बुरहानपुर। साइबर अपराधी अब लोगों की मेहनत की कमाई पर डाका डालने के लिए नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं। बुरहानपुर के जयसिंहपुरा जैनाबाद निवासी एक महिला को महज 15 मिनट में ऐसा झांसा दिया गया कि उसके फोनपे खाते से 1 लाख 15 हजार 777 रुपए निकल गए और उसे तब तक भनक भी नहीं लगी, जब तक मोबाइल पर लगातार ट्रांजैक्शन के मैसेज आने शुरू नहीं हो गए। मामले की जांच के बाद शिकारपुरा पुलिस ने अज्ञात साइबर ठग के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) और 319(2) के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार घटना 7 जुलाई 2026 की है। जयसिंहपुरा जैनाबाद निवासी महेंद्र दांगे ने सुबह करीब 10 से 11 बजे के बीच अपने मोबाइल नंबर से पत्नी राखी दांगे के फोनपे खाते में 90 हजार रुपए ट्रांसफर किए थे। दोपहर करीब 3 बजे राखी के मोबाइल पर 9584917679 नंबर से एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने बेहद भरोसेमंद अंदाज में कहा कि उनके पति की ओर से 25 हजार रुपए आए हैं और उन्हें फोनपे वॉलेट से बैंक खाते में ट्रांसफर करना है।
पहले लिंक भेजी, फिर ओटीपी डलवाया… यहीं से शुरू हुआ खेल
कॉल करने वाले ने महिला के मोबाइल पर एक लिंक भेजी और कहा कि वह उसके बताए अनुसार प्रक्रिया पूरी करती जाए। महिला ने जैसे ही लिंक खोली और बताए अनुसार ओटीपी दर्ज किया, उसके खाते से 25 हजार रुपए कट गए। जब महिला ने इसकी जानकारी कॉल करने वाले को दी तो उसने तुरंत कहा कि “मैडम, गलती हो गई है। मैं दूसरी लिंक भेज रहा हूं, उससे आपका पैसा वापस आ जाएगा।”
महिला ठग की बातों में दोबारा आ गई। उसने दूसरी लिंक भी खोल ली। इस बार उसके खाते से 50 हजार रुपए और निकल गए। इसके बाद भी ठग नहीं रुका। कुछ ही देर में खाते से अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए रकम कटती रही और कुल 1,15,777 रुपए साइबर अपराधी के खाते में पहुंच गए।
साइबर सेल पहुंची शिकायत, जांच के बाद दर्ज हुई एफआईआर
ठगी का अहसास होने पर पीड़िता ने साइबर हेल्पलाइन और जिला साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई। प्राथमिक जांच के बाद मामला शिकारपुरा थाने भेजा गया। जांच में सामने आया कि आरोपी ने फर्जी लिंक भेजकर महिला से फोनपे की प्रक्रिया पूरी करवाई और ओटीपी का इस्तेमाल कर खाते से रकम निकाल ली। पुलिस ने जांच के आधार पर अज्ञात आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) एवं 319(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी है। साइबर सेल अब मोबाइल नंबर, ट्रांजैक्शन डिटेल और बैंक खातों के माध्यम से आरोपी तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
साइबर ठगों का नया पैटर्न
जांच में सामने आया है कि साइबर अपराधी अब सीधे बैंक अधिकारी बनकर नहीं, बल्कि फोनपे, गूगल पे और यूपीआई वॉलेट में पैसा आने का झांसा देकर लोगों को लिंक खोलने और ओटीपी दर्ज कराने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। एक बार यूजर लिंक पर क्लिक कर देता है तो उसके खाते की जानकारी अपराधियों तक पहुंच जाती है और कुछ ही मिनटों में पूरी रकम साफ हो जाती है।
पुलिस की अपील: एक क्लिक से बच सकती है आपकी जमा-पूंजी
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई पेमेंट लिंक, क्यूआर कोड या ओटीपी पर भरोसा न करें। यदि कोई व्यक्ति फोन कर पैसे आने या रिफंड का दावा करे तो उसकी बातों में न आएं। किसी भी प्रकार की साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं या निकटतम पुलिस थाने से संपर्क करें। समय पर शिकायत करने से रकम वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है।