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बिना पानी का स्वीमिंग पुल! चिटनिस के दबाव में आयुक्त, इंजीनियर और ठेकेदार फंसे

“जनता का पैसा लूटा नहीं जाएगा, दोषियों को भुगतना होगा” – चिटनिस का सख्त संदेश

On: August 5, 2025 8:45 PM
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बुरहानपुर स्वीमिंग पुल घोटाले पर कार्रवाई की घोषणा करते विधायक अर्चना चिटनिस

बुरहानपुर। शहर के रेणुका उद्यान के पास करीब डेढ़ करोड़ रुपए की लागत से बना स्वीमिंग पुल न तो कभी इस्तेमाल हुआ, न ही एक बाल्टी पानी उसमें ठहर पाया। लेकिन अब इस जनधन के दुरुपयोग पर बड़ी कार्रवाई हुई है – और इसके पीछे हैं विधायक व पूर्व कैबिनेट मंत्री अर्चना चिटनिस जिनके लगातार प्रयासों और विधानसभा में उठाए गए मुद्दों के चलते 31 जुलाई 2025 को शासन ने दोषियों के खिलाफ सख्त आदेश जारी कर दिए।
दरअसल यह स्वीमिंग पुल वर्ष 2011 में स्वीकृत हुआ था, 2015-16 में बीआरजीएफ योजना और शिक्षा विभाग की निधि से बना, लेकिन आज तक एक दिन भी उपयोग नहीं हुआ। विधायक अर्चना चिटनिस ने पहले ध्यानाकर्षण और फिर तारांकित प्रश्न के ज़रिए विधानसभा में यह मुद्दा उठाया। इसके बाद कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विधानसभा में जवाब देते हुए स्वीकार किया कि निर्माण में भारी गड़बड़ी हुई है।
कौन-कौन फंसे कार्रवाई के दायरे में?
कार्रवाई के दायरे में तत्कालीन नगर निगम आयुक्त सुरेश कुमार रैवाल, भगवानदास भुमरकर। इंजीनियर्स सगीर अहमद, अनिल गंगराड़े, अशोक पाटिल। ठेकेदार भूपेंद्र चौहान जिन पर एफआईआर दर्ज करने, ब्लैकलिस्ट करने और मरम्मत खर्च की वसूली के आदेश जारी किए गए हैं।
घोटाले के तथ्य जो चौंकाते हैं
• निर्माण स्थल ऐसी जगह चुना गया जहां पानी का कोई स्रोत ही नहीं था।
• पुल की टंकी में पानी टिकता ही नहीं, यानी भरना ही संभव नहीं।
• पूरे निर्माण पर 1.5 करोड़ खर्च, लेकिन एक दिन भी उपयोग नहीं हुआ।
• जनता के पैसों से बना ऐसा ढांचा, जो सिर्फ दीवारों और अफसरों की लापरवाही का प्रतीक बन गया।
अर्चना चिटनिस ने क्या कहा?
विधायक अर्चना चिटनिस ने कहा जिस स्थान पर पानी रुक ही नहीं सकता, वहां स्वीमिंग पुल बनाने का क्या औचित्य था? यह लापरवाही नहीं, जनधन के साथ धोखा है। ऐसे मामलों में बख्शा नहीं जाएगा। चिटनिस ने सख्त शब्दों में कहा कि शासन की योजनाओं और जनता की उम्मीदों को यूं बर्बाद करने वालों पर भविष्य में और भी सख्त कार्रवाई होगी।
यह सिर्फ पुल नहीं, एक प्रतीक है सिस्टम की लापरवाही का
विधायक चिटनिस ने अपनी कार्यशैली से शासन को जवाबदेह और प्रशासन को चौकस कर दिया है। यह कार्रवाई उन सभी निर्माण एजेंसियों और अफसरों के लिए खुली चेतावनी है जो सरकारी पैसों को निजी ठेके में तब्दील करना चाहते हैं।

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