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26 करोड़ खर्च, फिर भी पानी-गड्ढे-कचरे से जूझते वार्ड: सर्वदलीय बैठक में खुली शहर की विकास व्यवस्था की परतें

विधायक अर्चना चिटनिस और महापौर माधुरी पटेल ने भाजपा-कांग्रेस व निर्दलीय पार्षदों के साथ किया मंथन; सवाल—वार्डवार सर्वे और समय-सीमा के निर्देश जमीन पर कब उतरेंगे?

बुरहानपुर। शहर में विकास योजनाओं पर करीब 26 करोड़ रुपए खर्च होने और कई कार्य प्रगति पर होने के बावजूद वार्डों में पानी का कम दबाव, अधूरी पाइपलाइन, जलभराव, टूटी सड़कें, बदहाल ड्रेनेज, अनियमित कचरा संग्रहण, खराब स्ट्रीट लाइट और यातायात अव्यवस्था जैसी समस्याएं कायम हैं। इन समस्याओं की पूरी तस्वीर विधायक एवं पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस, महापौर माधुरी अतुल पटेल, भाजपा-कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों तथा अधिकारियों की सर्वदलीय विकास संवाद बैठक में सामने आई।

Sadaiv News
26 करोड़ के विकास कार्यों की समीक्षा, सर्वदलीय बैठक में उठा वार्डों का दर्द

बैठक में हर पार्षद ने अपने वार्ड का दर्द अधिकारियों के सामने रखा। किसी ने नलों में कम प्रेशर की शिकायत की तो किसी ने अधूरी पाइपलाइन, जलभराव और नालियों की बदहाली का मुद्दा उठाया। कई वार्डों में सड़क निर्माण और मरम्मत की जरूरत बताई गई। कचरा वाहन समय पर नहीं पहुंचने, बाजारों से नियमित कचरा नहीं उठने, खराब स्ट्रीट लाइट और अव्यवस्थित विद्युत पोलों पर भी सवाल उठे। अब बड़ा सवाल यह है कि समस्याओं की यह लंबी सूची केवल बैठक के प्रस्तावों और निर्देशों तक सीमित रहेगी या अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी?

हर वार्ड का सर्वे होगा, लेकिन रिपोर्ट और समय-सीमा कौन बताएगा?

विधायक अर्चना चिटनिस ने संबंधित अधिकारियों को प्रत्येक वार्ड की समस्या का सर्वे कर समय-सीमा में निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने साफ कहा कि विकास कार्यों में राजनीतिक आधार पर भेदभाव नहीं होगा और हर वार्ड को समान प्राथमिकता दी जाएगी। हालांकि बैठक के बाद यह स्पष्ट होना जरूरी है कि वार्डवार सर्वे कब शुरू होगा, उसकी रिपोर्ट कब तक तैयार होगी और कौन-सी समस्या कितने दिनों में हल की जाएगी। यदि विभागवार समय-सीमा सार्वजनिक की जाए तो पार्षदों और नागरिकों के लिए काम की निगरानी करना आसान होगा।

पानी पर सबसे ज्यादा सवाल: कहीं कम प्रेशर, कहीं कनेक्शन लंबित

शहर की जलप्रदाय व्यवस्था एक बार फिर बैठक के केंद्र में रही। पार्षदों ने बताया कि कई वार्डों में पर्याप्त दबाव से पानी नहीं पहुंच रहा है। कुछ क्षेत्रों में नल कनेक्शन लंबित हैं, जबकि कहीं पाइपलाइन का काम अधूरा है। विधायक ने तकनीकी खामियां तत्काल दूर करने, लंबित कनेक्शन जारी करने और शेष पाइपलाइन का काम प्राथमिकता से पूरा कराने को कहा। लेकिन शहर में जलप्रदाय को लेकर शिकायतें नई नहीं हैं। ऐसे में सिर्फ तकनीकी सुधार के निर्देश पर्याप्त नहीं होंगे। समस्या वाले वार्डों की सूची, सुधार की समय-सीमा और कार्य पूर्ण होने के बाद पानी के दबाव की जांच भी जरूरी होगी।

कचरा वाहन का समय तय होगा, खुले में कचरा फेंकने वालों पर कार्रवाई

स्वच्छता व्यवस्था पर भी पार्षदों ने खुलकर शिकायतें रखीं। कई क्षेत्रों में कचरा वाहन नियमित नहीं पहुंचने और बाजारों से समय पर कचरा नहीं उठने की समस्या सामने आई। विधायक ने घर-घर कचरा संग्रहण व्यवस्था सुधारने, वाहनों का निर्धारित समय तय करने और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने वालों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। सवाल यह भी है कि जिन क्षेत्रों में कचरा वाहन नहीं पहुंचते, वहां जिम्मेदारी किसकी तय होगी? केवल नागरिकों पर जुर्माना लगाने से व्यवस्था नहीं सुधरेगी। निगम को वाहनों की नियमितता, चालक और कर्मचारियों की उपस्थिति तथा कचरा उठाव की निगरानी भी करनी होगी।

बीएसएनएल और बिजली के पोल बने यातायात में बाधा

शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए मार्गों में बाधा बन रहे बीएसएनएल के अनुपयोगी टेलीफोन पोल हटाने, क्षतिग्रस्त विद्युत पोल बदलने और बेतरतीब तारों को व्यवस्थित करने के निर्देश दिए गए। शहर की कई संकरी और व्यस्त सड़कों पर पोल, अतिक्रमण और बेतरतीब पार्किंग यातायात की बड़ी समस्या हैं। अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय नहीं होने के कारण कार्रवाई अक्सर लंबित रहती है। अब देखना होगा कि नगर निगम, बिजली कंपनी, बीएसएनएल और यातायात विभाग संयुक्त सर्वे कर वास्तविक कार्रवाई कब शुरू करते हैं।

26 करोड़ के काम हुए तो वार्डों में समस्याएं अब भी क्यों?

बैठक में बताया गया कि कायाकल्प योजना, सड़क मरम्मत योजना और मुख्यमंत्री शहरी अधोसंरचना विकास योजना के तहत करीब 26 करोड़ रुपए के अनेक कार्य पूरे हो चुके हैं और कई कार्य प्रगति पर हैं। यह राशि शहर के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ पारदर्शिता भी जरूरी है। किन वार्डों में कितनी राशि खर्च हुई, कौन-से काम पूरे हुए, किनकी गुणवत्ता जांची गई और कौन-से कार्य अभी अधूरे हैं—इन जानकारियों को सार्वजनिक करने से विकास का वास्तविक आकलन हो सकेगा। जनता के लिए विकास का अर्थ केवल स्वीकृति और खर्च के आंकड़े नहीं, बल्कि गड्ढामुक्त सड़क, साफ नाली, पर्याप्त पानी, नियमित कचरा उठाव और रोशन गलियां हैं।

आंगनवाड़ी भवन और बीपीएल सत्यापन भी बने परेशानी

बैठक में आंगनवाड़ी भवनों से जुड़ी समस्याएं और बीपीएल कार्ड सत्यापन में आ रही कठिनाइयां भी उठीं। महिला एवं बाल विकास विभाग को समस्याओं का शीघ्र समाधान करने को कहा गया। बीपीएल सत्यापन में देरी का सीधा असर जरूरतमंद परिवारों की योजनाओं पर पड़ता है। इसलिए केवल प्रकरण निपटाने के निर्देश नहीं, बल्कि लंबित आवेदनों की संख्या और निराकरण की समय-सीमा भी तय होनी चाहिए।

हर घर दो कपड़े की थैलियां, लेकिन प्लास्टिक पर नियंत्रण भी जरूरी

प्लास्टिक मुक्त बुरहानपुर अभियान के तहत प्रत्येक परिवार को दो-दो कपड़े की थैलियां देने की योजना रखी गई। साथ ही पौधरोपण और पौधों के संरक्षण को जनभागीदारी अभियान बनाने पर जोर दिया गया। कपड़े की थैलियां बांटना सकारात्मक कदम है, लेकिन सिंगल यूज प्लास्टिक की बिक्री, भंडारण और बाजारों में उपयोग पर प्रभावी निगरानी के बिना अभियान अधूरा रहेगा। पौधे लगाने के साथ उनकी देखभाल, पानी और जीवित रहने की नियमित समीक्षा भी आवश्यक होगी।

सर्वदलीय मंच की पहल सराहनीय, असली परीक्षा क्रियान्वयन की

महापौर माधुरी पटेल ने सर्वदलीय संवाद की सराहना करते हुए कहा कि इससे पार्षदों को अपनी समस्याएं सीधे प्रशासन के सामने रखने का अवसर मिला। भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों ने भी बैठक का स्वागत किया। नगरहित के मुद्दे पर सभी दलों का एक मंच पर आना सकारात्मक संकेत है, लेकिन इस संवाद की सफलता अगली बैठक में तालियों से नहीं, पूरे हुए कामों की सूची से तय होगी। हर विभाग को स्पष्ट समय-सीमा, जिम्मेदार अधिकारी और प्रगति रिपोर्ट के साथ जवाब देना होगा। विधायक अर्चना चिटनिस ने कहा कि उद्देश्य केवल निर्माण कार्य कराना नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है। अब शहर की निगाह इस बात पर रहेगी कि बैठक में दिए गए निर्देश कितनी तेजी से सड़कों, नालियों, नलों और वार्डों की वास्तविक स्थिति बदलते हैं।

बैठक में नगर निगम अध्यक्ष अनिता अमर यादव, भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. मनोज माने, एसडीएम पल्लवी पौराणिक, निगम आयुक्त संदीप श्रीवास्तव, विभिन्न दलों के पार्षद तथा नगर निगम, महिला एवं बाल विकास, बिजली, पुलिस, यातायात, लोक निर्माण, श्रम और राजस्व विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

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