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यह भारत भूमि है- किस रज से बनते कर्मवीर… विवाह संस्कार भोग नहीं संयम और साधना का पथ है

- विवाह के बाद साधना: नर्मदा मैया की परिक्रमा पर निकले शिवम–रोशनी

– विनय दीक्षित (प्रज्ञा प्रवाह संयोजक- मध्य क्षेत्र व पश्चिम क्षेत्र)

दुनियां के कई देशों बांग्लादेश, नेपाल आदि में जेन जी के चर्चे, उपद्रव स्वतंत्रता की लड़ाई, अधिकारों के लिए संघर्ष  आदि की चर्चायें सुनते सुनते मन को ऐसा लगता था कि भारत का युवा ऐसा करने लगा तो क्या होगा..? समाज के अन्यान्य प्रबुद्ध लोगों की चर्चाओं में भी ये बात चल पड़ी थी कि भारत की Gen Z भी विद्रोह के तरफ़ बढ़ रही है.. मन चिंतित भी था कि भारत में ऐसा हुआ.तो…! पर मन ने कभी स्वीकार ही नहीं किया कि भारत का युवा ऐसा कैसे कर सकता है…? भारत तो त्याग , समर्पण और साधना का देश है..यहाँ अधिकारों के लिए संघर्ष करने वालों की मान्यता के स्थान पर कर्तव्य बोध पर जीने वालों की मान्यता अधिक है.. यह भारत भूमि है ही ऐसी .. यहाँ राम, कृष्ण, ध्रुव, प्रह्लाद, गौतम बुद्ध, महावीर स्वामी, भगत सिंह, आजाद, बंकिम चंद्र चटर्जी, डॉ हेडगेवार की धरती है.. यहाँ तो लोगों ने अपनी मातृभूमि की सेवा में जीवन का सर्वस्व समर्पण किया है.. हमारी प्रेरणा कर्तव्य है..अधिकार नहीं..!

मध्यप्रदेश के देवास जिले के खातेगांव का एक युवा शिवम यादव.. पिताजी शासकीय शिक्षक माँ एक कुशल गृहणी.. बेटा घर और नगर का होनहार जिसने अच्छी पढ़ाई की…  अकेला बेटा… माँ पिताजी की देखभाल के कारण बाहर कहीं नौकरी नहीं की… माँ- बाबूजी की सहमती से विवाह तय हुआ … बड़े ही धूमधाम से विवाह संपन्न हुआ..सारे मित्र रिश्तेदार सब प्रसन्नचित्त थे और वो दोनों पति पत्नी भी अत्यंत आनंदित थे… संवाद में उन्होंने बताया कि विवाह के दस दिन बाद हम दोनों ने माँ नर्मदा की पैदल परिक्रमा का संकल्प लिया है.. यह सुनकर मन स्तब्ध रह गया …माँ नर्मदा की परिक्रमा… 2600-3500 किमी की दूरी..वो भी पैदल.. मौसम की ठंडक और रास्ता भी दुर्गम … कई संत / महात्मा इस परिक्रमा को 3 साल, 3 महीने 13 दिन में  पूर्ण करते है… ये सब सोचते सोचते मन ठिठक गया कि इतने कष्ट सहकर ये यात्रा क्यों कर रहे होंगे.. लाखों रुपए खर्च करके किसी देश मे हनीमून पर जा सकते थे.. खूब मौज मस्ती करते सुंदर तस्वीरें वायरल होती युवाओं में कौतूहल होता अच्छा लगता ..घर के अकेले बेटे थे कोई कष्ट नहीं था पर इन्होंने तो कंटकाकीर्ण मार्ग चुना एक तरफ़ दुनियाँ के अन्य देशों के युवा अपने अधिकारों के लिए किसी के अधिकार छीनने के लिए तैयार खड़ा है वहीं अपने भारत के युवा नदी की पैदल परिक्रमा ..क्या मिलेगा इससे..?

धर्म के कार्य से क्या मिलेगा..? क्या नहीं मिलेगा ये चिंतन भारत का नहीं है पर बहुत कुछ मिलेगा … सैकड़ों दिनों तक नर्मदा मैया का सानिध्य … दुनियाँ में केवल एक ही नदी है नर्मदा जिसकी परिक्रमा की जाती है. हमारा विश्वास है नर्मदा मैया के दर्शन मात्र से कल्याण होता है … जीवन में आत्मविश्वास,सात्विकता.. संतुष्टि.. किसी को जीतने की जगह अपने मन पर विजय प्राप्त करना और पता नहीं क्या क्या मिलेगा..? जिसकी कल्पना नहीं केवल अनुभूति ही की जा सकती है..इसी कामना से सुदूर जंगलों में अत्यंत अभाव में रहने वाले से लेकर बड़े बड़े धनाढ्य, ज्ञानी, ध्यानी, साधु, संत, महात्मा लाखों की संख्या में नर्मदा परिक्रमा करते है..भारत भोग की नहीं त्याग की परंपरा का देश है .. माता भूमि पुत्रोंअहम पृथिव्य: को जीवन में धारण करने वाला अपना देश है.. वंदेमातरम्  मंत्र को संकल्प मानकर साधना करने वाला देश है..जिसकी साधना से अंग्रेजों के बंगभंग का षड्यंत्र भी विफल हो जाता है..वंदेमातरम् भारत के जन जन की प्रेरणा है… आज भी भारत का युवा अपनी मातृभूमि के सर्वस्व न्योछावर करने को अपना सौभाग्य मानता है … यही है भारत का चिंतन..।

ये कहानी केवल शिवम् की नहीं है उससे कहीं अधिक शिवम् के साथ पाणिग्रहण करने वाली बेटी रोशनी की भी है…जिसने घर की सुख सुविधा का त्याग कर महीनों कष्ट सहकर पदयात्रा का संकल्प स्वीकार किया… कोई तथाकथित बुद्धिजीवी इस पर महिला स्वतंत्रता और अधिकार के नाम पर मिथ्या भ्रम फैला सकता है पर ये सीता के चरित्र को हृदयंगम कर जीने वाली बेटियों का भारत है.. और यही भारतवर्ष में स्त्री चरित्र भी है ।

जिस भारत की युवा पीढ़ी शिवम् -रोशनी जैसी हो तो फिर कैसी चिंता .. ? और कैसा भय … ? सारे संशय मिट गए दुनियाँ के देशों में कितने भी तख्त पलट हों सकते है पर भारत का संस्कृतिक तख्त बहुत मजबूती से खड़ा है जो अभी तक न डिगा है न कभी डिगेगा..।बस प्रभु से एक ही कामना है की इनकी नर्मदा परिक्रमा सकुशल पूर्ण हो मुझे विश्वास है भारत की भावी पीढ़ी को परिक्रमा में नर्मदा मैया दर्शन अवश्य देंगी.. यात्रा शुभ हो.. सफल हो.. सार्थक हो..  नर्मदा मैया की जय। वंदेमातरम्।

।। भारत माता की जय ।।

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