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महापर्व छठ- ताप्ती के राजघाट पर सूर्य देवता को दिया अर्घ्य, पूजा अर्चना की

बुरहानपुर। जिले में इस बार छठ पर्व धूमधाम से मनाया गया, जिसमें बड़ी संख्या में उत्तर भारतीय परिवार एकजुट होकर इस धार्मिक पर्व का आयोजन ताप्ती नदी के राजघाट पर कर रहे थे। कार्तिक शुक्ल पक्ष की उत्तर आषाढ़ तिथि को मनाए जाने वाले इस महापर्व में विशेष रूप से सूर्य देवता और

On: November 8, 2024 10:51 AM
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बुरहानपुर। जिले में इस बार छठ पर्व धूमधाम से मनाया गया, जिसमें बड़ी संख्या में उत्तर भारतीय परिवार एकजुट होकर इस धार्मिक पर्व का आयोजन ताप्ती नदी के राजघाट पर कर रहे थे। कार्तिक शुक्ल पक्ष की उत्तर आषाढ़ तिथि को मनाए जाने वाले इस महापर्व में विशेष रूप से सूर्य देवता और छठी माता की पूजा की जाती है।
शुक्रवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने से हुआ समापन
छठ पर्व का समापन शुक्रवार सुबह 5 बजे ताप्ती नदी के राजघाट पर उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ हुआ। इस दौरान श्रद्धालुओं ने सूर्य देवता से आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पूजा अर्चना की और अपने परिवार की सुख-समृद्धि और संतान सुख की कामना की।
छठ पर्व के दौरान, श्रद्धालुओं ने ताप्ती नदी में स्नान करने के बाद सूर्य देवता को अर्घ्य देकर उनकी पूजा की। छठ देवी का एक नाम षष्ठी भी है, जिन्हें प्रकृति का छठा अंश माना जाता है। वे बच्चों की रक्षक और आयु प्रदान करने वाली देवी मानी जाती हैं। इस व्रत को पूर्ण करने से संतान की रक्षा होती है और जीवन में समृद्धि आती है।
गुरुवार को डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर हुई पूजा की शुरुआत
आयोजन समिति के अशोक सिंघानिया ने बताया कि छठ पर्व की शुरुआत गुरुवार शाम से हुई, जब ताप्ती नदी के राजघाट पर महिलाओं ने डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा की। इस अवसर पर उत्तर भारतीय समुदाय के लोग पारंपरिक कपड़े पहनकर घाट पर एकत्रित हुए। यहां गन्ने का मंडप बनाकर समाजजनों ने छठी माता की पूजा की और फिर डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। इस दिन विशेष रूप से महिलाएं व्रत करती हैं और अपने परिवार के लिए सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। गुरुवार शाम को ताप्ती नदी के राजघाट पर एक सजीव माहौल था, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकजुट हुए और एक साथ छठी माता की पूजा की।
समाप्ति पर उल्लास और समृद्धि की कामना
श्री सिंघानिया ने बताया पर्व के समापन पर सुबह के अर्घ्य के साथ ही श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं। इस दौरान एकजुटता और सामूहिकता का जो माहौल बना, वह बुरहानपुर के सामाजिक ताने-बाने को भी मजबूत करता है। छठ पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और परंपराओं को जीवित रखने का एक अहम अवसर है।

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