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गंदे पानी पर निगम सम्मेलन में सियासी उबाल, पार्षद धरने पर बैठे; कंपनी को बचाने के आरोपों से गरमाया सदन

जलावर्धन योजना, अधूरे नल कनेक्शन और ठप विकास कार्यों पर परिषद की घेराबंदी; पार्षद बोले— चार साल निकल गए, अब जनता के बीच किस मुंह से जाएंगे

On: July 15, 2026 8:39 PM
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बुरहानपुर नगर निगम सम्मेलन में जलावर्धन योजना और गंदे पानी को लेकर विरोध करते पार्षद

बुरहानपुर। करोड़ों रुपए की जलावर्धन योजना के बावजूद शहर में कथित रूप से गंदा पानी पहुंचने, कई वार्डों में अधूरे नल कनेक्शन और पुरानी जल व्यवस्था बंद करने के मुद्दे पर बुधवार को नगर निगम का सम्मेलन अखाड़ा बन गया। बजट पर चर्चा शुरू होने से पहले ही पार्षदों ने निगम प्रशासन और निजी कंपनी को घेर लिया। आरोप लगे कि आधे शहर में योजना पूरी नहीं हुई, लेकिन ट्यूबवेल की मोटरें निकालकर पुरानी लाइनें बंद कर दी गईं। निजी कंपनी के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की मांग उठी, मगर सदन में प्रस्ताव पारित नहीं हो सका।

Sadaiv News
गंदे पानी और अधूरे नल कनेक्शन को लेकर नगर निगम सम्मेलन में पार्षदों ने जताया आक्रोश।

हंगामा केवल पानी तक सीमित नहीं रहा। पार्षद निधि, खराब सड़कें, जलभराव, रुके निर्माण कार्य, प्रधानमंत्री आवास योजना की लंबित किस्तें और सफाई व्यवस्था को लेकर भी परिषद कटघरे में रही। बहस इतनी बढ़ी कि एक महिला पार्षद स्वास्थ्य अधिकारी को हटाने की मांग करते हुए आसंदी के सामने जमीन पर बैठ गईं। निर्दलीय पार्षद अमित नवलखे भी विरोध में धरने पर बैठ गए। सुबह 11 बजे परमानंद गोविंदजीवाला ऑडिटोरियम में सम्मेलन शुरू होते ही विपक्षी और निर्दलीय पार्षदों ने सवालों की बौछार कर दी। सत्ता पक्ष को सफाई देनी पड़ी तो कई मौकों पर भाजपा और कांग्रेस पार्षद आमने-सामने आ गए।

‘चार साल में ठोस काम नहीं, चुनाव में जनता जवाब मांगेगी’

पार्षद एवं अधिवक्ता उबैद शेख ने परिषद की चार साल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब जनप्रतिनिधियों के ही काम नहीं हो रहे तो जनता की समस्याओं का समाधान कैसे होगा। पिछली बैठक में प्रत्येक पार्षद को पांच लाख रुपए की निधि देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन राशि नहीं मिली। उन्होंने पूछा कि किन वार्डों में पांच लाख रुपए दिए गए, इसका हिसाब सदन के सामने रखा जाए। हर वार्ड में 15 से 20 लाख रुपए के काम कराने की बात कही गई थी। कार्ययोजना बनी, टेंडर निकले और बाद में निरस्त कर दिए गए। कभी तकनीकी स्वीकृति नहीं बनी तो कभी दूसरे कारण बताकर काम अटकाए गए। शेख ने कहा कि परिषद के चार साल पूरे हो चुके हैं और अब केवल एक वर्ष बचा है। सड़कें खराब हैं, नालों के काम के दावे के बावजूद इस बार पहले से ज्यादा जलभराव हुआ। विकास कार्य नहीं हुए तो पार्षद चुनाव में जनता के सामने जवाब देने की स्थिति में नहीं रहेंगे।

‘आधा शहर कनेक्शन से बाहर, फिर पुरानी व्यवस्था क्यों उजाड़ी?’

पार्षद अजय उदासीन ने जलावर्धन योजना पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आज तक सभी वार्डों में नल कनेक्शन नहीं लगे हैं। शहर का बड़ा हिस्सा नई जल व्यवस्था से नहीं जुड़ा, इसके बावजूद पुरानी पाइपलाइन काट दी गई और ट्यूबवेलों से मोटरें निकाल ली गईं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कंपनी काम पूरा नहीं कर पा रही तो निगम उसके बचाव में क्यों खड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि योजना की बुनियाद से लेकर क्रियान्वयन तक गंभीर सवाल खड़े हैं। महापौर के जवाब पहले से लिखकर लाने पर भी तंज कसा और कहा कि शायद उन्हें पहले से अंदाजा था कि सदन में यही सवाल उठेंगे। पार्षद गौरव शुक्ला ने कहा कि सबसे अधिक राशि जल विभाग पर खर्च हो रही है, फिर भी शहर को साफ और पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा। उन्होंने पूछा कि लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी। शिकायतों और आपात स्थिति के लिए सार्वजनिक हेल्पलाइन नंबर जारी करने की मांग भी रखी गई।

वीडियो पर भिड़े पार्षद और आयुक्त, सदन में दिखाई गई पानी की गाद

निर्दलीय पार्षद अमित नवलखे ने जलावर्धन योजना के पानी को लेकर बनाए गए वीडियो पर नगर निगम आयुक्त संदीप श्रीवास्तव के बयान का विरोध किया। नवलखे ने कहा कि उन्होंने वीडियो में वही दिखाया जो मौके पर मिला। इस मुद्दे पर दोनों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। नवलखे ने मांग की कि कथित गंदे पानी और गाद वाला वीडियो पूरे सदन के सामने चलाया जाए। मांग पर कार्रवाई नहीं होने पर वे जमीन पर बैठ गए। बाद में वीडियो सदन में दिखाया गया। उन्होंने निजी कंपनी के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करने की मांग भी की, लेकिन लंबी बहस के बावजूद प्रस्ताव किसी नतीजे तक नहीं पहुंचा।

‘हर घर पानी पहुंचने तक पुरानी लाइन चालू रखो’

डिप्टी स्पीकर फहीम हाशमी ने कहा कि जब तक जलावर्धन योजना से हर घर तक पर्याप्त और स्वच्छ पानी नहीं पहुंचता, तब तक पुरानी जल प्रदाय व्यवस्था बंद नहीं की जानी चाहिए। बिजली खर्च का बहाना बनाकर जनता को पानी से वंचित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि बजट और फंडिंग से पहले नागरिकों की बुनियादी जरूरत देखनी होगी। पानी जीवन से जुड़ा मुद्दा है, इसलिए जहां नई लाइन पूरी नहीं हुई वहां पुरानी लाइन और ट्यूबवेल तत्काल चालू रखे जाएं। पार्षद संभाजी सगरे ने भी माना कि जलावर्धन योजना में गंभीर खामियां हैं। उन्होंने महापौर से मांग की कि आयुक्त को स्पष्ट निर्देश देकर कमियों को समय-सीमा में दूर कराया जाए।

कंपनी पर कार्रवाई को लेकर सदन में राजनीतिक खींचतान

बैठक में निजी कंपनी के खिलाफ कार्रवाई को लेकर भी राजनीतिक मतभेद खुलकर सामने आए। विधायक प्रतिनिधि चिंतामन महाजन ने कहा कि कंपनी के खिलाफ निर्णय लेने में जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए। इस पर उबैद शेख ने पलटवार करते हुए कहा कि पार्षद सरकार की नीति का विरोध नहीं कर रहे, लेकिन यदि कंपनी ठीक से काम नहीं कर रही तो उसकी हिमायत क्यों की जा रही है। सदन में यह सवाल बार-बार गूंजा कि जलावर्धन योजना की जिम्मेदारी आखिर किसकी है— कंपनी की, एमपीयूडीसी की या नगर निगम की। पार्षदों का आरोप था कि हर स्तर पर जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालकर जनता की परेशानी को टाला जा रहा है।

बैठक में सांसद प्रतिनिधि के रूप में अधिवक्ता आदित्य प्रजापति पहली बार शामिल हुए, जबकि विधायक प्रतिनिधि चिंतामन महाजन भी मौजूद रहे। उनकी मौजूदगी के बीच जलावर्धन योजना का मुद्दा प्रशासनिक से ज्यादा राजनीतिक रंग लेता नजर आया।

सफाई पर हंगामा, महिला पार्षद आसंदी के सामने बैठीं

पार्षद मीना मोरे ने अपने वार्ड में सफाई नहीं होने और शिकायत के बावजूद सुनवाई न होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य अधिकारी स्वर्णिका वर्मा को फोन करने पर कॉल तक रिसीव नहीं किया जाता। इससे नाराज होकर वे अध्यक्ष की आसंदी के सामने जमीन पर बैठ गईं और स्वास्थ्य अधिकारी को हटाने की मांग करने लगीं। उनके धरने से सदन का माहौल और गरमा गया। पार्षदों ने कहा कि जब चुने हुए जनप्रतिनिधियों की शिकायत नहीं सुनी जा रही तो आम नागरिकों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

आवास योजना की किस्तों पर भी सवाल

सम्मेलन में प्रधानमंत्री आवास योजना की लंबित किस्तों का मुद्दा भी उठा। पार्षदों ने कहा कि कई हितग्राहियों के खातों में दो से तीन साल से किस्त नहीं पहुंची है। अधूरे मकानों के कारण हितग्राही परेशान हैं, लेकिन स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा। पार्षदों ने मांग की कि लंबित मामलों की वार्डवार सूची सदन में रखी जाए और किस्त जारी होने की निश्चित समय-सीमा बताई जाए।

महापौर— पांच पुरानी टंकियां चालू रखने के निर्देश

महापौर माधुरी पटेल ने स्वीकार किया कि गर्मी में भी नागरिकों को पानी की परेशानी हुई थी। उन्होंने कहा कि लीकेज के कारण जल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, लेकिन जेएमसी कंपनी और नगर निगम को मिलकर स्वच्छ पानी उपलब्ध कराना होगा। महापौर ने कहा कि जब तक जलावर्धन योजना का काम पूरी तरह समाप्त नहीं होता, तब तक शहर की पांच पुरानी पानी की टंकियां चालू रखने के निर्देश दिए गए हैं। इससे बिजली और अन्य व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त खर्च आएगा, लेकिन नागरिकों के स्वास्थ्य से समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जलस्रोतों और टंकियों की समय-समय पर सफाई कराई जाती है। समस्या के स्थायी समाधान के लिए सभी पक्षों का सहयोग जरूरी है।

आयुक्त बोले— शिकायतें एमपीयूडीसी को भेजेंगे

नगर निगम आयुक्त संदीप श्रीवास्तव ने कहा कि जलावर्धन योजना को लेकर सदन में सार्थक चर्चा हुई है। पार्षदों ने जो समस्याएं बताई हैं, उनसे एमपीयूडीसी को अवगत कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में नई पाइपलाइन नहीं डाली गई है, वहां पुरानी व्यवस्था से जल वितरण जारी है। गर्मी के दौरान उतावली जलस्रोत से भी पानी की आपूर्ति की गई थी। निगम का प्रयास है कि शहर को साफ और पर्याप्त पानी मिले। आयुक्त ने बताया कि करीब साढ़े तीन हजार घरों में टोंटियां और हैंडकैंप लगाए गए हैं। पानी का अपव्यय करने वालों को चेतावनी देते हुए कहा कि सुधार नहीं होने पर नल कनेक्शन काटने सहित कार्रवाई की जाएगी।

चार साल बाद भी पानी सबसे बड़ा सवाल

नगर निगम सम्मेलन की पूरी बहस ने परिषद के विकास दावों की राजनीतिक परीक्षा ले ली। सत्ता पक्ष पुरानी व्यवस्था चालू रखने और सुधार कराने की बात करता रहा, जबकि विपक्ष और निर्दलीय पार्षद पूछते रहे कि करोड़ों की योजना के बाद भी शहर को साफ पानी के लिए क्यों जूझना पड़ रहा है। चार साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद परिषद के सामने अब समय कम और सवाल ज्यादा हैं। जलावर्धन योजना पूरी कब होगी, हर घर तक कनेक्शन कब पहुंचेगा, कथित गंदे पानी की जिम्मेदारी कौन लेगा और निजी कंपनी पर कार्रवाई होगी या नहीं— इन सवालों का सम्मेलन में स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका।

 

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