बुरहानपुर। लालबाग रोड स्थित हकीमी अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान 23 वर्षीय नवविवाहिता वैष्णवी चौहान की मौत ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। चार महीने की जांच, पोस्टमार्टम पैनल, एफएसएल रिपोर्ट और कलेक्टर जांच समिति की पड़ताल के बाद आखिरकार पुलिस ने अस्पताल संचालक डॉ. मुफज्जल बोहरा और स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. रेहाना बोहरा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) में केस दर्ज कर लिया है। थाना लालबाग में रविवार रात अपराध दर्ज होते ही शहर में यह मामला फिर सुर्खियों में आ गया।
दरअसल जैनाबाद निवासी वैष्णवी चौहान का पिछले छह महीने से इलाज चल रहा था। बच्चेदानी में समस्या के कारण उसके तीन ऑपरेशन पहले ही हो चुके थे। 11 नवंबर 2025 को चौथा ऑपरेशन तय था। सुबह 8 बजे अस्पताल में भर्ती, दोपहर 2 बजे ऑपरेशन शुरू, शाम 6 बजे तक कोई अपडेट नहीं। परिजनों का आरोप है कि अचानक बताया गया—ऑपरेशन के दौरान हालत बिगड़ी और मौत हो गई। परिवार का दावा है कि एनेस्थीसिया की अधिक मात्रा दी गई। हालत बिगड़ने पर अस्पताल में न तो पर्याप्त ऑक्सीजन थी, न वेंटिलेटर। बाद में बाहर से इंतजाम किए गए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
अस्पताल में हंगामा, लाइसेंस भी निरस्त
मौत की खबर मिलते ही परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा और तोड़फोड़ की। पुलिस ने मौके से डीवीआर और इलाज से जुड़ी फाइलें जब्त कीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर के आदेश पर जांच समिति गठित की गई। स्वास्थ्य विभाग ने जांच के बाद अस्पताल का लाइसेंस और पंजीयन निरस्त कर दिया। हालांकि अस्पताल प्रबंधन लगातार लापरवाही से इनकार करता रहा।
मर्ग से FIR तक: 285 पन्नों की जांच डायरी
थाना लालबाग में मर्ग क्रमांक 36/25 धारा 194 बीएनएसएस के तहत जांच शुरू हुई। नवविवाहिता होने से नायब तहसीलदार ने शव पंचायतनामा तैयार किया। महिला डॉक्टरों सहित पैनल से पोस्टमार्टम। जब्त नमूनों की एफएसएल जांच। क्यूरी रिपोर्ट पर विशेषज्ञों से चर्चा। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की रिपोर्ट। कलेक्टर जांच समिति की विस्तृत रिपोर्ट। इन सभी तथ्यों के आधार पर नगर पुलिस अधीक्षक कार्यालय से अपराध दर्ज करने के निर्देश जारी हुए।
किस धारा में केस?
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) — लापरवाही से मृत्यु कारित करना। अगर जांच में चिकित्सकीय लापरवाही साबित होती है, तो दोषियों को सजा का प्रावधान है।
पोस्टमार्टम और एफएसएल जांच
- नवविवाहिता होने के कारण शव पंचायतनामा नायब तहसीलदार द्वारा तैयार किया गया।
- डॉक्टरों के पैनल (महिला चिकित्सकों सहित) से पोस्टमार्टम कराया गया।
- शॉर्ट पीएम रिपोर्ट प्राप्त की गई।
- जप्त नमूनों को एफएसएल शाखा, मेडिकल कॉलेज खंडवा भेजा गया।
- 31 जनवरी 2026 को एफएसएल रिपोर्ट प्राप्त हुई।
- 20 फरवरी 2026 को क्यूरी रिपोर्ट प्राप्त कर पैनल डॉक्टरों से चर्चा की गई।
इसके अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, बुरहानपुर की रिपोर्ट तथा कलेक्टर द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट भी प्राप्त हुई।
भूख हड़ताल से बढ़ा दबाव
परिजनों ने कार्रवाई की मांग को लेकर क्रमिक भूख हड़ताल भी की थी। शहर में निजी अस्पतालों की व्यवस्थाओं पर सवाल उठे। क्या ऑपरेशन थिएटर में सुरक्षा मानकों की अनदेखी हुई? क्या बार-बार सर्जरी जरूरी थी? क्या इमरजेंसी सुविधाएं पर्याप्त थीं? इन सवालों के जवाब अब पुलिस विवेचना में तलाशे जा रहे हैं।
आगे क्या?
पुलिस अब सभी मेडिकल रिकॉर्ड, एफएसएल रिपोर्ट और जांच समिति की टिप्पणियों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी। डॉक्टरों से पूछताछ और विशेषज्ञ राय भी ली जा सकती है। 23 साल की वैष्णवी की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है—क्या निजी अस्पतालों में मरीज सुरक्षित हैं?