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6 साल से खड़ा जर्जर स्कूल भवन, कलेक्टर के आदेश भी बेअसर: डर के साए में पढ़ने को मजबूर बाकड़ी के मासूम

नेपानगर क्षेत्र के कनिष्ठ प्राथमिक शाला का अतिरिक्त भवन नहीं तोड़ा गया; शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा

खबर की मुख्य बातें

  • जिला मुख्यालय से 50 किमी दूर ग्राम बाकड़ी का मामला
  • 5–6 साल से जर्जर हालत में खड़ा स्कूल का अतिरिक्त भवन
  • कलेक्टर को शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
  • बच्चों को दूसरे भवन में बैठकर पढ़ाई करने की मजबूरी
  • ग्रामीणों और जयस कार्यकर्ता सुरेश जमरा ने उठाई सुरक्षा की चिंता
  • प्रशासन से जल्द नया स्कूल भवन बनाने की मांग

बुरहानपुर। शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले स्कूल में जब बच्चे डर के साए में पढ़ाई करने को मजबूर हों, तो यह व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। जिले के दूरस्थ ग्राम बाकड़ी में ऐसा ही एक चिंताजनक मामला सामने आया है। यहां स्थित कनिष्ठ प्राथमिक शाला बाकड़ी का अतिरिक्त भवन पिछले 5 से 6 वर्षों से जर्जर हालत में खड़ा है। हालत यह है कि भवन कभी भी भरभराकर गिर सकता है, लेकिन कलेक्टर के आदेश के बावजूद आज तक इसे नहीं तोड़ा गया।

Sadaiv News
जर्जर अवस्था में बाकड़ी का स्कूल भवन

सबसे चिंता की बात यह है कि यह गांव नेपानगर थाना क्षेत्र में आता है और जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित है। ऐसे में प्रशासन की अनदेखी यहां के बच्चों की सुरक्षा पर भारी पड़ सकती है। मजबूरी में बच्चों को दूसरे भवन में बैठाकर पढ़ाई कराई जा रही है, जिससे पढ़ाई की व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।

हादसे का इंतजार कर रहा प्रशासन?

ग्रामीणों का कहना है कि जर्जर भवन कई सालों से खड़ा है और उसकी दीवारें तथा छत बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। बरसात के मौसम में इसकी स्थिति और अधिक खतरनाक हो जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इसे नहीं हटाया गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। गांव के लोगों का आरोप है कि प्रशासन को कई बार इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। इससे ग्रामीणों में नाराजगी भी बढ़ती जा रही है।

कलेक्टर को भी दी जा चुकी है शिकायत

कुछ महीने पहले जयस कार्यकर्ता सुरेश जमरा ने ग्रामीणों के साथ मिलकर इस जर्जर भवन की शिकायत कलेक्टर कार्यालय में की थी। शिकायत में स्पष्ट रूप से बताया गया था कि भवन खतरनाक स्थिति में है और बच्चों की सुरक्षा के लिए इसे तुरंत हटाना जरूरी है। लेकिन शिकायत के बाद भी अब तक न तो भवन तोड़ा गया और न ही किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई की गई। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत के बाद भी यदि कार्रवाई नहीं होती तो यह प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर उदाहरण है।

ग्राम पंचायत भी नहीं कर सकी समाधान

ग्रामीणों ने इस समस्या को ग्राम पंचायत के सामने भी रखा था। उम्मीद थी कि पंचायत स्तर पर कोई पहल होगी, लेकिन वहां से भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इससे गांव के लोगों में निराशा और आक्रोश दोनों बढ़ रहे हैं।

बच्चों की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवाल

गांव के अभिभावकों का कहना है कि स्कूल परिसर में जर्जर भवन का खड़ा रहना बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। छोटे-छोटे मासूम बच्चे रोजाना इसी परिसर में पढ़ाई करने आते हैं और खेलते भी हैं। ऐसे में किसी भी समय हादसा होने की आशंका बनी रहती है।

नया स्कूल भवन बनाने की मांग

जयस कार्यकर्ता सुरेश जमरा ने कहा कि यदि जर्जर भवन को समय रहते तोड़ दिया जाए तो बच्चों को सुरक्षित वातावरण में बैठाकर पढ़ाई कराई जा सकेगी। उन्होंने शासन और प्रशासन से मांग की है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द जर्जर भवन को हटाया जाए और स्कूल के लिए नया भवन बनाया जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे इस मुद्दे को लेकर बड़े स्तर पर आंदोलन भी कर सकते हैं। गांव के लोगों की उम्मीद अब प्रशासन से है कि बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जल्द समाधान निकाला जाएगा।

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