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वनाधिकार पर फूटा बीएसपी का गुस्सा: कलेक्ट्रेट में नारेबाजी, वन विभाग पर आदिवासियों को प्रताड़ित करने के आरोप

बीएसपी बोली- सालों से जंगल की जमीन पर बसे परिवार अब भी पट्टों से वंचित; निरस्त और लंबित दावों की दोबारा जांच की मांग

बुरहानपुर। वनाधिकार के मुद्दे पर शुक्रवार को बहुजन समाज पार्टी ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ता और पदाधिकारी नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर के नाम डिप्टी कलेक्टर भागीरथ वाखला को ज्ञापन सौंपा। बीएसपी ने वन विभाग पर अनुसूचित जनजाति परिवारों को कथित रूप से मानसिक रूप से प्रताड़ित करने, वनाधिकार के दावों का निष्पक्ष परीक्षण नहीं करने और पात्र परिवारों को पट्टों से वंचित रखने के गंभीर आरोप लगाए।

Sadaiv News
बुरहानपुर में वनाधिकार पर BSP का प्रदर्शन, वन विभाग पर आदिवासियों को प्रताड़ित करने के आरोप

बीएसपी जिलाध्यक्ष प्रमोद गाढ़े ने कहा कि जिले में बड़ी संख्या में अनुसूचित जनजाति परिवार वर्षों से वन भूमि पर निवास कर खेती करते आ रहे हैं। इसके बावजूद कई परिवारों के वनाधिकार दावों का अब तक उचित परीक्षण नहीं हुआ। कई दावे निरस्त कर दिए गए तो कई लंबे समय से लंबित पड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में वन विभाग की कार्रवाई से आदिवासी परिवारों में डर और असुरक्षा का माहौल बन रहा है।

‘कानून अधिकार देता है, फिर पात्र परिवारों को इंतजार क्यों?’

बीएसपी ने सवाल उठाया कि जब वनाधिकार अधिनियम 2006 अनुसूचित जनजातियों और अन्य परंपरागत वन निवासियों के अधिकारों को मान्यता देने के लिए बनाया गया है, तो पात्र परिवारों को वर्षों बाद भी अपने अधिकार के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर क्यों काटने पड़ रहे हैं। पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि यदि कोई परिवार नियमानुसार पात्र है तो उसके दावे की निष्पक्ष जांच कर पट्टा दिया जाना चाहिए। बिना समुचित परीक्षण के दावे खारिज करना या पात्र परिवारों के खिलाफ कार्रवाई करना कानून की मूल भावना के विपरीत है।

झूठे केस बनाने का भी लगाया आरोप

ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि कुछ आदिवासी परिवारों के खिलाफ कथित रूप से झूठे प्रकरण बनाए जा रहे हैं। इससे वर्षों से वन क्षेत्र में रहने वाले परिवारों पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है। बीएसपी ने मांग की कि प्रशासन ऐसे सभी मामलों की गंभीरता से समीक्षा करे और वास्तविक पात्रता सामने आने तक किसी भी परिवार के खिलाफ अनावश्यक दमनात्मक कार्रवाई न की जाए।

निरस्त और लंबित दावों की फाइलें फिर खोलने की मांग

बीएसपी ने प्रशासन के सामने साफ मांग रखी कि वनाधिकार अधिनियम 2006 के तहत पूर्व में निरस्त किए गए और लंबित पड़े सभी दावों की दोबारा जांच कराई जाए। जांच केवल कागजी औपचारिकता तक सीमित न रहे, बल्कि संबंधित परिवारों के कब्जे, निवास, खेती और उपलब्ध दस्तावेजों का निष्पक्ष परीक्षण किया जाए। पार्टी ने पात्र अनुसूचित जनजाति परिवारों को व्यक्तिगत और सामुदायिक वनाधिकार पट्टे नियमानुसार देने की मांग भी की।

‘जांच तक उत्पीड़न बंद हो’

ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि दावों की जांच पूरी होने तक पात्र आदिवासी परिवारों के खिलाफ कथित अनावश्यक कार्रवाई, बेदखली या उत्पीड़न जैसी कार्रवाई रोकी जाए। विभागीय पत्राचार और नोटिस भी नियमानुसार ही जारी किए जाएं, ताकि किसी परिवार को बेवजह परेशान न होना पड़े।

कलेक्ट्रेट में गूंजे नारे, अब प्रशासन के जवाब का इंतजार

प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में बीएसपी कार्यकर्ता, पदाधिकारी और अनुसूचित जनजाति समाज के लोग मौजूद रहे। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी कर प्रशासन से वनाधिकार मामलों में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। अब बड़ा सवाल यह है कि बीएसपी द्वारा उठाए गए आरोपों और लंबित वनाधिकार दावों पर प्रशासन क्या रुख अपनाता है। यदि आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं तो वन विभाग की कार्यप्रणाली भी जांच के घेरे में आ सकती है। वहीं वन विभाग का पक्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

बीएसपी की प्रमुख मांगें

  • पूर्व में निरस्त और लंबित वनाधिकार दावों की पुनः निष्पक्ष जांच हो।
  • पात्र अनुसूचित जनजाति परिवारों को व्यक्तिगत व सामुदायिक वनाधिकार पट्टे दिए जाएं।
  • जांच पूरी होने तक कथित अनावश्यक कार्रवाई और उत्पीड़न रोका जाए।
  • विभागीय नोटिस और पत्राचार वनाधिकार कानून व नियमों के अनुसार किया जाए।
  • आदिवासी परिवारों के खिलाफ दर्ज कथित संदिग्ध मामलों की भी समीक्षा कराई जाए।
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