बुरहानपुर। बहादरपुर रोड पर करोड़ों की लागत से बने नए तहसील-एसडीएम भवन की हकीकत गुरुवार को खुद छत से गिरकर सामने आ गई। तहसीलदार प्रवीण ओहरिया के कक्ष में उनकी डायस के ठीक सामने छत का प्लास्टर अचानक नीचे आ गिरा। गनीमत रही कि उस वक्त तहसीलदार और पक्षकार कक्ष में नहीं थे, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। पास ही बैठे कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई।
यह वही भवन है, जिसमें बिना लोकार्पण के महज 15 दिन पहले ही दफ्तर शिफ्ट किए गए हैं। इतने कम समय में छत का उखड़ जाना सीधे-सीधे निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
113 करोड़ की योजना, 15 दिन में पोल खुली
बुरहानपुर में पुनर्घनत्वीकरण योजना के तहत पुराने अस्पताल, तहसील और जनपद कार्यालय की जमीन करीब 113 करोड़ रुपए में बेची गई थी। इसी रकम से नया एसडीएम कार्यालय, तहसील भवन और जनपद पंचायत भवन तैयार किया गया। एसडीएम और तहसील कार्यालय तो शिफ्ट हो गए, लेकिन अब पहली ही बारिश या नमी के पहले ही भवन की परतें उधड़ने लगी हैं।
सीएम के लोकार्पण से पहले ही शुरू कर दिया उपयोग
दरअसल 4 जनवरी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हाथों नए तहसील-एसडीएम भवन का लोकार्पण प्रस्तावित था, लेकिन दौरा रद्द हो गया। इसके बावजूद औपचारिक उद्घाटन के बिना ही दोनों दफ्तरों को नए भवन में शिफ्ट कर दिया गया, और अब उसके नतीजे सामने आ रहे हैं।
तहसीलदार बोले – सामान्य बात
घटना को लेकर तहसीलदार प्रवीण ओहरिया ने इसे सामान्य बताते हुए कहा कि पलस्तर अचानक गिरा है, कोई नुकसान नहीं हुआ। लेकिन सवाल यह है कि नया भवन है या पुराना खंडहर? अगर 15 दिन में ही पलस्तर गिरने लगे, तो आगे क्या होगा?
कांग्रेस का तीखा हमला – भाजपा का विकास मॉडल
कांग्रेस प्रवक्ता निखिल खंडेलवाल ने इस घटना को भाजपा सरकार के विकास मॉडल की असल तस्वीर बताते हुए कहा नवनिर्मित तहसील भवन में एक माह भी पूरा नहीं हुआ और छत गिरने लगी। यहां रोज अधिकारी, कर्मचारी, वकील और आम जनता आती है। आज भगवान की कृपा से जान बची, कल बड़ा हादसा हो सकता है। सड़क बनने से पहले गड्ढे, ब्रिज का लोकार्पण होने से पहले गिरना और अब तहसील की छत गिरना – यही भाजपा का विकास मॉडल है। उन्होंने निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि अगर अभी गुणवत्ता नहीं जांची गई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
बड़ा सवाल – जनता की जान किसके भरोसे?
करोड़ों की लागत से बना नया तहसील भवन, और 15 दिन में ही छत का झड़ जाना, यह सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था पर सवाल है। अब देखना यह है कि प्रशासन इसे “सामान्य घटना” मानकर छोड़ देता है या जिम्मेदारों पर कार्रवाई कर जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।