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मीसाबंदी परिवार को न्याय के लिए करनी पड़ी पाँच दिन की भूख हड़ताल— सांसद के आश्वासन के बाद आंदोलन खत्म, हकीमी अस्पताल का लाइसेंस रद्द

ऑपरेशन के दौरान मौत के बाद बुरहानपुर में बवाल। भूख हड़ताल के दबाव में प्रशासन का बड़ा एक्शन

बुरहानपुर। जैनाबाद निवासी वैष्णवी चौहान की मौत के मामले ने बुरहानपुर में प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिजनों ने पाँच दिन तक शनवारा गेट के पास क्रमिक भूख हड़ताल की। शुक्रवार दोपहर खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटील के हस्तक्षेप और कार्रवाई के आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त हुआ। वहीं देर शाम मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने हकीमी अस्पताल का नर्सिंग होम पंजीयन और लाइसेंस निरस्त कर दिया।

Sadaiv Newsहम मीसाबंदी परिवार से हैं, फिर भी न्याय के लिए भटक रहे—परिजनों की पीड़ा

परिजनों ने सांसद ज्ञानेश्वर पाटील से कहा कि उनके परिवार का इतिहास मीसाबंदी और सामाजिक संघर्ष से जुड़ा है। इसके बावजूद न्याय पाने के लिए उन्हें सड़क पर बैठना पड़ा। परिजनों का दर्द साफ झलक रहा था अगर हमारे साथ ऐसा हो रहा है तो आमजन की क्या स्थिति होगी? परिवार का आरोप था कि ऑपरेशन में भारी लापरवाही के बावजूद चार सप्ताह तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, इसलिए मजबूर होकर उन्हें हड़ताल पर बैठना पड़ा।

सांसद बोले—किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, प्रशासन जांच कर रहा

शुक्रवार दोपहर सांसद ज्ञानेश्वर पाटील आंदोलन स्थल पहुँचे। परिजनों और रिश्तेदारों से मिलकर उन्होंने कहा प्रशासन से बात हो चुकी है। किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा। पूरा मामला गंभीरता से जांच में है और परिणाम जल्द सामने आएंगे। परिजन लिखित आश्वासन मांग रहे थे, लेकिन सांसद ने भरोसा दिलाया कि ADM स्तर की जांच प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

11 नवंबर को ऑपरेशन के दौरान हुई थी मौत—अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर सवाल

11 नवंबर को लालबाग रोड स्थित हकीमी अस्पताल में गर्भाशय ऑपरेशन के दौरान वैष्णवी चौहान की मौत हो गई थी। परिजनों का दावा था कि समय पर विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं बुलाए गए, ऑपरेशन थिएटर में संसाधन पर्याप्त नहीं थे, महत्वपूर्ण जानकारी परिजनों से छुपाई गई। दूसरे दिन पुलिस ने महिला अधिकारी की मौजूदगी में डॉक्टर्स की स्पेशल पैनल से पोस्टमार्टम कराया था। वहीं अस्पताल के नाले की जमीन पर अतिक्रमण की शिकायत भी परिजनों ने की थी, जिसकी जांच रिपोर्ट भी तैयार बताई जा रही है।

ADM के नेतृत्व में जांच समिति—अस्पताल सील हो सकता है

कलेक्टर के आदेश पर ADM वीर सिंह चौहान की अध्यक्षता में जांच समिति बनाई गई थी। सूत्रों के अनुसार समिति ने अपनी रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी है। अस्पताल में कई नियमों के गंभीर उल्लंघन पाए गए। अस्पताल परिसर में संसाधन मानकों के अनुरूप नहीं थे। डॉक्टर रेहाना बोहरा, जो शासकीय सेवक हैं, निजी अस्पताल में ऑपरेशन करती पाई गईं। इसके आधार पर अस्पताल को सील किए जाने की कार्रवाई भी संभव हुई।

हकीमी अस्पताल का लाइसेंस और पंजीयन निरस्त

शुक्रवार शाम को सीएमएचओ डॉ. आर. के. वर्मा ने आदेश जारी कर अस्पताल का नर्सिंग होम पंजीयन और लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया। जारी आदेश में लिखा गया अस्पताल मप्र उपचर्यागृह और रुजोपचार नियमों के अनुरूप नहीं, महत्वपूर्ण सुविधाओं और संसाधनों का अभाव, शासकीय सेवक डॉ. रेहाना बोहरा द्वारा निजी अस्पताल में ऑपरेशन करना, जो सेवा नियमों का उल्लंघन है। स्वास्थ्य विभाग ने यह कदम सीधे जांच रिपोर्ट के आधार पर उठाया।

परिजनों ने आंदोलन खत्म किया, बोले—अब उम्मीद जगी है

सांसद पाटील के आश्वासन और लाइसेंस निरस्तीकरण के आश्वासन के बाद परिजनों ने भूख हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की। परिजन बोले अब हमें विश्वास है कि न्याय मिलेगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी। स्थानीय लोगों ने भी समय पर कार्रवाई न होने पर नाराजगी जताई और कहा कि ऐसे मामलों में जल्द कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई परिवार ऐसा दर्द न झेले।

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