बुरहानपुर। मालेगांव-खंडवा में सामने आए नकली नोट कांड ने पूरे क्षेत्र की राजनीति और प्रशासन दोनों में हलचल मचा दी है। मामले में अब खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटील का बड़ा बयान सामने आया है। सांसद ने कहा कि नोट कांड से जुड़े सभी लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और मदरसों की उच्च स्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ जगहों पर जो गतिविधियां चल रही हैं, वे देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए खतरा हैं। सांसद पाटील ने कहा यह समय की मांग है कि मदरसों की जांच हो कौन संचालित कर रहा है, कौन पढ़ा रहा है और वहां क्या गतिविधियां चल रही हैं, इसका पूरा ऑडिट होना चाहिए।
सांसद श्री पाटिल ने कहा कि एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहे हैं, वहीं कुछ लोग देश की छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। यह ठीक नहीं है कि जब देश विकास की राह पर है, तब कुछ लोग देश की आर्थिक नींव को खोखला करने में लगे हैं। शासन-प्रशासन ऐसे लोगों को किसी कीमत पर बख्शेगा नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले की हर कड़ी तक पहुंचना आवश्यक है और इसमें कोई राजनीतिक या सामाजिक रियायत नहीं दी जानी चाहिए।
यह है पूरा मामला- मालेगांव से शुरू हुई जांच बुरहानपुर तक पहुंची
दरअसल, बीते सप्ताह महाराष्ट्र के मालेगांव में पुलिस ने हरीरपुरा, बुरहानपुर निवासी मौलाना जुबैर अंसारी और उसके सहयोगी नाजिर अंसारी को 10 लाख रुपए के नकली नोटों के साथ गिरफ्तार किया था। पूछताछ में सामने आया कि जुबैर अंसारी खंडवा जिले के पेठिया गांव स्थित एक मदरसे में मौलाना था। जब पुलिस ने वहां छापेमारी की तो मदरसे से 19.87 लाख रुपए के नकली नोट बरामद हुए। यह खुलासा सामने आते ही मध्यप्रदेश की जांच एजेंसियां हरकत में आ गईं।
सस्पेंडेड डॉक्टर की संदिग्ध भूमिका
जांच के दौरान बुरहानपुर के सस्पेंडेड डॉक्टर प्रतीक नवलखे का नाम भी सामने आया, जिसे इस नेटवर्क से जुड़ा बताया जा रहा है। एसआईटी (विशेष जांच दल) ने डॉक्टर के साथ-साथ मौलाना और उसके सहयोगी के बुरहानपुर स्थित घरों पर सर्चिंग की, हालांकि वहां से कोई नकली नोट नहीं मिले। फिलहाल आरोपी जुबैर और नाजिर अंसारी पुलिस रिमांड पर हैं, जबकि डॉ. नवलखे की गिरफ्तारी अभी बाकी है। पुलिस का कहना है कि मामले की तह तक पहुंचने के लिए कई संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ जारी है।
स्थानीय हस्तक्षेप की आशंका, कई लोगों में दहशत
डॉ. नवलखे का नाम सामने आने के बाद बुरहानपुर के कुछ स्थानीय व्यापारियों और परिचितों में हड़कंप मच गया है। सूत्रों के अनुसार, अस्पताल घोटाले में नाम आने के बाद डॉ. नवलखे ने कई लोगों से नकद लेन-देन किए थे। अब पुलिस यह जांच कर रही है कि कहीं यह रकम नकली नोटों से जुड़ी अवैध कमाई तो नहीं थी। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि जांच आगे बढ़ने पर कई और नाम बेनकाब हो सकते हैं।
सांसद का बयान बढ़ा सकता है जांच की दिशा
सांसद ज्ञानेश्वर पाटील का बयान ऐसे समय आया है जब मामला राज्य स्तर पर चर्चाओं में है। राजनीतिक हलकों का मानना है कि उनकी “मदरसों की जांच” वाली मांग से जांच एजेंसियों का फोकस अब केवल नकली नोट नहीं, बल्कि संस्थागत स्तर पर संदिग्ध गतिविधियों पर भी जाएगा।