस्सा फूटा : जन्माष्टमी पर फोड़ी “अन्याय की हांडी”

सैकड़ों किसान बोले – मुआवजा दो गुना चाहिए, अन्याय और अत्याचार नहीं सहेंगे

On: August 18, 2025 7:42 PM
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“पांगरी बांध किसान आंदोलन बुरहानपुर – अन्याय हांडी फोड़ आंदोलन”

खकनार। पांगरी मध्यम सिंचाई परियोजना के डूब प्रभावित किसानों ने सरकार की अनदेखी के खिलाफ रविवार को अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। जहां जिलेभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर दही हांडी फोड़कर पर्व मनाया जा रहा था, वहीं खकनार क्षेत्र में किसानों ने “अन्याय हांडी फोड़ आंदोलन” कर अपनी पीड़ा और नाराजगी जताई।

कुछ दिनों पहले किसानों ने आंखों पर काली पट्टी बांधकर मौन प्रदर्शन किया था। अब जन्माष्टमी पर उन्होंने अन्याय और अत्याचार की हांडी फोड़कर सरकार से सवाल पूछे।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे डॉ. रवि कुमार पटेल ने कहा – “भूमि अधिग्रहण में किसानों को उचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा। सरकार ने 17 लाख प्रति हेक्टेयर देने की सहमति दी थी, लेकिन आज तक राशि नहीं मिली। यदि हमारी मांगें पूरी नहीं हुईं तो यह आंदोलन और उग्र होगा।”

किसानों की भीड़ और गूंजे नारे

गांव से लेकर खेत तक किसानों का हुजूम आंदोलन में उमड़ पड़ा। पूरे कार्यक्रम के दौरान नारे गूंजते रहे –

  • “मुआवजा दो गुना चाहिए”
  • “अन्याय नहीं सहेंगे”
  • “अत्याचार नहीं सहेंगे”

शामिल रहे ये किसान नेता

अन्याय हांडी फोड़ कार्यक्रम में नंदू पटेल, राहुल राठौर, मान्य भिलावेकर, रामदास महाराज, माधो नाटो, बद्री वास्कले, संजय चौकसे, विजय चौकसे समेत बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण शामिल हुए।

पांगरी बांध परियोजना की हकीकत

  • 2022 में मिली प्रशासकीय स्वीकृति
  • कुल लागत : ₹145.10 करोड़
  • सिंचाई लाभ : 4400 हेक्टेयर क्षेत्र
  • प्रभावित : लगभग 300 किसान, 287 हेक्टेयर जमीन डूब क्षेत्र में

किसानों का कहना है कि पेसा कानून के अनुसार ग्राम सभा की अनुमति जरूरी है। साथ ही भूमि अधिग्रहण कानून के तहत गाइडलाइन के हिसाब से 7.50 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर का दो गुना मुआवजा और सांत्वना राशि मिलना चाहिए, लेकिन अब तक उन्हें कुछ नहीं मिला।

क्यों भड़के किसान?

चार महीने पहले सरकार और किसानों के बीच ₹17 लाख प्रति हेक्टेयर मुआवजे पर सहमति बनी थी। लेकिन भुगतान न होने से किसानों में भारी आक्रोश है। किसानों का आरोप है कि अभी तक बांध का काम केवल सरकारी जमीन पर चल रहा है, जबकि उनकी उपजाऊ जमीन डूब क्षेत्र में आ चुकी है।

संदेश साफ : “अन्याय नहीं सहेंगे”

किसानों ने जन्माष्टमी जैसे पर्व पर आंदोलन करके साफ कर दिया कि अब वे केवल आश्वासन से संतुष्ट नहीं होंगे। उनका कहना है कि “सरकार दो गुना मुआवजा दे, अन्यथा संघर्ष और तेज़ होगा।”

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