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अनियमितताओं पर कार्रवाई- आयुष मंत्री ने बुरहानपुर आयुर्वेद महाविद्यालय के प्राचार्य को किया निलंबित, जांच जारी

– विधानसभा में विधायक एवं पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस ने इस मुद्दे को उठाते हुए आयुष मंत्री इंदरसिंह परमार का ध्यानाकर्षण कराया बुरहानपुर। मध्यप्रदेश विधानसभा में बुरहानपुर स्थित पंडित शिवनाथ शास्त्री शासकीय स्वशासी आयुर्वेद महाविद्यालय की गंभीर अनियमितताओं का मामला गरमाया। विधायक एवं पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाते हुए […]

– विधानसभा में विधायक एवं पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस ने इस मुद्दे को उठाते हुए आयुष मंत्री इंदरसिंह परमार का ध्यानाकर्षण कराया
बुरहानपुर। मध्यप्रदेश विधानसभा में बुरहानपुर स्थित पंडित शिवनाथ शास्त्री शासकीय स्वशासी आयुर्वेद महाविद्यालय की गंभीर अनियमितताओं का मामला गरमाया। विधायक एवं पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाते हुए आयुष मंत्री इंदरसिंह परमार का ध्यानाकर्षण कराया।
मंत्री परमार ने इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. रश्मि रेखा मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। साथ ही, गंभीर अनियमितताओं की जांच और महाविद्यालय की व्यवस्थाओं में सुधार का आश्वासन दिया। वर्तमान में उज्जैन स्थित शासकीय धन्वंतरि आयुर्वेद महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. जे.पी. चौरसिया को बुरहानपुर महाविद्यालय का अस्थायी प्रभार सौंपा गया है।
अनियमितताओं के मुख्य पहलू
विधायक अर्चना चिटनिस ने सदन में कहा कि यह महाविद्यालय लगभग 75 वर्षों से राष्ट्र का एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक केंद्र रहा है, जहां से अध्ययनरत छात्र देशभर में सेवाएं दे रहे हैं। हालांकि, 2011-2018 तक डॉ. मिश्रा के प्रभार में महाविद्यालय की मान्यता लापरवाही के चलते रद्द हो गई थी। इसके बाद, 10 वर्षों की मेहनत से यह मान्यता बहाल कराई गई।
हाल ही में बुरहानपुर कलेक्टर की रिपोर्ट में महाविद्यालय में 22 गंभीर अनियमितताओं की पहचान की गई। जिनमें वार्षिक ऑडिट न होने से वित्तीय गड़बड़ियां। छात्रों को प्रायोगिक ज्ञान और आवश्यक सुविधाओं का अभाव। मरीजों को चिकित्सा सेवाओं में लापरवाही। कमियों को समयबद्ध तरीके से न सुधारना। जैसे गंभीर मामले सामने आये।
विधानसभा में उठाया गया मामला
श्रीमती चिटनिस ने विधानसभा में कहा, “महाविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान की छवि एक प्राचार्य की लापरवाही के कारण धूमिल हो रही है। आयुर्वेद जैसे प्राचीन चिकित्सा पद्धति को संरक्षित और सुदृढ़ करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।” आयुष मंत्री ने सदन में संबंधित प्राचार्य को निलंबित करने की घोषणा करते हुए विभागीय जांच के निर्देश दिए।

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