राष्ट्रीय अपराध राजनीति मध्यप्रदेश कटनी आलेख बुरहानपुर जनसम्पर्क

जनरल डिब्बे की भीड़ ऐसी कि मुसाफिर को टॉयलेट में सोना पड़ा – ये है रेलवे की असली हालत

स्लीपर-जनरल कोच घटे, कामायनी एक्सप्रेस में इंसानियत शर्मसार बुरहानपुर। भारतीय रेलवे की व्यवस्थाएं आम यात्रियों के लिए किस हद तक असंवेदनशील हो चुकी हैं, इसका जीता-जागता सबूत कामायनी एक्सप्रेस में देखने को मिला। ट्रेन के जनरल और स्लीपर कोचों में इस कदर भीड़ उमड़ी कि यात्रियों को खड़े होने तक की जगह नहीं

On: June 29, 2025 4:58 PM
Follow Us:
  • स्लीपर-जनरल कोच घटे, कामायनी एक्सप्रेस में इंसानियत शर्मसार

बुरहानपुर। भारतीय रेलवे की व्यवस्थाएं आम यात्रियों के लिए किस हद तक असंवेदनशील हो चुकी हैं, इसका जीता-जागता सबूत कामायनी एक्सप्रेस में देखने को मिला। ट्रेन के जनरल और स्लीपर कोचों में इस कदर भीड़ उमड़ी कि यात्रियों को खड़े होने तक की जगह नहीं मिली। हालात इतने बदतर थे कि किसी यात्री को नींद पूरी करने के लिए टॉयलेट की सीट को ही बिस्तर बनाना पड़ा।
Sadaiv Newsखंडवा से चढ़े एक युवक के पास न सीट थी, न जगह। ट्रेन में पैर रखने तक की जगह नहीं थी। जब कई घंटे बीत गए, शरीर थक गया और नींद हावी होने लगी, तो उसने वो किया जो कल्पना से परे है। वह ट्रेन के टॉयलेट में घुसा और उसी गंदगी से सनी सीट पर लेट गया। सिर के नीचे बैग, हाथ छाती पर और गहरी नींद में डूबा युवक—ये तस्वीर सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की हालत बयां करती है।
टॉयलेट की खिड़की से मांगनी पड़ी पानी की बोतल
Sadaiv Newsभीड़ इतनी ज्यादा थी कि टॉयलेट तक पहुंचना भी नामुमकिन सा हो गया। कई यात्रियों ने टॉयलेट की खिड़की से हाथ बाहर निकालकर पानी की बोतल मांगी। धूप में तपती ट्रेन में ये नज़ारा किसी आपातकाल से कम नहीं था। खिड़की से बाहर झांकती आंखें, पसीने से तर शरीर और दम घोंटती भीड़—ये रेलवे का वो चेहरा है जिसे कोई दिखाना नहीं चाहता।
हर बार वादे, हर बार धोखा
रेलवे प्रशासन आए दिन सुविधाएं बढ़ाने के दावे करता है, लेकिन जमीनी सच्चाई ये है कि स्लीपर और जनरल कोचों की संख्या घटाई जा रही है। नतीजा ये है कि आम यात्री की गरिमा तक खतरे में पड़ रही है। न पीने का पानी, न बैठने की जगह और न हवा—ये कैसी विकास की रेल है जो इंसान को जानवर से भी बदतर हाल में ढो रही है?
क्या सिर्फ अमीरों की रेल बनकर रह जाएगी भारतीय रेलवे?
रेलवे का यह चेहरा कई सवाल खड़े करता है। क्या आम आदमी का सफर अब सिर्फ कष्ट बनकर रह जाएगा? क्या रेल सफर अब सिर्फ वातानुकूलित डिब्बों तक ही सीमित रहेगा? और अगर हां, तो क्या रेलवे खुद अपने सामाजिक दायित्व से मुंह मोड़ रहा है?
फोटो बोलेगा हकीकत की जुबान
इस रिपोर्ट से जुड़ी तस्वीर किसी बयान से ज्यादा असरदार है। जो नहीं बोले वो तस्वीर कह दे—एक व्यक्ति टॉयलेट में पड़ा है, मानो ये उसका सफर नहीं, मजबूरी का नाम हो।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment

PNFPB Install PWA using share icon

For IOS and IPAD browsers, Install PWA using add to home screen in ios safari browser or add to dock option in macos safari browser