बुरहानपुर। दीपावली के पड़वे पर बुधवार को शाहपुर की अमरावती नदी किनारे एक बार फिर परंपरा और रोमांच का संगम देखने को मिला। मौका था पाड़ों की टक्कर का जहां हजारों लोग सिर्फ इन ताकतवर पाड़ों के मुकाबले देखने पहुंचे। कोई छतों पर चढ़ गया, कोई ट्रैक्टर-ट्रॉली पर, तो कई लोग नदी पार करके टक्कर के मैदान तक पहुंच गए। अंदाजा लगाया जा रहा है कि करीब 50 हजार से अधिक दर्शक इस आयोजन में शामिल हुए।
दरअसल दीपावली के दूसरे दिन (पड़वा) शाहपुर में हर साल पारंपरिक मेला आयोजित होता है, जिसमें पाड़ों की टक्कर सबसे बड़ा आकर्षण होती है। इस साल भी अमरावती नदी तट पर दोपहर 3 बजे से मुकाबले शुरू हुए, जिसमें 50 से ज्यादा पाड़ों के जोड़ों के बीच रोमांचक टक्करें हुईं। हर जोड़ी के बीच मुकाबला देखने के लिए लोग जयकारे लगाते नजर आए। पूरा मैदान लोगों की भीड़ से खचाखच भरा रहा।
सांसद, विधायक समेत कई जनप्रतिनिधि पहुंचे मैदान
इस बार के आयोजन में भी राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों की मौजूदगी रही। सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल, विधायक अर्चना चिटनिस, पूर्व विधायक ठाकुर सुरेंद्र सिंह शेरा, कांग्रेस अध्यक्ष रिंकू टाक, भाजपा नेता गजेंद्र पाटिल, अजय रघुवंशी सहित कई जनप्रतिनिधि कार्यक्रम में पहुंचे। इन नेताओं ने आयोजन समिति को बधाई दी और परंपरा को “ग्रामीण संस्कृति का उत्सव” बताया।
नदी पार कर पहुंचे दर्शक, छतों से भी देखा मुकाबला
पाड़ों की टक्कर देखने का क्रेज ऐसा था कि लोग किसी भी तरह मैदान तक पहुंचना चाहते थे। शाहपुर से लगभग दो किमी दूर तक नदी पार करके भीड़ मैदान में पहुंची। नदी के दोनों ओर हजारों की संख्या में दर्शक खड़े थे। कई परिवार घरों की छतों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर बैठकर मुकाबले देख रहे थे। हालांकि, इतनी बड़ी भीड़ के बावजूद प्रशासन और पुलिस ने व्यवस्था संभाल रखी।
विजेता पाड़ों के मालिकों का सम्मान, पुलिस ने लगाई सुरक्षा जालियां
हर मुकाबले में जीतने वाले पाड़े के मालिकों को पुरस्कार और सम्मान दिया गया। भीड़ की सुरक्षा के लिए पुलिस ने इस बार लोहे की जालियों से मैदान को चारों ओर से घेरा, जिससे पाड़े भीड़ की ओर न दौड़ सकें। थाना प्रभारी ने बताया कि इस बार आयोजन शांति और अनुशासन के साथ संपन्न हुआ। केवल कुछ क्षणिक भगदड़ की स्थिति बनी, पर कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।
प्रतिबंध के बावजूद कायम है परंपरा
दिलचस्प बात यह है कि जिले में पाड़ों की टक्कर पर आधिकारिक प्रतिबंध है। पिछले साल पुलिस ने आयोजन के बाद 100 से अधिक लोगों पर एफआईआर दर्ज की थी। इसके बावजूद इस साल भी आयोजन पूरे जोश के साथ हुआ। पुलिस ने पहले से ही चेतावनी दी थी कि पाड़ों का परिवहन न हो, लेकिन परंपरा निभाने वाले ग्रामीणों ने कहा यह सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि हमारी विरासत है। जब तक शाहपुर रहेगा, पाड़ों की टक्कर होती रहेगी।