-
अब निगम की चेतावनी—मालिकों ने मकान नहीं तोड़े तो बुलडोजर से होगी कार्रवाई
बुरहानपुर। शहर में बारिश के मौसम में जर्जर मकान कभी भी बड़े हादसे की वजह बन सकते हैं, लेकिन अब तक नगर निगम की कार्रवाई नोटिस तक ही सीमित नजर आ रही थी। तीन दिन पहले नागझिरी क्षेत्र में एक कच्चा जर्जर मकान गिरा तो निगम की नींद टूटी। गनीमत रही कि मकान में कोई रह नहीं रहा था, नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता था। इस घटना के बाद निगम आयुक्त संदीप श्रीवास्तव ने सोमवार शाम अफसरों की बैठक लेकर साफ हिदायत दी कि जर्जर मकानों को लेकर अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आयुक्त की सख्ती के अगले ही दिन मंगलवार को नगर निगम का अमला मैदान में उतरा और दाउदपुरा क्षेत्र में एक पुराने कच्चे जर्जर मकान को तोड़ने की कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान निगम के अफसर और कर्मचारी मौके पर मौजूद रहे। निगम का कहना है कि शहर में अब ऐसे सभी मकानों पर कार्रवाई होगी, जो बारिश में लोगों की जान के लिए खतरा बन सकते हैं।
109 मकान चिन्हित, लेकिन अधिकांश मालिकों ने नोटिस को हल्के में लिया
नगर निगम द्वारा बारिश से पहले शहर में कुल 109 जर्जर मकानों को चिन्हित किया गया था। इन मकानों के मालिकों को नोटिस भी जारी किए गए थे। निगम ने मकान मालिकों को स्पष्ट किया था कि वे अपने स्तर पर मकान तोड़ें या उनकी मरम्मत कराएं, ताकि बारिश के दौरान कोई हादसा न हो। इसके बावजूद अधिकांश मकान मालिकों ने नोटिस को गंभीरता से नहीं लिया। कई मकान आज भी उसी जर्जर हालत में खड़े हैं। नगर निगम उपयंत्री गोपाल महाजन के अनुसार, 109 मकानों में से केवल करीब 11 से 12 लोगों ने ही अपने मकान या तो स्वयं तोड़े हैं या उनकी मरम्मत कराई है। जबकि करीब 20 से 22 मकान अब भी गंभीर रूप से जर्जर अवस्था में हैं। दाउदपुरा का मकान भी इसी श्रेणी में शामिल था। मंगलवार को निगम टीम ने मौके पर पहुंचकर उसे तोड़ने की कार्रवाई की।
नागझिरी की घटना ने खोली व्यवस्था की पोल
नागझिरी क्षेत्र में तीन दिन पहले एक कच्चा जर्जर मकान गिर गया था। राहत की बात यह रही कि उस मकान में कोई व्यक्ति नहीं रहता था। यदि मकान में कोई परिवार रह रहा होता या आसपास लोग मौजूद होते, तो यह घटना बड़े हादसे में बदल सकती थी। इस घटना ने शहर में जर्जर मकानों को लेकर बरती जा रही अनदेखी को उजागर कर दिया। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब बारिश से पहले 109 मकान चिन्हित कर लिए गए थे और नोटिस भी जारी हो चुके थे, तो कार्रवाई के लिए मकान गिरने का इंतजार क्यों किया गया? निगम हर साल बारिश से पहले जर्जर मकानों की सूची बनाता है, नोटिस जारी करता है, लेकिन कई बार कार्रवाई कागजों से आगे नहीं बढ़ पाती। इसी ढिलाई के कारण पुराने, कच्चे और कमजोर मकान बारिश में खतरा बन जाते हैं।
दाउदपुरा में बुलडोजर चला, अब बाकी मकानों की बारी
मंगलवार को दाउदपुरा क्षेत्र में निगम का अमला पहुंचा। यहां एक पुराना कच्चा मकान जर्जर हालत में था। मकान बारिश में कभी भी गिर सकता था। निगम ने इसे खतरे की श्रेणी में मानते हुए तोड़ने की कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान आसपास के लोगों की भीड़ भी जमा हो गई। निगम अमले ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मकान को गिराया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई केवल शुरुआत है। शहर में जिन मकानों की हालत अत्यंत खराब है, उन पर भी जल्द कार्रवाई की जाएगी। निगम का कहना है कि जिन मकान मालिकों ने नोटिस मिलने के बाद भी कदम नहीं उठाया, उन्हें अब अंतिम चेतावनी माननी चाहिए। ऐसे मकानों को या तो मालिक स्वयं सुरक्षित तरीके से हटाएं या मरम्मत कराएं, अन्यथा निगम अपने स्तर पर कार्रवाई करेगा।
महापौर बोलीं—हादसे का इंतजार न करें, खुद हटाएं खतरनाक भवन
महापौर माधुरी अतुल पटेल ने शहरवासियों से अपील की है कि यदि उनके स्वामित्व में कोई जर्जर या खतरनाक भवन है तो उसे स्वयं हटवा लें। उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में ऐसे भवन आसपास रहने वाले लोगों के लिए भी बड़ा खतरा बन जाते हैं। यदि भवन मालिक स्वयं कार्रवाई नहीं करेंगे तो प्रशासन भवन खाली करवाकर उसे तोड़ेगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित स्वामी की होगी।
आयुक्त बोले—अब सख्ती होगी, लापरवाही नहीं चलेगी
नगर निगम आयुक्त संदीप श्रीवास्तव ने कहा कि शहर में जर्जर मकानों को पहले ही चिन्हित कर नोटिस जारी किए जा चुके हैं। कुछ लोगों ने स्वेच्छा से मकान तोड़ लिए या मरम्मत करा ली है, लेकिन कई लोगों ने अब तक इसे गंभीरता से नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि नागझिरी में मकान गिरने की घटना के बाद अफसरों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जर्जर मकानों को लेकर लापरवाही न बरती जाए। जिन मकान मालिकों ने अब तक मकान नहीं तोड़े या उनकी मरम्मत नहीं कराई, उनके खिलाफ नगर निगम सख्त कार्रवाई करेगा। आयुक्त ने आमजन से अपील की है कि यदि उनका मकान जर्जर स्थिति में है तो उसे तत्काल ठीक कराएं या हटाएं। बारिश के मौसम में ऐसे मकान न केवल मकान मालिकों के लिए बल्कि आसपास रहने वाले लोगों और राहगीरों के लिए भी बड़ा खतरा बन सकते हैं।
हर साल नोटिस, फिर भी खतरे में लोग
शहर के कई पुराने इलाकों में कच्चे और जर्जर मकान मौजूद हैं। बारिश के दौरान इनकी दीवारें कमजोर हो जाती हैं और छतें गिरने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे मकानों के आसपास रहने वाले लोग भी खतरे में रहते हैं। नगर निगम द्वारा हर साल नोटिस जारी किए जाते हैं, लेकिन मकान मालिकों की लापरवाही और निगम की धीमी कार्रवाई के कारण स्थिति गंभीर बनी रहती है। नागझिरी की घटना ने एक बार फिर चेतावनी दे दी है कि यदि समय रहते सख्ती नहीं की गई तो किसी दिन बड़ी जनहानि हो सकती है। अब देखना होगा कि दाउदपुरा की कार्रवाई के बाद निगम बाकी जर्जर मकानों पर भी इसी तेजी से बुलडोजर चलाता है या फिर कार्रवाई एक-दो मकानों तक ही सीमित रह जाती है।
ये भी पढ़े- 84 नोटिस के बाद भी नहीं जागा निगम, बारिश में भरभराकर गिरा जर्जर मकान