राष्ट्रीय अपराध राजनीति मध्यप्रदेश कटनी आलेख बुरहानपुर जनसम्पर्क

 48 में से 42 वन समितियों को वन विभाग ने दी थी गोंद निकालने की परमिशन, अवैज्ञानिक तरीके से गोंद निकाला तो लगा दिया प्रतिबंध

डीएफओ ने लगाया गोंद संग्रहण और निस्तारण पर प्रतिबंध बुरहानपुर। वन विभाग ने जिले की 48 में से 42 वन समितियों को सलई, धावड़ा गोंद निकालने के लिए परमिशन दी थी। करीब 20 से अधिक लाइसेंस जारी किए गए थे, लेकिन बाद में पता चला कि गोंद निकालने के लिए अवैज्ञानिक तरीके से

On: February 15, 2024 7:57 PM
Follow Us:
  • डीएफओ ने लगाया गोंद संग्रहण और निस्तारण पर प्रतिबंध

बुरहानपुर। वन विभाग ने जिले की 48 में से 42 वन समितियों को सलई, धावड़ा गोंद निकालने के लिए परमिशन दी थी। करीब 20 से अधिक लाइसेंस जारी किए गए थे, लेकिन बाद में पता चला कि गोंद निकालने के लिए अवैज्ञानिक तरीके से काम किया जा रहा है। यानी केमिकलयुक्त इंजेक्शन लगाकर गोंद निकाला जा रहा है। तब रेंजरों से मिले प्रतिवेदनों के आधार पर बुरहानपुर डीएफओ विजय सिंह ने सभी समितियो और किसी भी व्यक्ति के गोंद निकालने की प्रक्रिया पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। यह आदेश 25 फरवरी से अमल में लाया जाएगा।
दरअसल वन विभाग ने खकनार, बोदरली और शाहपुर की 48 में से 42 वन समितियों को यह काम सौंपा था। यह समितियां सलई, धावड़ा और खैर, बबूल के संग्रहण और निस्तारण के लिए अधिकृत की गई थी। पहले भी इस पर प्रतिबंध था, लेकिन दो साल के लिए इसे मुक्त कर दिया गया था। परंतु दो साल के भीतर ही बड़े पैमाने पर अवैज्ञानिक तरीके से गोंद निकालकर नुकसान पहुंचा दिया गया।
डीएफओ ने आदेश में कहा- अवैज्ञानिक तरीके से गोंद का विदोहन किया गया
डीएफओ विजय सिंह ने जारी आदेश में कहा-देखा जा रहा है कि पिछले एक साल से सलई गोंद निकालने के लालच में अवैज्ञानिक तरीके से गोंद का विदोहन किया जा रहा है जिससे सलई और धावड़ा के वृक्षों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसके परिणाम स्वरूप् सलई और धावड़ा वृक्षों के पुनरूत्पादन में कमी आने की संभावना है। परिक्षेत्र अधिकारी खकनार, बोदरली और शाहपुर द्वारा दिए गए प्रतिवेदन में भी सलई, धावड़ा सहित अन्य प्रजातियों के वृक्षों से गोंद विदोहन पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाने की अनुशंसा की गई। इसलिए मप्र वन उपज नियम 2005 के नियम 4 और 5 में निहित प्रावधानों के अनुसार संपूर्ण सामान्य वन मंडल बुरहानपुर क्षेत्र की सीमा में आरक्षित, संरक्षित वन क्षेत्रों को सलई, धावड़ा, बबूल, कुल्लु, पलाश और खैर गोंद के संग्रहण और निस्तारण पर आगामी आदेश तक प्रतिबंध लगाया जाता है।
बड़ी मुश्किल से बचाया गया था जंगल, अब गोंद के पेड़ कर रहे थे तबाह
जिला प्रशासन, पुलिस और वन विभाग ने मिलकर बड़ी मुश्किल से नावरा, नेपानगर रेंज के जगल को अतिक्रमणकारियों से मुक्त किया था, लेकिन अब इसे गोंद संग्रहणकर्ताओं ने अपना निशाना बना लिया। दो साल में काफी हद तक गोंद निकालकर सागौन की प्रजाति धावड़ा, सलई आदि को नुकसान पहुंचाया गया। लोक जनशक्ति पार्टी के नेता ष्शौकत अली, जितेंद्र रावतोले ने इसे लेकर लगातार शिकायतें की थी। उनका कहना है कि वन विभाग द्वारा अब उन लोगों से नुकसान की राशि भी वसूलना चाहिए जिन्होंने अवैज्ञानिक तरीके से गोंद निकालकर वनों को नुकसान पहुंचाया है।
….

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment

PNFPB Install PWA using share icon

For IOS and IPAD browsers, Install PWA using add to home screen in ios safari browser or add to dock option in macos safari browser