खंडवा। पंधाना थाना क्षेत्र के ग्राम घाटाबेड़ी में शिवबाबा मंदिर से दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालुओं के साथ मारपीट और अभद्रता का मामला सामने आया है। पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया है कि भाजपा के मंडल महामंत्री बंटी राठौर अपने साथियों के साथ कथित रूप से नशे की हालत में थे और उन्होंने पहले रास्ता रोककर विवाद किया, फिर महिलाओं और बच्चों के सामने गाली-गलौज व मारपीट की। इतना ही नहीं, जब पीड़ित शिकायत लेकर पंधाना थाने पहुंचे तो वहां भी कथित तौर पर दबाव बनाने की कोशिश हुई। आरोप है कि एक भाजपा नेता ने मंडल महामंत्री को बचाने के लिए थाना प्रभारी को फोन भी किया, जबकि अंततः दर्ज एफआईआर में बंटी राठौर का नाम शामिल नहीं किया गया। मंडल महामंत्री के इस कृत्य पर भाजपा जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह तोमर से चर्चा करना चाही तो उन्होंने अपना मोबाईल रिसीव नहीं किया।
रास्ता रोकने से शुरू हुआ विवाद
मुलताई निवासी फरियादिया योगिता भावसार (49) ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह 22 जुलाई की शाम अपने परिवार के साथ शिवबाबा मंदिर के धार्मिक कार्यक्रम से लौट रही थीं। उनके साथ निखिल बुलबुले, मनीषा सरागे, विपिन सरागे और विजेंद्र सरागे भी थे।
शाम करीब 7 बजे ग्राम घाटाबेड़ी के पास सड़क पर एक सफेद कार खड़ी मिली। कार बीच रास्ते में होने के कारण विजेंद्र ने वाहन हटाने का अनुरोध किया। आरोप है कि इसी बात पर कार के बाहर खड़े व्यक्ति ने विजेंद्र की कॉलर पकड़ ली और अश्लील गालियां देते हुए मारपीट शुरू कर दी। आसपास मौजूद लोगों ने बीच-बचाव किया, लेकिन आरोपियों ने जान से मारने की धमकी दी।
पीछा कर दोबारा किया हमला
शिकायत के अनुसार श्रद्धालु वहां से निकल गए, लेकिन आरोपी कार से उनका पीछा करते रहे। करीब एक किलोमीटर आगे पुलिस के आने का इंतजार करते समय आरोपी फिर लौटे और चारों लोग वाहन से उतरकर पीड़ित परिवार पर टूट पड़े। आरोप है कि इस दौरान महिलाओं और बच्चों के साथ भी अभद्र व्यवहार किया गया। मारपीट के दौरान एक आरोपी ने पत्थर से हमला कर निखिल बुलबुले के दाहिने हाथ की छोटी उंगली और कंधे पर चोट पहुंचाई। इसके बाद डायल-112 पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को थाने लेकर गई।
थाने में बताए अपने नाम
पीड़ित पक्ष के अनुसार थाने में आरोपियों ने अपने नाम शक्तिसिंह राठौर निवासी खरगोन, बंधू मोहनसिंह सोलंकी निवासी इंदौर, धीरेंद्रपाल सिंह सोनगरा निवासी खरगोन तथा दिलीप सिंह सोनगरा निवासी खरगोन बताए।
हालांकि, पीड़ित पक्ष का आरोप है कि घटना में भाजपा मंडल महामंत्री बंटी राठौर भी शामिल थे, लेकिन उनका नाम एफआईआर में दर्ज नहीं किया गया। आरोप यह भी है कि थाने में एक भाजपा नेता ने फोन कर राजनीतिक दबाव बनाने का प्रयास किया और थाना प्रभारी से अभद्र व्यवहार भी किया गया।
एफआईआर पर उठे सवाल
घटना के बाद स्थानीय स्तर पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पीड़ित पक्ष का कहना है कि जिन लोगों ने मारपीट की, उनमें भाजपा मंडल महामंत्री की भूमिका होने के बावजूद उनका नाम एफआईआर से बाहर रखा गया। यदि यह आरोप सही है तो निष्पक्ष जांच और पुलिस कार्रवाई पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं।
फिलहाल पुलिस ने पीड़िता की शिकायत के आधार पर प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं भाजपा नेता और राजनीतिक दबाव से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। पुलिस जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।