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जीआई टैग के लिए बुरहानपुर के केले का प्रेजेंटेशन, केंद्र सरकार की टीम ने की समीक्षा

बुरहानपुर के केले को जीआई टैग मिलने की उम्मीद, उज्जैन में हुई अहम बैठक बुरहानपुर। करीब दो साल के लंबे इंतजार के बाद बुरहानपुर के प्रसिद्ध केले को भौगोलिक संकेत (GI – Geographical Indication) टैग दिलाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। गुरुवार को उज्जैन में जीआई टैगिंग के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक

On: March 20, 2025 8:33 PM
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  • बुरहानपुर के केले को जीआई टैग मिलने की उम्मीद, उज्जैन में हुई अहम बैठक

बुरहानपुर। करीब दो साल के लंबे इंतजार के बाद बुरहानपुर के प्रसिद्ध केले को भौगोलिक संकेत (GI – Geographical Indication) टैग दिलाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। गुरुवार को उज्जैन में जीआई टैगिंग के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें मध्यप्रदेश के 16 जिलों के अधिकारियों को बुलाया गया था। हालांकि, केवल 10 जिले ही बैठक में शामिल हुए। बैठक में केंद्र सरकार की विशेषज्ञ टीम और जीआई टैग मध्यप्रदेश के डायरेक्टर लक्ष्मीकांत दीक्षित भी उपस्थित थे।
बुरहानपुर के केले की विशेषता और जीआई टैगिंग प्रक्रिया
बैठक में बुरहानपुर जिले के वैज्ञानिकों और उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने केले की विशिष्टताओं को प्रस्तुत किया और बताया कि यह स्वाद, गुणवत्ता और पोषक तत्वों में अन्य क्षेत्रों के केले से अलग और बेहतर है। जीआई टैग मिलने से बुरहानपुर के केले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी, जिससे इसकी निर्यात क्षमता कई गुना बढ़ सकती है।
इस बैठक में मध्यप्रदेश के अन्य जिलों के उत्पादों को भी प्रस्तुत किया गया, जिनमें शामिल हैं देवास: खुरचन (मलाई से बना मिष्ठान) और गुलाब जामुन। नरसिंहपुर: बैंगन और इमली। इंदौर: आलू।
बैठक के दौरान केंद्र सरकार की टीम ने प्रस्तुत किए गए फलों, सब्जियों और अन्य उत्पादों की गुणवत्ता और भौगोलिक विशिष्टताओं का अध्ययन किया और अब वे अपनी रिपोर्ट लेकर दिल्ली रवाना हो गई हैं।
बैठक की गोपनीयता
इस बैठक को पूरी तरह गोपनीय रखा गया था, और मीडिया को इसमें प्रवेश की अनुमति नहीं थी। बैठक के दौरान सभी जिलों के अधिकारियों ने अपने-अपने उत्पादों की विशेषताएं, उनकी उत्पत्ति, खेती की तकनीक, मिट्टी और जलवायु के प्रभाव को विस्तार से प्रस्तुत किया। अब जीआई टैगिंग की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है, जिसका परिणाम जल्द आने की संभावना है।
बुरहानपुर में केले का उत्पादन और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
बुरहानपुर में केले की खेती का इतिहास वर्ष 1960 से जुड़ा हुआ है। उस समय जलगांव (महाराष्ट्र) से टिश्यू कल्चर केले की किस्म लाकर पहली बार 5 एकड़ भूमि पर खेती की गई थी। इससे पहले जिले में मोसम्बी और संतरे की खेती अधिक होती थी।
केले की खेती और उत्पादन का वर्तमान परिदृश्य
• 26,000 हेक्टेयर में उत्पादन: वर्तमान में बुरहानपुर जिले में लगभग 26,000 हेक्टेयर भूमि पर केला उगाया जाता है।
• 16,000 किसान सक्रिय: केले की खेती से जिले के 16,000 से अधिक किसान जुड़े हुए हैं।
• उत्कृष्ट जलवायु: बुरहानपुर का भौगोलिक स्थान और जलवायु केले की खेती के लिए उपयुक्त है।
• राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मांग: बुरहानपुर के केले की मांग भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ खाड़ी देशों में भी है।
जीआई टैग से संभावित लाभ
🔹 अंतरराष्ट्रीय पहचान: बुरहानपुर के केले को विशेष पहचान मिलेगी, जिससे इसकी बाजार कीमत बढ़ेगी।
🔹 किसानों को सीधा लाभ: जीआई टैग मिलने से किसानों को अधिक मुनाफा होगा और वे बेहतर बाजार तक पहुंच सकेंगे।
🔹 निर्यात बढ़ेगा: जीआई टैग मिलने के बाद बुरहानपुर का केला बड़े पैमाने पर निर्यात किया जा सकेगा।
🔹 बिचौलियों की भूमिका कम होगी: किसानों को सीधे उपभोक्ताओं तक अपनी उपज पहुंचाने का अवसर मिलेगा।
🔹 बुरहानपुर की ब्रांडिंग होगी: बुरहानपुर का नाम भारत और दुनिया में एक विशेष कृषि उत्पाद के रूप में स्थापित होगा।
जिले की एक नई पहचान बनेगी
बुरहानपुर का केला अपनी गुणवत्ता, स्वाद और पोषण के लिए पहले से ही प्रसिद्ध है। यदि इसे जीआई टैग मिल जाता है, तो यह न केवल किसानों के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद होगा, बल्कि बुरहानपुर जिले की एक नई पहचान भी बनेगी। अब सभी को केंद्र सरकार की अंतिम मंजूरी का इंतजार है, जिससे यह तय होगा कि बुरहानपुर का केला जल्द ही जीआई टैग की सूची में शामिल होगा या नहीं।

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