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उज्जैन से पहुंची टीम ने शुरू की कार्रवाई, जांच में सामने आएंगे बड़े खुलासे?
बुरहानपुर। शहर में ट्यूबवेल खनन में कथित भ्रष्टाचार को लेकर जांच शुरू हो गई है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संयुक्त संचालक उज्जैन से आई तीन सदस्यीय टीम ने शुक्रवार को जांच प्रक्रिया शुरू की और शनिवार को भी गहराई से निरीक्षण किया। यह जांच बुरहानपुर विधायक अर्चना चिटनिस द्वारा विधानसभा में उठाए गए सवाल के बाद शुरू हुई है।
दरअसल टीम ने बुरहानपुर के राजपुरा, मोमिनपुरा, सागरवाड़ी और शहदरा इलाकों में पांच ट्यूबवेल की गहराई और चौड़ाई की जांच की। कुल 7 ट्यूबवेल की जांच की जानी है। रिपोर्ट तैयार करने के बाद यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो आगे की कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
विधायक ने विधानसभा में उठाया था मामला
बुरहानपुर विधायक अर्चना चिटनिस ने हाल ही में विधानसभा में नगर निगम द्वारा किए गए ट्यूबवेल खनन में भारी भ्रष्टाचार की ओर ध्यान आकर्षित किया था। उन्होंने कहा था कि बुरहानपुर में 9 स्थानों पर ठेकेदार द्वारा अनियमितताएं की गईं, जिसकी शिकायत उन्होंने की थी। उनके अनुसार, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, भोपाल के प्रमुख अभियंता ने इस शिकायत की जांच के लिए जनवरी 2024 में उज्जैन संभाग के अधीक्षण यंत्री को आदेश दिया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। लंबे समय तक जांच नहीं होने के कारण जलावर्धन योजना के क्रियान्वयन के दौरान बड़ी संख्या में ट्यूबवेल खनन कर दिए गए, जिनमें से कुछ पहले से स्वीकृत थे और कई नए बनाए गए।
शहर में ट्यूबवेल खनन का इतिहास
नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार, 2014 तक बुरहानपुर में 150 ट्यूबवेल थे, लेकिन अब यह संख्या 350 से अधिक हो चुकी है। ट्यूबवेल पर निगम को हर महीने करीब एक करोड़ रुपए का खर्च उठाना पड़ता है।
बुरहानपुर, जिसकी आबादी लगभग ढाई लाख है, पहले पूरी तरह भूमिगत जल स्रोतों पर निर्भर था। पहले यहां दो संपवेल से पेयजल और ट्यूबवेल से दैनिक उपयोग का पानी मिलता था। अब शहर के अधिकतर इलाकों में जलावर्धन योजना के तहत पानी की आपूर्ति की जा रही है।
जांच प्रक्रिया और आगे की कार्रवाई
जांच के दौरान नगर निगम इंजीनियर प्रेम कुमार साहू, सहायक यंत्री अशोक पाटिल, उपयंत्री सुनील चौहान और ठेकेदार सागर प्राणलाल समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। टीम सभी जानकारियां दर्ज कर रही है, और रिपोर्ट तैयार होने के बाद आगे की कार्रवाई होगी। अगर जांच में गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह जांच शहर में पारदर्शिता और जल संसाधनों के सही उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। अब देखना यह होगा कि जांच के नतीजे क्या आते हैं और क्या दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई होती है या नहीं!