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जनसुनवाई में कलेक्टर से लगाई गुहार, दो तीन गुना मांग पत्र भेजने से किसान परेशान
बुरहानपुर। दो तीन सालों से प्राकृतिक आपदा, पानी की कमी आदि परेशानियां के चलते किसान फसलों का बेहतर उत्पादन नहीं ले पाए। इसके कारण वह सहकारी समिति का कर्ज भी अदा नहीं कर पा रहे हैं वहीं तहसीलदार के माध्यम से नोटिस दिए जा रहे हैं।
यह बात मंगलवार को जन सुनवाई में पहुंचे अंबाड़ा सहित आसपास के क्षेत्र के किसानों ने कही। किसान अशोक पाटिल ने कहा सहकारी समिति से लिया गया ब्याज माफ किया जाए। उन्होंने जन सुनवाई में आवेदन कर मांग की है कि हम सिर्फ मूलधन ही जमा कर पाएंगे। इसके लिए भी खेत आदि बेचकर व्यवस्था हो पाएगी।
उन्हें केवल मूलधन अदा करने की अनुमति दें। ब्याज माफ किया जाए। अंबाड़ा सहकारी समिति के गांव अंबाड़ा, तांदली, शंकरपुरा, डवालीखुर्द, नावथा, देवरीमाल, नेवरी के किसान मंगलवार के जन सुनवाई में पहुंचे। इससे कुछ दिनों पहले उन्होंने नेपानगर में एसडीएम को भी ज्ञापन दिया था। किसानों ने कहा तहसीलदार सारोला वृत्त की ओर से बकाया वसूली के लिए मांग सूची जारी की गई है। किसानों ने कहा खाद, बीज के लिए ऋण लिया था, लेकिन पिछले दो तीन सालों से प्राकृतिक आपदा और कृषि भूमि में लगे ट्यूबवेल, कुओं में अचानक पानी खत्म होने से कृषि भूमि में उचित फसल नहीं मिली। जिसके कारण किसान आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित अंबाड़ा से लिया गया लोन अदा नहीं कर पाए। इसकी वजह से आदिम जाति सेवा सहकारी समिति द्वारा हमारी ऋण राशि से दोगुनी तीगुनी राशि आंकलन कर हमें उतनी राशि का मांग पत्र भेजकर जमा कराने को कहा है। जो विधि के विपरीत है। इसका अदा किया जाना संभव नहीं है। किसानों ने कहा वह केवल मूलधन अदा कर सकते हैं। यह राशि भी तीन किश्त में अदा करेंगे।
इन किसानों पर कर्ज बकाया
चंदु बाई जवाहरलाल, पूनमचंद कालुराम, प्रताप पित राजाराम, सौहद्रा मेहताप, संतोष देवचंद, गुफाबाई रमेश, विश्वनाथ रामकृष्णा, पार्वती पिता मनोहर, रामु दीना, मोरसिंग रतनसिंग, नारायण पिता शंभुलाल, सुरेश पिता रामलाल, गफु बाई फल्लु, मनोहर हीरालाल शांताबाई पत्नी, सायबू बाबू, मनीषा अशोक, मेतीराम चतरू, किवजय गोबरू, रोहिदास महाजन, रेशम बाई, विठ्ठल आदि पर भी लोन बकाया है। सभी ने मूलधन जमा करने का आवेदन जन सुनवाई में दिया।
एसडीएम ने डीआर को भेजी थी मांग
कुछ दिनों पहले इन्हीं किसानों ने एक शिकायत नेपानगर एसडीएम भागीरथ वाखला को कर मांग की थी कि उन्हें मूलधन अदा करने की अनुमति दी जाए, लेकिन एसडीएम ने इसे सहकारिता विभाग के तहत आना बताते हुए डीआर को आवेदन भिजवा दिया था तो वहीं अब किसान जनसुनवाई में पहुंचे।
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