बुरहानपुर। एक तरफ प्रदेश सरकार सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात कर रही है, दूसरी ओर सच्चाई सागफाटा गांव की सरकारी स्कूलों में देखी जा सकती है। हालात इतने बदतर हैं कि बारिश के मौसम में छतें टपक रही हैं, और एक ही कमरे में तीन कक्षाओं के छात्र बैठने को मजबूर हैं।
दरअसल सागफाटा मिडिल स्कूल में कक्षा 6वीं और 7वीं के छात्र पहले से ही एक ही अतिरिक्त कक्ष में बैठकर पढ़ रहे हैं। आठवीं के विद्यार्थियों की कक्षा पंचायत भवन में लगाई जाती थी, लेकिन मंगलवार को पंचायत भवन की छत भी पानी देने लगी, जिसके चलते आठवीं के बच्चों को भी उसी कक्ष में ठूंस दिया गया।
प्रायमरी स्कूल की छत पर तिरपाल: बचाव नहीं, समझौता
जयस संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष जगदीश कनासे ने बताया कि प्रायमरी स्कूल की छत से लगातार पानी टपकता है। बच्चों को बचाने के लिए स्कूल प्रशासन ने कंटिजेंसी फंड से तिरपाल डाल दिया है। यह तात्कालिक व्यवस्था भले दिखती हो, लेकिन असल में यह शिक्षा व्यवस्था की मजबूरी की तस्वीर है।
स्कूल में कुल 159 छात्र अध्ययनरत हैं, लेकिन भवन की हालत देखकर लगता है जैसे शिक्षा विभाग को इन बच्चों की कोई परवाह ही नहीं।
एक भवन पूरी तरह जर्जर, पढ़ाई बंद— नया भवन बनना जरूरी
प्रधान पाठक सुरेश गोलकर ने बताया कि तीन में से एक भवन पूरी तरह जर्जर है और उपयोग में नहीं लिया जा रहा। एक अन्य भवन में छत से पानी टपकता है, जिस पर तिरपाल डालकर पढ़ाई कराई जा रही है। जन शिक्षक राजेश कापड़े ने कहा कि समस्या की रिपोर्ट शिक्षा विभाग को भेजी गई है।
शिक्षकों की भी भारी कमी: इंग्लिश और संस्कृत के शिक्षक नहीं
जगदीश कनासे ने बताया कि सागफाटा मिडिल स्कूल में अंग्रेजी और संस्कृत विषय के शिक्षक तक नहीं हैं। भवन जर्जर हैं, शिक्षक नहीं हैं, और सुविधाओं का अभाव है— ये हालात किस तरह के ‘अधिकार के साथ शिक्षा’ की तस्वीर पेश कर रहे हैं?
सागफाटा स्कूल में पढ़ाई नहीं, जुगाड़ से चल रहा शिक्षा का सिस्टम
छत से टपकता पानी, एक कमरे में तीन क्लासें
On: August 4, 2025 9:52 AM