बुरहानपुर। नेपानगर विधानसभा क्षेत्र में विकास योजनाओं की सुस्त रफ्तार और लंबित निर्माण कार्यों को लेकर विधायक मंजू राजेंद्र दादू ने अधिकारियों को साफ संदेश दे दिया है— अब कागजी प्रगति और बहानेबाजी से काम नहीं चलेगा। धुलकोट और बोरी सेक्टर की समीक्षा बैठक में उन्होंने पंचायतवार योजनाओं का हिसाब लिया और कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप प्रत्येक स्वीकृत कार्य तय समय-सीमा में पूरा होना चाहिए।
बैठक में विधायक का फोकस केवल योजनाओं की संख्या पर नहीं, बल्कि उनके जमीनी परिणाम पर रहा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सरकार गांवों के सर्वांगीण विकास और अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए काम कर रही है। ऐसे में किसी भी स्तर पर लापरवाही, उदासीनता या अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। विधायक ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों की प्रगति अब फाइलों और रिपोर्टों से नहीं, बल्कि मौके पर दिखाई देने वाले काम से आंकी जाएगी। अधिकारी नियमित मॉनिटरिंग करें और अधूरे कार्यों को प्राथमिकता से पूरा कराएं।
मनरेगा से प्रधानमंत्री आवास तक पंचायतवार लिया हिसाब
समीक्षा बैठक में मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन, मुख्यमंत्री अधोसंरचना विकास कार्य तथा 15वें और 5वें वित्त आयोग के तहत चल रहे कार्यों की ग्राम पंचायतवार समीक्षा की गई। विधायक ने अधिकारियों से लंबित कार्यों की स्थिति पूछी और निर्देश दिए कि जिन योजनाओं में काम अटका हुआ है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। पात्र हितग्राहियों के प्रकरण बिना कारण लंबित न रखे जाएं और उन्हें समय पर लाभ दिलाना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि योजनाओं का उद्देश्य केवल बजट खर्च करना नहीं, बल्कि गांवों में स्थायी सुविधाएं तैयार करना और जरूरतमंद परिवारों को वास्तविक राहत पहुंचाना है। किसी भी पात्र परिवार को विभागीय देरी या प्रक्रिया के नाम पर योजनाओं से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए।
सीसी रोड, सार्वजनिक निर्माण और जल संरक्षण पर विशेष फोकस
विधायक दादू ने ग्रामीण अधोसंरचना से जुड़े कार्यों पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि गांवों की जरूरत के अनुसार सीसी सड़क, सार्वजनिक उपयोग के निर्माण कार्य, जल संरक्षण संरचनाएं और अन्य बुनियादी सुविधाएं प्राथमिकता से तैयार की जाएं। वर्षा ऋतु को देखते हुए उन्होंने जल संरक्षण के स्थायी कार्यों को तेजी से स्वीकृत कर धरातल पर उतारने के निर्देश दिए। विधायक ने कहा कि बारिश का पानी सहेजने के लिए अभी काम नहीं हुआ तो आने वाले समय में गांवों को फिर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने विभागों से कहा कि जल संरक्षण के नाम पर केवल प्रस्ताव और कागजी योजना तैयार न की जाए, बल्कि ऐसे काम हों जिनका फायदा लंबे समय तक ग्रामीणों को मिले।
मुक्तिधाम भी अधूरा नहीं रहना चाहिए
विधायक ने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी ग्राम पंचायत में मुक्तिधाम निर्माण सहित कोई भी स्वीकृत विकास कार्य अधूरा नहीं रहना चाहिए। उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय बनाकर समय-सीमा तय करने और उसी के अनुसार काम पूरा कराने को कहा। उन्होंने संकेत दिए कि विकास कार्यों में लगातार देरी होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। पंचायत स्तर पर सचिव, रोजगार सहायक और तकनीकी अमले को भी नियमित रूप से काम की स्थिति अपडेट करने को कहा गया।
गैरहाजिर अफसरों पर फूटा गुस्सा
समीक्षा बैठक के दौरान ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के कार्यपालन यंत्री और प्रधानमंत्री आवास योजना के ब्लॉक समन्वयक की अनुपस्थिति पर विधायक ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जब क्षेत्र की महत्वपूर्ण योजनाओं की समीक्षा हो रही हो, तब जिम्मेदार अधिकारियों का बैठक से गायब रहना गंभीर लापरवाही है। समीक्षा बैठकों में संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य है और जवाबदेही से बचने की प्रवृत्ति किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विधायक के इस रुख से बैठक में मौजूद अधिकारियों को साफ संकेत मिला कि अब केवल अधीनस्थ कर्मचारियों को भेजकर जिम्मेदारी से बचना आसान नहीं होगा। जिस विभाग का काम लंबित है, उसके जिम्मेदार अधिकारी को स्वयं जवाब देना होगा।
पहले पौधारोपण, फिर विकास की समीक्षा
बैठक से पहले विधायक मंजू दादू ने धुलकोट स्थित नवीन तहसील कार्यालय परिसर में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण किया। उन्होंने कहा कि अभियान का मकसद केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उन्हें संरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित और सुरक्षित भविष्य तैयार करना है। उन्होंने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से पौधारोपण के साथ पौधों की नियमित देखभाल और सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। विधायक ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाना होगा।
राजनीतिक संदेश भी साफ— अब परिणाम दिखाने का दबाव
धुलकोट और बोरी सेक्टर की समीक्षा बैठक प्रशासनिक होने के साथ राजनीतिक रूप से भी अहम रही। विकास योजनाओं की धीमी गति, लंबित आवास, अधूरे निर्माण और ग्रामीण अधोसंरचना से जुड़े मुद्दे सीधे जनता की नाराजगी से जुड़े हैं। विधायक ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देकर यह संदेश देने की कोशिश की कि योजनाओं में देरी का ठीकरा अब केवल प्रक्रिया या तकनीकी कारणों पर नहीं फोड़ा जा सकेगा। आने वाले समय में विकास कार्यों की प्रगति मौके पर जाकर परखी जाएगी।
बैठक में जनपद पंचायत बुरहानपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, एपीओ मनरेगा, सहायक यंत्री, उपयंत्री, धुलकोट एवं बोरी सेक्टर के जनपद सदस्य, सरपंच, सचिव और ग्राम रोजगार सहायक मौजूद रहे।
इस समीक्षा के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि विधायक की सख्ती का असर जमीन पर कितनी जल्दी दिखाई देता है। अधूरे निर्माण पूरे होते हैं, पात्र परिवारों को योजनाओं का लाभ मिलता है और जल संरक्षण के काम समय पर शुरू होते हैं या फिर निर्देश एक बार फिर बैठकों और फाइलों तक सीमित रह जाते हैं।