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चापोरा में जाति प्रमाण पत्र का बड़ा फर्जीवाड़ा!: पिता–पुत्र के नाम दो प्रमाण पत्र, सील–हस्ताक्षर में गड़बड़ी से हड़कंप

— जांच के दायरे में आए चापोरा ग्राम पंचायत के सरपंच, उप सरपंच, ग्रामीण बोले- प्रमाण पत्र फर्जी है या हस्ताक्षर जांच हो

शाहपुर। जिले की ग्राम पंचायतों में निगरानी व्यवस्था की कमजोरी एक बार फिर सामने आई है। ग्राम पंचायत चापोरा में जाति प्रमाण पत्र जारी करने में गंभीर अनियमितता का मामला उजागर हुआ है। यहां पिता–पुत्र के नाम पर दो अलग-अलग जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रमाण पत्र जारी किए गए, लेकिन सील, पदनाम और हस्ताक्षर इतना विरोधाभासी हैं कि ग्रामीणों ने इसे सीधे फर्जीवाड़ा करार दिया है। ग्रामीणों की मांग है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

एक ही तारीख, दो प्रमाण पत्र— सील–हस्ताक्षर अलग-अलग, पदनाम उलट-पुलट

6 नवंबर को जारी दोनों जाति प्रमाण पत्रों में सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है कि—पहला प्रमाण पत्र (राजेश शामलाल) जारीकर्ता: उपसरपंच रविंद्र महाजन, सील: उपसरपंच, हस्ताक्षर: उपसरपंच। दूसरा प्रमाण पत्र (शामलाल बाबूलाल) जारीकर्ता: सरपंच के नाम से, हस्ताक्षर: उपसरपंच रविंद्र महाजन, सील: सरपंच की, “उप” शब्द बाद में पेन से लिखा हुआ। यही विरोधाभास ग्रामीणों को फर्जीवाड़े की ओर संकेत करता दिखाई दे रहा है।

लिपिक भी अनजान—तो प्रमाण पत्र जारी कौन कर रहा है?

ग्राम पंचायत के लिपिक कैलाश नेरकर ने भी साफ कहा कि उन्हें इन प्रमाण पत्रों की जानकारी ही नहीं है। इससे ग्रामीणों के मन में कई सवाल उभर आए क्या प्रमाण पत्र बगैर रिकॉर्ड जारी हो रहे हैं? क्या सील और हस्ताक्षर का दुरुपयोग किया गया? क्या सरपंच और उपसरपंच अपनी सीमा से बाहर जाकर दस्तावेज जारी कर रहे हैं? ग्रामीणों ने कहा कि यदि लिपिक अनभिज्ञ है, तो पूरी प्रक्रिया ही संदेहास्पद हो जाती है।

ग्रामीण बोले—फर्जी प्रमाण पत्र है या फर्जी हस्ताक्षर?

ग्रामीणों का कहना है कि दोनों प्रमाण पत्रों पर एक ही व्यक्ति के हस्ताक्षर, लेकिन पदनाम कभी “सरपंच” तो कभी “उपसरपंच”, और सील भी मेल नहीं खा रही… यह साफ दर्शाता है कि या तो— प्रमाण पत्र फर्जी हैं, या हस्ताक्षर करने वाला व्यक्ति पद का दुरुपयोग कर रहा है। गांव में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि—उपसरपंच के हस्ताक्षर के नीचे आखिर लिख क्या हुआ है- सरपंच या उपसरपंच?

जांच की मांग तेज—पद के दुरुपयोग का भी आरोप

ग्रामीणों ने जनपद सीईओ, SDM और जिला प्रशासन से मांग की है कि हस्ताक्षर और सील का मिलान कराया जाए, दोनों दस्तावेजों की वैधता की जांच हो, और यदि अनियमितता पाई जाए तो सरपंच–उपसरपंच के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत पदाधिकारी न दस्तावेज पढ़ते हैं न देखरेख करते हैं, जिससे इस तरह के फर्जीवाड़े के लिए रास्ता खुल जाता है।

पंचायत व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

यह मामला एक बार फिर दर्शाता है कि जिले की अनेक पंचायतों में न रिकॉर्ड की पारदर्शिता, न दस्तावेजों का सत्यापन, और न ही प्रशासनिक मॉनिटरिंग का पालन हो रहा है। बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और मनमानी रोकने के लिए ग्रामीणों ने इस प्रकरण को खुलकर उजागर किया है ताकि जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो सके।

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